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सज्जन कुमार: दिल्ली की राजनीति का वो धुरंधर, जिसकी चमक 1984 के दंगों ने हमेशा के लिए छीन ली

Updated: Thu, 20 Aug 2026 09:02 PM (IST)

सज्जन कुमार, दिल्ली के एक प्रमुख कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने 1970 के दशक में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और संसद तक पहुंचे। 1984 के सिख विरोधी दंगों में उनका नाम आने के बाद उनके राजनीतिक करियर पर ग्रहण लग गया।

दिल्ली के कद्दावर नेता सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर।

दिल्ली के कद्दावर नेता सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर।

HighLights

  1. सज्जन कुमार ने 1970 के दशक में राजनीतिक करियर शुरू किया।

  2. 1984 के सिख विरोधी दंगों में नाम आने से करियर प्रभावित।

  3. 2018 में उम्रकैद की सजा के बाद कांग्रेस से इस्तीफा।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे सज्जन कुमार कभी दिल्ली की राजनीति का बेहद प्रभावशाली और मजबूत चेहरा माने जाते थे। 1970 के दशक में एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले सज्जन कुमार ने स्थानीय निकायों से लेकर संसद तक का सफर तय किया।

बाहरी दिल्ली के ग्रामीण और झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ थी। उन्होंने अपने क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों को समझकर और आम जनता से सीधा संवाद बनाकर पार्टी के भीतर अपना एक खास आधार तैयार किया।

राजनीतिक कद और प्रभाव

सज्जन कुमार का राजनीतिक कद 1980 के दशक में तेजी से उभरा। 1980 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बाहरी दिल्ली सीट से जीत दर्ज कर संसद में कदम रखा। उस दौर में यह निर्वाचन क्षेत्र देश के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्रों में से एक माना जाता था, जहां जाट, यादव, दलित और झुग्गी-झोपड़ियों की विशाल आबादी निवास करती थी।

इस क्षेत्र में उनकी संगठनात्मक क्षमता और वोट बैंक पर पकड़ इतनी मजबूत थी कि वे पार्टी के एक बड़े 'मास लीडर' (जननेता) के रूप में स्थापित हो गए। वे 1991 और फिर 2004 में भी इसी सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।

1984 सिख विरोधी दंगे और ग्रहण

अक्टूबर 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे। दिल्ली कैंट स्थित राजनगर इलाके में हुए दंगों और हिंसा में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं के दौरान हिंसक भीड़ को उकसाने और साजिश रचने के मुख्य आरोपियों में सज्जन कुमार का नाम सामने आया। इस आपराधिक मामले के सामने आने के बाद उनके चमकते राजनीतिक करियर पर गहरा ग्रहण लग गया।

उम्रकैद की सजा मिली तो कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा

सालों तक अदालती चली कार्यवाही के बाद दिसंबर 2018 में हाइकोर्ट ने सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई। यह फैसला आते ही उन्हें कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा और जेल जाना पड़ा। इस तरह चार दशकों तक दिल्ली की सत्ता के गलियारों में दबदबा रखने वाले एक प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा का अंत सलाखों के पीछे हुआ।

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