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'नाम गायब होने पर राघव चड्ढा खुद जिम्मेदार, 20 लाख मतदाताओं के लिए भी उठाएं आवाज'; SIR घटनाक्रम पर सियासत तेज

Published: Fri, 04 Sep 2026 03:47 PM (IST)

पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत के बाद दिल्ली से मोहाली अपना वोट स्थानांतरित कराने वाले राघव चड्ढा का नाम ड्राफ्ट ...और पढ़ें

राघव चड्ढा।

राघव चड्ढा।

HighLights

  1. राघव चड्ढा का नाम पंजाब की मतदाता सूची से गायब।

  2. उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया।

  3. आप ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया बताया, भाजपा करेगी कानूनी आपत्ति।

संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के बाद राघव चड्ढा न केवल राजेंद्र नगर सीट से विधायकी छोड़कर राज्यसभा पहुंचे, बल्कि उन्होंने अपना वोट भी दिल्ली से मोहाली स्थानांतरित करा लिया था।

यह निर्णय अब उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है, क्योंकि एसआईआर अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से उनका नाम गायब है।

उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है। वे अप्रैल में छह अन्य आप सांसदों के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उनका आरोप है कि इसी का बदला लेने के लिए पंजाब की आप सरकार ने यह साजिश रची है।

2020 से मार्च 2022 तक विधायक रहे

चड्ढा पहले दिल्ली के मतदाता थे। वे राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से फरवरी 2020 से मार्च 2022 तक विधायक रहे। इस क्षेत्र की मतदाता सूची के भाग संख्या 52 में क्रम संख्या 313 पर उनका नाम दर्ज था।

राजनीतिक समीकरण बदल चुके

मार्च 2022 में पंजाब से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपना नाम राजेंद्र नगर से मोहाली स्थानांतरित करा लिया था। दिल्ली की जगह पंजाब का मतदाता बनते समय वे आप के शीर्ष नेताओं में शामिल थे और 2022 के पंजाब चुनाव में पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार भी थे। अब राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। पाला बदलने के बाद से वे आप पर तीखे राजनीतिक हमले बोल रहे हैं।

चड्ढा का कहना है कि जब से उन्होंने और अन्य नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ली है, तब से आप नेतृत्व बौखलाया हुआ है और अपने आलोचकों के खिलाफ पंजाब पुलिस व प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर रहा है।

आप का पलटवार

वहीं, दूसरी ओर, आप ने भी इस पर कड़ा पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित की जाती है और इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है। राघव चड्ढा अब पंजाब की बजाय दिल्ली में रहते हैं, ऐसे में मतदाता सूची में नाम बनाए रखने या स्थानांतरित कराने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी उन्हीं की है।

पार्टी ने यह आरोप भी लगाया कि चड्ढा पिछली तारीखों का इस्तेमाल कर दिल्ली के राजेंद्र नगर में फिर से नाम जुड़वाने का प्रयास कर रहे हैं। आप की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि पंजाब में जिन 20 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं, चड्ढा को उनके लिए भी आवाज उठानी चाहिए, क्योंकि वहीं की जनता ने उन्हें राज्यसभा भेजा है।

47 लाख नामों का जिम्मेदार कौन?

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चड्ढा अपने नाम कटने का दोष आम आदमी पार्टी पर मढ़ रहे हैं, तो क्या दिल्ली में कटे 47 लाख नामों के लिए भारतीय जनता पार्टी जिम्मेदार है? वहीं, भाजपा के कानूनी प्रकोष्ठ ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि अभी केवल ड्राफ्ट रोल आया है। 12 सितंबर तक नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया जा सकता है। निर्धारित समय सीमा से पहले चुनाव आयोग के समक्ष इस प्रशासनिक पक्षपात के विरुद्ध आधिकारिक एवं कानूनी आपत्ति दर्ज करा दी जाएगी।

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