Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 29, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने वाले इलियास ने फिर कहा- 'मैं अपने बयान पर कायम'

    By Jp YadavEdited By:
    Updated: Thu, 29 Sep 2022 01:05 PM (GMT+05:30)

    Umar Ahmed Ilyasi राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को राष्ट्रपिता और राष्ट्र ऋषि बताने वाले आल इंडिया इमाम संगठन के मुख्य इमाम डा. उमेर अह ...और पढ़ें

    डा. उमेर अहमद इलियासी और संघ प्रमुख मोहन भागवत की फाइल फोटो।
    डा. उमेर अहमद इलियासी और संघ प्रमुख मोहन भागवत की फाइल फोटो।

    नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। आल इंडिया इमाम संगठन के मुख्य इमाम डा. उमेर अहमद इलियासी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को लेकर दिए गए अपने बयान पर कायम हैं, जिसमें उन्होंने मोहन भागवत को राष्ट्र ऋषि और राष्ट्रपिता कहा था।  

    संघ प्रमुख पर दिए अपने बयान पर अडिग इलियासी

    बता दें कि पिछले दिनों दिल्ली में उमेर अहमद इलियासी से मुलाकात को लेकर बातचीत में मोहन भागवत को राष्ट्रपिता और राष्ट्र ऋषि बताया था। यह बयान इलियासी ने 22 सितंबर को तब दिया था, जब भागवत उनसे मिलने कस्तूरबा गांधी मार्ग स्थित मस्जिद पहुंचे थे। इस दौरान मोहन भागवत बाड़ा हिंदूराव स्थित मदरसा भी गए थे।

    बयान को लेकर संगठन में भी विवाद

    वहीं, इलियासी के इस बयान की कई मुस्लिम संगठन आलोचना करने के साथ उन्हें समाज से बहिष्कार करने की धमकी भी दे रहे हैं। इलियासी के संगठन में भी बयान को लेकर विवाद है। इस पर उमेर अहमद इलियासी का कहना है कि यह दिल से निकली आवाज थी। आगे जो भी चुनौती मिलेगी उसका सामना करेंगे।

    पीएफआइ का समर्थन करने वाले देश विरोधी मानसिकता के

    उधर, पापुलर फ्रंट आफ इंडिया और उसके सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध का समर्थन करते हुए आल इंडिया इमाम आर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम डा. उमेर अहमद इलियासी ने कहा कि पीएफआइ का समर्थन करने वाले देश विरोधी मानसिकता वाले हैं। उन्होंने कहा कि पीएफआइ पर कार्रवाई के मामले में वह केंद्र सरकार के साथ हैं।

    खबरें और भी

    इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से अपील है कि इस मसले पर राजनीति के साथ लोगों को बरगलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो संगठन देश के विरोध में बात करता है अथवा काम करता है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पीएफआइ व उसके सहयोगी आठ संगठनों ने देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के साथ कट्टरता को बढ़ावा दिया।