यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मकोका मामले में कम नहीं किया जा सकता व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार: दिल्ली HC ने की अहम टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत आरोपित अरुण को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि सुनवाई का अधिकार व्यक्तिगत ...और पढ़ें

HighLights
- मकोका मामले में कम नहीं किया जा सकता व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार: हाईकोर्ट।
- गैंगस्टर मनोज मोरखेड़ी गिरोह के आरोपित अरुण को जमानत देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने की टिप्पणी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत आरोपित को दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दे दी कि सुनवाई का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण पहलू है और इसे कठोर मकोका मामलों में भी कम नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने कहा कि आरोपित अरुण मकोका के तहत वर्तमान प्राथमिकी में आठ साल से अधिक समय से हिरासत में है और मुकदमे का निष्कर्ष आने में अभी काफी समय लगेगा। अदालत ने कहा कि आरोपित की लगातार कैद भी एक अन्य मामले में चार सप्ताह के लिए पैरोल पर उसकी रिहाई में बाधा बन रही है।
60 गवाहों में से अब तक केवल 35 की ही जांच-अदालत
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक महत्वपूर्ण पहलू है। अदालत ने कहा कि यह मामला अनुच्छेद 21 के तहत संवैधानिक परीक्षण के दायरे में आता है। दिल्ली पुलिस ने स्थिति रिपोर्ट को देखते हुए अदालत ने कहा कि 60 गवाहों में से अब तक केवल 35 की ही जांच की गई है।
अदालत ने दी जमानत
आरोपित अरुण को जून 2016 में मनोज मोरखेड़ी गिरोह का सक्रिय सदस्य होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरोह मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में संचालित आपराधिक गिरोह है।
इस गिरोह पर हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, जबरन वसूली, डकैती और हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर अपराधों में शामिल होने का आरोप है। अदालत ने आरोपित को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर सशर्त नियमित जमानत दे दी।