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लालकोट से राय पिथौरा तक... दिल्ली की हिंदू विरासत के संरक्षण पर क्यों नहीं ध्यान?

Published: Mon, 17 Aug 2026 01:55 AM (IST)Updated: Mon, 17 Aug 2026 05:34 AM (IST)

दिल्ली में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) मुगलकालीन स्मारकों के संरक्षण पर ध्यान दे रहा है, जबकि राजा अनंगपाल तोमर के ...और पढ़ें

दिल्ली में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) मुगलकालीन स्मारकों के संरक्षण पर ध्यान दे रहा है। इमेज एआई

दिल्ली में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) मुगलकालीन स्मारकों के संरक्षण पर ध्यान दे रहा है। इमेज एआई

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) एक तरफ मुगलकालीन स्मारकोें के संरक्षण को लेकर लगातार काम कर रहा है और इनके संरक्षण के लिए अाने वाले समय के लिए भी कार्य योजना बना रखी है, मगर दिल्ली के इतिहास में हिंदू शासन से जुड़े प्रमुख प्रमाणों के रूप में मौजूद राजा अनंगपाल तोमर के किला लालकोट और पृथ्वीराज चौहान के किला राय पिथौरा पर ध्यान नहीं है।

ऐसे में पृथ्वीराज चौहान के किले के बचे हुए अवशेष ढह रहे हैं। कुछ दिन पहले ही वर्षा में किला राय पिथौरा की दीवार का महत्वपूर्ण हिस्सा ढह गया है। पुरातत्वविदों की मानेंं तो यह घटना केवल एक पुरानी दीवार के गिरने की नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक विरासत की अनदेखी पर भी सवाल खड़े करती है, जिसके बचे हुए अवशेष दिल्ली के प्राचीन हिंदू इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं।

यहां बता दें कि दिल्ली के इतिहास में हिंदू शासन से जुड़े प्रमुख प्रमाणों के रूप में इस शहर को दिल्ली (ढिल्लिका) नाम देने वाले राजा अनंगपाल तोमर के लालकोट के दक्षिणी दिल्ली में संजय वन में अवशेष मौजूद हैं, मगर उपेक्षा के शिकार हैं। इसी तरह दक्षिणी दिल्ली के प्रेस एंक्लेव रोड पर स्थित पृथ्वीराज चौहान के किला राय पिथौरा की दीवारें गेट लगाकर पूर्व संस्कृति मंत्री जगमाेहन की पहल पर 1999 में संरक्षित की गई थीं और पृथ्वीराज चौहान की घोड़े पर सवार प्रतिमा लगाई गई थी, मगर उसके बाद से पृथ्वीराज चौहान से जुड़े प्रमाणों की उपेक्षा ही होती रही है।

किले का यह ढहा हिस्सा दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) गोल्फ क्लब के प्रमुख द्वार से कुछ ही दूरी पर स्थित है। यह स्थिति तब है जब मानसून से पहले एएसआइ की ओर से दिल्ली में संरक्षित सभी स्मारकों की स्थिति का निरीक्षण कर जरूरी संरक्षण कार्य कराने के निर्देश दिए गए थे।

यह इस साल की दूसरी घटना है, जब दिल्ली के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारक वर्षा के कारण प्रभावित हुए हैं। इससे पहले पुराना किला की झील की तरफ के बुर्ज के भी ढह जाने का मामला सामने आ चुका है। इस बारे में पूछे जाने पर एएसआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बीते साल जब किले में संरक्षण कार्य किया गया था, तब यह हिस्सा कमजोर नहीं दिख रहा था। उन्होंने कहा कि इसे ठीक करने के लिए काम शुरू कर दिया गया है।

कभी 189 एकड़ में फैला था किला राय पिथौरा

किला राय पिथौरा को प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम के तहत राष्ट्रीय महत्व का केंद्रीय संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। यह दिल्ली का पहला शहर माना जाता है, जिसका निर्माण 11वीं शताब्दी में तोमर राजा अनंगपाल तोमर ने कराया था और 12वीं शताब्दी में पृथ्वीराज चौहान ने इसका विस्तार किया था। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 189 एकड़ था, जिसके अधिकतर भाग अब नष्ट हो चुके हैं।