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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 09, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे 66 बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार

    Updated: Mon, 09 Jun 2025 12:50 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली पुलिस ने वज़ीरपुर और नई सब्जी मंडी क्षेत्र से 11 बांग्लादेशी परिवारों के 66 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उत्तर-पश्चिम जिले की फॉरेनर सेल ने यह ...और पढ़ें

    पुलिस ने 11 बांग्लादेशी परिवारों को पकड़ा।
    पुलिस ने 11 बांग्लादेशी परिवारों को पकड़ा।

    HighLights

    1. भरत नगर, नई सब्जी मंडी और महेंद्र पार्क चौकी क्षेत्र से पकड़ा
    2. हाल ही में हरियाणा से आकर दिल्ली में बसे थे ये बांग्लादेशी
    3. मेवात में ईंट भट्टों में काम कर गुजर बसर कर रहा था परिवार

    जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली: वजीरपुर और नई सब्जी मंडी क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे 11 परिवारों के 66 बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार किया। उत्तर-पश्चिमी जिले की फॉरेनर सेल की टीम ने यह कार्रवाई की है।

    उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस ने क्षेत्र में रह रहे इन बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान एवं गिरफ्तारी के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया।

    इस अभियान को निरीक्षक विपिन कुमार (फॉरेनर सेल) एवं रंजीव कुमार, एसीपी/फॉरेनर सेल के नेतृत्व में चलाया गया। उप निरीक्षक सपन, उप निरीक्षक श्यामबीर, सहायक उप निरीक्षक विनय की टीम बनाई।

    इस टीम में सिपाही हवा सिंह, प्रधान सिपाही टीका राम, प्रधान सिपाही प्रवीण, प्रधान सिपाही कपिल, प्रधान सिपाही विकास, सिपाही निशांत व दीपक शामिल रहे।

    भरत नगर, नई सब्जी मंडी और महेंद्र पार्क चौकी क्षेत्र से पकड़ा

    छह जून 2025 को भरत नगर, नई सब्जी मंडी एवं महेंद्र पार्क चौकी क्षेत्रों में अभियान चलाकर अवैध रूप से रह रहे 66 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया।

    यह कार्रवाई विशेष खुफिया इनपुट के आधार पर की गई थी, जिसमें इन क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी।

    उत्तर-पश्चिमी जिले की विदेशी शाखा द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेष टीमों का गठन किया गया और 06 जून को समन्वित अभियान प्रारंभ किया गया।

    हाल ही में हरियाणा से आकर दिल्ली में बसे थे ये बांग्लादेशी

    सूचना के अनुसार ये 11 परिवार हाल ही में हरियाणा से आकर दिल्ली में रहने लगे थे, जहां पुलिस की कार्रवाई के चलते उन्होंने दिल्ली में घनी आबादी वाले इलाकों में शरण ली।

    प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि ये सभी परिवार पहले गांव तैन, नूंह (पूर्व में मेवात), हरियाणा के भट्टों में श्रमिक के रूप में कार्यरत थे।

    दिल्ली आगमन के पश्चात उन्होंने निगरानी से बचने के लिए दो समूहों में बंटकर अलग-अलग क्षेत्रों में रहना शुरू किया।

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