सैदुलाजाब हादसा: आरोपी बिल्डर मनीष और अविनाश को साकेत कोर्ट ने तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा
सैदुलाजाब हादसे में गिरफ्तार बिल्डर मनीष खत्री और अविनाश गुप्ता को साकेत कोर्ट ने तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस उनसे कमजोर नींव पर अवैध नि ...और पढ़ें

सैदुलाजाब हादसा मामले में कोर्ट का फैसला। फाइल फोटो
HighLights
बिल्डर मनीष खत्री और अविनाश गुप्ता तीन दिन की रिमांड पर।
कमजोर नींव पर अवैध निर्माण के आरोप में पूछताछ होगी।
हादसे में छह लोगों की मौत, आठ घायल हुए थे।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। सैदुलाजाब हादसे में गिरफ्तार दोनों आरोपित बिल्डर मनीष खत्री और अविनाश गुप्ता को पुलिस ने बुधवार को साकेत कोर्ट में पेश किया। पुलिस की ओर से मामले में पूछताछ के लिए तीन दिन के रिमांड की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
इमारत के ऊपर दोनों आरोपित ही अवैध रूप से निर्माण कार्य करा रहे थे। वहीं मामले में भवन स्वामी करमवीर जेलदार पहले से ही 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है। पुलिस दोनों आरोपितों से कमजोर नींव के बावजूद निर्माण कराने, बिना स्वीकृति मंजिल बढ़ाने और लापरवाही पूर्वक काम कराते हुए लोगों की जान खतरे में डालने जैसे बिंदुओं पर पूछताछ करेगी।
हादसे में छह लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि घटना में छह लोगों की मौत हुई थी, तो वहीं आठ लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद फरार चल रहे दोनों आरोपित बिल्डर को महरौली थाने की पुलिस ने मंगलवार को वसंत कुंज क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया था। मामले में भवन स्वामी करमवीर जेलदार को पुलिस ने एक जून को गिरफ्तार किया था।
दो जून के उसे कोर्ट में पेश कर पांच दिन के पुलिस हिरासत की मांग की गई, पर तीन दिन की हिरासत स्वीकृत हुई थी। अवधि पूरी होने के बाद चार जून को कोर्ट ने आरोपित भवन स्वामी को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
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तोड़कर बनाने की बजाय कमजोर नींव पर चल रहा था काम
जानकारी के मुताबिक व्यावसायिक इमारत चार तल की थी। इसके ऊपर तीन और तल बनाए जा रहे थे। आरोपित भवन स्वामी करमवीर को उसके कुछ परिचितों ने कमजोर हो चुकी 400 वर्ग गज में बनी 15 वर्ष पुरानी चार मंजिला इमारत को तोड़कर नए सिरे से निर्माण की सलाह दी थी। पर वह नहीं माना।
बिल्डर मनीष और अविनाश को काम सौंप दिया। चार मंजिला इमारत के ऊपर दो तल बन चुके थे और तीसरे तल का काम चल रहा था। 30 मई को कमजोर नींव लोड पाकर फट गई और पूरी इमारत ढह गई। मलबा हटाने का काम अभी भी जारी है।