वोटर लिस्ट से गायब हुआ राघव चड्ढा का नाम, AAP की पंजाब सरकार पर भड़के; मोहाली से दिल्ली तक पहुंचा विवाद
SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची से राघव चड्ढा का नाम गायब होने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ...और पढ़ें

राघव चड्ढा ने आप सरकार पर साधा निशाना, आप का भी पलटवार। फोटो: आर्काइव
HighLights
राघव चड्ढा का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से गायब
भाजपा ने इसे राजनीतिक बदले की भावना बताया
आप ने चड्ढा को व्यक्तिगत जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। कभी आम आदमी पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे राघव चड्ढा के सामने अब मतदाता सूची में अपना नाम बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के बाद वे न केवल राजेंद्र नगर सीट से विधायकी छोड़कर राज्यसभा पहुंचे, बल्कि उन्होंने अपना नाम भी दिल्ली से मोहाली स्थानांतरित करा लिया था।
यह निर्णय अब उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है, क्योंकि SIR अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से उनका नाम गायब है। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है।
वे अप्रैल में छह अन्य आप सांसदों के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उनका आरोप है कि इसी का बदला लेने के लिए पंजाब की आप सरकार ने यह साजिश रची है।
दिल्ली से मोहाली ट्रांसफर कराया था नाम
चड्ढा पहले दिल्ली के मतदाता थे। वे राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से फरवरी, 2020 से मार्च, 2022 तक विधायक रहे। इस क्षेत्र की मतदाता सूची के भाग संख्या 52 में क्रम संख्या 313 पर उनका नाम दर्ज था।
मार्च 2022 में पंजाब से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपना नाम राजेंद्र नगर से मोहाली स्थानांतरित करा लिया था।
पाला बदलने के बाद राजनीतिक समीकरण बदले
दिल्ली की जगह पंजाब का मतदाता बनते समय वे आप के शीर्ष नेताओं में शामिल थे और 2022 के पंजाब चुनाव में पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार भी थे। अब राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।
पाला बदलने के बाद से वे आप पर तीखे राजनीतिक हमले बोल रहे हैं। चड्ढा का कहना है कि जब से उन्होंने और अन्य नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ली है, तब से आप नेतृत्व बौखलाया हुआ है और अपने आलोचकों के खिलाफ पंजाब पुलिस व प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर रहा है।
आप बोली, SIR में पंजाब सरकार की भूमिका नहीं
दूसरी ओर, आप ने भी इस पर कड़ा पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि SIR प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित की जाती है और इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
राघव चड्ढा अब पंजाब की बजाय दिल्ली में रहते हैं, ऐसे में मतदाता सूची में नाम बनाए रखने या स्थानांतरित कराने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी उन्हीं की है। पार्टी ने यह आरोप भी लगाया कि चड्ढा पिछली तारीखों का इस्तेमाल कर दिल्ली के राजेंद्र नगर में फिर से नाम जुड़वाने का प्रयास कर रहे हैं।
आप की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि पंजाब में जिन 20 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं, चड्ढा को उनके लिए भी आवाज उठानी चाहिए क्योंकि वहीं की जनता ने उन्हें राज्यसभा भेजा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चड्ढा अपने नाम कटने का दोष आम आदमी पार्टी पर मढ़ रहे हैं, तो क्या दिल्ली में कटे 47 लाख नामों के लिए भारतीय जनता पार्टी जिम्मेदार है?
12 सितंबर तक दर्ज कराई जा सकेगी आपत्ति
वहीं, भाजपा के कानूनी प्रकोष्ठ ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अभी केवल ड्राफ्ट रोल आया है। 12 सितंबर तक नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया जा सकता है।
निर्धारित समय सीमा से पहले चुनाव आयोग के समक्ष इस प्रशासनिक पक्षपात के विरुद्ध आधिकारिक एवं कानूनी आपत्ति दर्ज करा दी जाएगी।
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