5000 साल पुराने कंकाल खोलेंगे हड़प्पा सभ्यता के अनसुलझे राज, वैज्ञानिक अध्ययन शुरू
राखीगढ़ी से मिले 5,000 साल पुराने मानव कंकालों का वैज्ञानिक अध्ययन हड़प्पा सभ्यता के लोगों के जीवन, खान-पान और वंशावली के रहस्यों को उजागर करेगा।
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5000 साल पुराने कंकाल खोलेंगे हड़प्पा सभ्यता के राज। AI जनरेटेड
HighLights
राखीगढ़ी के मानव कंकालों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू।
हड़प्पावासियों के जीवन, खान-पान, वंशावली का पता चलेगा।
एएसआई ने कंकाल एएनएसआई, कोलकाता भेजे जांच के लिए।
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। 5,000 साल पहले हमारे यहां रहने वाले लोग कैसे दिखते थे, क्या खाते थे और उनका जीवन कैसा था? हड़प्पा सभ्यता के इन सवालों के जवाब अब राखीगढ़ी से मिले मानव कंकालों के वैज्ञानिक अध्ययन से मिलने की उम्मीद है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने पुरास्थल से मिले तीन मानव कंकालों को विस्तृत जांच के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई), कोलकाता भेजा है।
वैज्ञानिक इन कंकालों की हड्डियों और उपलब्ध जैविक अवशेषों की जांच करेंगे। साथ ही डीएनए की जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि उस समय के लोगों की वंशावली क्या थी और वे किन आबादी से जुड़े हुए थे। इससे हड़प्पावासियों के जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिल सकते हैं।

कैसे खुलेगा पुरानी सभ्यता का राज
कंकालों की जांच से वैज्ञानिकों को उस समय के लोगों के स्वास्थ्य, खान-पान और जीवनशैली के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है। हड्डियों से यह भी पता लगाया जा सकता है कि लोग किन बीमारियों से प्रभावित थे और उनका शारीरिक विकास कैसा था।
वहीं, डीएनए जांच से प्राचीन मानव आबादी के बीच संबंध और संभावित प्रवास को समझने में मदद मिल सकती है।
आधुनिक तकनीक के जरिये इन कंकालों से चेहरे की बनावट का अनुमान लगाने की कोशिश भी की जा सकती है। इससे लोगों के संभावित रूप को समझने में मदद मिलेगी, हालांकि यह वास्तविक चेहरे की तस्वीर नहीं होगी।
हड़प्पा सभ्यता को समझने में अहम
राखीगढ़ी सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े पुरास्थलों में शामिल है। यहां मिले मानव अवशेष प्राचीन भारतीय इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैज्ञानिक अध्ययन से हड़प्पावासियों के जीवन, स्वास्थ्य और उनकी आबादी के इतिहास से जुड़े कई पुराने सवालों पर नई जानकारी मिल सकती है।
जांच के नतीजे सामने आने के बाद 5,000 साल पुरानी इस सभ्यता के लोगों की जिंदगी को और करीब से समझना संभव होगा।
