यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 30, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिल्ली-NCR में खराब होती हवा पर जताई नाराजगी, पूछा- क्यों बढ़ रहा प्रदूषण, कुछ अध्ययन किया और इसकी वजह क्या है?
एक माह से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी समेत पूरे दिल्ली-एनसीआर में खराब हुई हवा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक बार फिर जिम्मेदार एजेंसियो ...और पढ़ें

HighLights
- प्रदूषण के कारकों का पता लगाए बगैर कैसे होगा उपाय- एनजीटी।
- हवा की गुणवत्ता को ठीक रखने के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का दिया निर्देश।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। एक माह से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी समेत पूरे दिल्ली-एनसीआर में खराब हुई हवा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक बार फिर जिम्मेदार एजेंसियों पर सवाल उठाए। एनजीटी ने एक बार फिर पूछा क्या प्रदूषण के कारण पर कोई अध्ययन किया गया है और प्रदूषण फैलाने का मुख्य कारक क्या हैं।
एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सवाल उठाया कि क्या बिना कारण का पता लगाए प्रदूषण पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है। एनजीटी ने कहा कि हर साल पराली से प्रदूषण को लेकर जोर-शोर से चर्चा होती है, लेकिन एनजीटी के समक्ष पेश किए गए तथ्यों के अनुसार प्रदूषण होने के छह कारकों में पराली सबसे कम है।
एनजीटी ने नोट किया कि सर्वाधिक 42 प्रतिशत प्रदूषण धूल और 15 प्रतिशत प्रदूषण परिवहन से निकलने वाले धुएं से होता है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC) से पूछा कि बताएं परिवहन से होने वाले प्रदूषण को विनियमित करने के लिए क्या किया जा रहा है।
एनजीटी ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मामले की सुनवाई के पहले ही दिन कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन के संबंध में सवाल किया गया था, लेकिन आज तक न तो इसका जवाब दिया गया और न ही यह बताया गया कि भविष्य में इसे लेकर क्या योजना है।
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एनजीटी ने यह भी पूछा कि विभिन्न स्रोत से होने वाले प्रदूषण पर क्या कार्रवाई की गई और उसका नतीजा क्या निकला। सुनवाई के दौरान डीपीसीसी और दिल्ली सरकार ने कहा कि इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है।
एनजीटी ने दिल्ली व एनसीआर में हवा की गुणवत्ता के संबंध में दिल्ली सरकार, सीपीसीबी और डीपीसीसी को एक सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने कहा कि रिपोर्ट में यह बताएं कि प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे और दिल्ली की हवा की गुणवत्ता को पूरे साल किस तरह से स्वीकार्य मानक के अनुरूप बनाए रखा जा सकता है।
एनजीटी ने कहा कि इस तरह का प्लान तैयार किया जाए कि हवा की गुणवत्ता खराब स्थिति में न जाए और ग्रेप-वन न लागू करना पड़े। मामले में अगली सुनवाई छह दिसंबर को होगी।