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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 01, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    फ्री कश्मीर और भगवा जलेगा... JNU की दीवारों पर फिर लिखे गए आपत्तिजनक स्लोगन, PM मोदी पर भी की टिप्पणी

    By Jagran NewsEdited By: Nitin Yadav
    Updated: Sun, 01 Oct 2023 02:00 PM (IST)

    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक बार फिर आपत्तिजनक स्लोगन लिखे गए हैं। भाषा अध्ययन केंद्र की दीवारों और फर्श पर देर रात स्लोगन लिखे गए हैं। जिन्हें ...और पढ़ें

    JNU की दीवारों पर फिर लिखे गए आपत्तिजनक स्लोगन।
    JNU की दीवारों पर फिर लिखे गए आपत्तिजनक स्लोगन।

    HighLights

    1. JNU की दीवारों पर फिर लिखे गए आपत्तिजनक स्लोगन
    2. PM मोदी को लेकर भी की विवादित टिप्पणी
    3. भगवा पर भी साधा निशाना

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक बार फिर आपत्तिजनक स्लोगन लिखे गए हैं। भाषा अध्ययन केंद्र की दीवारों और फर्श पर देर रात स्लोगन लिखे गए हैं। जिन्हें जेएनयू प्रशासन ने रविवार सुबह मिटा दिया है। हालांकि यह विवादित नारे किस ने लिखे हैं। इस बारे में प्रशासन में जांच शुरू कर दी है। 

    दरअसल, रविवार सुबह जेएनयू के कैंपस से कुछ तस्वीरें सामने आई थी, जिसमें कैंपस की दीवारों और फर्श पर भगवा जलेगा, ...तेरी कब्र खुदेगी, एनआरसी, सीएए जैसे आपत्तिजनक स्लोगन लिखे हुए हैं। साथ ही दीवारों और फर्श पर पीएम मोदी को लेकर भी विवादित टिप्पणी की गई है, जिसको कॉलेज प्रशासन में पोत दिया है। इसको लेकर छात्रों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। 

    JNu

    स्कूल ऑफ लैंग्वेज की हैं तस्वीरें? 

    जेएनयू से सामने आई तस्वीरों को देखकर मालूम होता है कि यह तस्वीरें जेएनयू के स्कूल ऑफ लैंग्वेज कैंपस की हैं, जहां दीवारों में फ्री कश्मीर और इंडिया अधिकृत कश्मीर जैसी विवादित बातें लिखी हैं। साथ ही कैंपस के फर्श पर भी नीले रंग से कई आपत्तिजनक बातें लिखी हुए हैं, जिन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन ने मिटा दिया है।

    JNu afd

    JNU

    विवादों से पुराना है JNU का नाता

    आपको बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं है। जब विश्वविद्यालय की दीवारों और फर्श पर इस तरह के आपत्तिजनक स्लोगन लिख गए हो। कुछ महीने पहले भी इस तरह के नारे लिखे गए थे, जिसमें जाति विशेष पर टिप्पणी की गई थी। अभी इस बारे में जेएनयू प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया गया है।

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