यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kalkaji Vidhan Sabha Seat: तीन दशक से जीत का राह देख रही भाजपा, इतिहास किस पार्टी पर ज्यादा रहा मेहरबान?
दिल्ली की कालकाजी विधानसभा सीट पर पिछले तीन दशकों से भाजपा जीत का इंतजार कर रही है। इस बार फिर से त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। आम आदमी पार्टी ने ...और पढ़ें

HighLights
- तीन दशक से कालकाजी सीट पर नहीं खिला कमल, इस बार त्रिकोणीय मुकाबला।
- कालकाजी विधानसभा सीट पर 1993 में हुए पहले चुनाव में जीती थी भाजपा, तब से जीत की बाट जोह रही पार्टी।
शनि पाथौली, दक्षिणी दिल्ली। Delhi Elections 2025: भारतीय जनता पार्टी पिछले तीन दशक से कालकाजी विधानसभा सीट पर जीत की बाट जोह रही है। इस सीट पर 31 साल पहले 1993 में हुए पहले चुनाव में जीत दर्ज करने वाली भाजपा लगातार पिछड़ रही है। यहां से आम आदमी पार्टी (AAP) ने मुख्यमंत्री आतिशी (Delhi CM Atishi) को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। वह लगातार दूसरी बार कालकाजी से चुनावी मैदान में हैं।
वहीं, कांग्रेस ने अलका लांबा (Alka Lamba) पर भरोसा जताया है। यहां पर वापसी करने के लिए भाजपा ने तीन बार विधायक व दो बार सांसद रहे रमेश बिधूड़ी (Ramesh Bidhuri) को मैदान में उतारा है।
आखिरी बार 1993 में जीती थी भाजपा
कालकाजी विधानसभा सीट (Kalka Assembly Seat) पर 1993 में हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी पूर्णिमा सेठी ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के सुभाष चोपड़ा को 4012 वोट से हराया था। पूर्णिमा को 22468 और सुभाष को 18456 वोट मिले थे।
इसके बाद से आज तक भाजपा ने इस सीट पर कभी वापसी नहीं की। कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष चोपड़ा ने पूर्णिमा सेठी को 1998 और 2003 में लगातार दो चुनाव में हराया। तब से यहां भाजपा लगातार पिछड़ती आ रही है।
2015 से आप का कब्जा, अब मुख्यमंत्री मैदान में
इस सीट पर आप ने पहली बार वर्ष 2015 के चुनाव में जीत दर्ज की। तब आप प्रत्याशी अवतार सिंह ने भाजपा के हरमीत सिंह कालका को हराया था। अवतार को 55104 और हरमीत को 35335 वोट मिले थे।
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वर्ष 2020 में आप ने वर्तमान दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को चुनावी मैदान में उतारा। आतिशी ने भाजपा के धर्मबीर को 11393 वोट से हराया था। आतिशी को 55897 और धर्मबीर को 44504 वोट मिले थे। इस बार भी आप ने यहां से आतिशी को अपना उम्मीदवार बनाया है।
कांग्रेस ने तीन बार लगातार जमाया सीट पर कब्जा
इस सीट पर अभी तक कांग्रेस ने सबसे ज्यादा तीन बार कब्जा जमाया है। कांग्रेस ने 1998 से 2008 तक लगातार जीत दर्ज की। इसके अलावा आप ने दो और भाजपा एक बार जीती। यहां से शिरोमणि अकाली दल ने भी 2013 में जीत दर्ज की थी। अकाली दल से हरमीत सिंह कालका जीते थे। यहां भाजपा पांच बार चुनाव में दूसरे नंबर पर रही है।
भाजपा ने पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी पर लगाया दांव
इस सीट को जीतने के लिए भाजपा ने रमेश बिधूड़ी पर दांव लगाया है। रमेश बिधूड़ी तुगलकाबाद विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे। वर्ष 2003 से 2013 तक लगातार तीन बार चुनाव जीते।
वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में दक्षिणी दिल्ली से उम्मीदवार बनाए जाने पर शानदार जीत दर्ज की। वर्ष 2019 में भी भाजपा ने उन्हें दक्षिणी दिल्ली से अपना उम्मीदवार बनाया। इस बार बिधूड़ी ने कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा को शिकस्त दी।
कभी सहयोगी रहीं अलका ढहाएंगी आप का गढ़
राष्ट्रीय छात्र संघ से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाली अलका दिल्ली विश्वविधालय के अध्यक्ष भी रहीं। वह 2006 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का हिस्सा बनीं। उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त किया।
दिसंबर 2013 में अलका आम आदमी पार्टी में चली गईं। 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने भाजपा उम्मीदवार सुमन गुप्ता को 18 हजार से अधिक मतों से हराया था। वर्ष 2019 में आप छोड़कर वापस कांग्रेस में आ गईं।
कालकाजी सीट से कब-कब कौन जीता
| वर्ष | प्रत्याशी | पार्टी |
| 1993 | पूर्णिमा सेठी | भाजपा |
| 1998 | सुभाष चोपड़ा | कांग्रेस |
| 2003 | सुभाष चोपड़ा | कांग्रेस |
| 2008 | सुभाष चोपड़ा | कांग्रेस |
| 2013 | हरमीत सिंह कालका | शिरोमणि अकाली दल |
| 2015 | अवतार सिंह | आप |
| 2020 | आतिशी | आप |