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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 21, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Delhi News: कम सैलरी देने वालों पर HC सख्त, जामिया छात्र की याचिका पर अदालत ने दिया बड़ा निर्देश

    By Jagran NewsEdited By: Prince Sharma
    Updated: Thu, 21 Sep 2023 05:30 AM (IST)

    Delhi News एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि रोजगार बाजार पोर्टल न्यूनतम वेतन अधिनियम- 1948 का अनुपालन नह ...और पढ़ें

    Do not post advertisements that do not comply with the minimum wage law on the employment market portal: High Court
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    HighLights

    1. रोजगार बाजार पोर्टल पर न डालें न्यूनतम वेतन कानून का अनुपालन न करने वाला विज्ञापन: हाई कोर्ट
    2. जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक विधि छात्र की याचिका पर अदालत ने दिया निर्देश

    नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि रोजगार बाजार पोर्टल न्यूनतम वेतन अधिनियम- 1948 का अनुपालन नहीं करने वाला कोई भी नौकरी का विज्ञापन न डालें। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने साथ सरकार की इस दलील को नोट किया कि सॉफ्टवेयर पोर्टल को अपडेट करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं ताकि निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी दर्शाने वाला एक भी विज्ञापन अपलोड न हो।

    कोरोना प्रभावितों की मदद के लिए लाया गया था पोर्टल

    अदालत ने उक्त आदेश किसी भी व्यक्ति, कंपनी, संगठन या प्रतिष्ठान को अपने आधिकारिक पोर्टल पर निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम वेतन वाली नौकरी की रिक्तियों का विज्ञापन करने से रोकने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका पर दिल्ली सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा कि बाजार पोर्टल कोराना महामारी से प्रभावित लोगों की मदद के लिए लॉन्च किया गया था।

    नौकरी की श्रेणियों और विशिष्टताओं के बावजूद किसी को भी नौकरी पोस्ट करने में सक्षम बनाने के लिए एक साफ्टवेयर विकसित किया गया था। इतना ही नहीं पोर्टल पर पंजीकृत कुछ नियोक्ता दिल्ली सरकार के श्रम विभाग द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी की निर्धारित दरों से कम पर नौकरी की रिक्तियों का विज्ञापन कर रहे थे।

    जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के एक विधि छात्र ने याचिका दायर कर राष्ट्रीय राजधानी में श्रम कानूनों को लागू करने और बंधुआ मजदूरी को समाप्त करने की मांग की गई थी। याची ने तर्क दिया था कि आफिस ब्वाय, कुक, वेटर, कंप्यूटर आपरेटर, डिलीवरी ब्वाय, किचन हेल्पर, एम्बुलेंस ड्राइवर, चपरासी, सुरक्षा गार्ड आदि पदों के लिए नौकरी के अवसरों को निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम वेतन के साथ विज्ञापित किया जा रहा है। 

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