कोई IAS तो कोई बनना चाहता था IPS, सत्य निकेतन हादसे में दो साथियों की मौत से टूटा छह दोस्तों का ख्वाब
सत्य निकेतन हादसे में दो दोस्तों अर्पित जाज और अक्षत यादव की मौत से उनके और उनके चार अन्य दोस्तों ...और पढ़ें
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नवनीत गोदारा, अर्पित जाज, श्रेष्ठ चौहान (आगे बायें से), अक्षत यादव (पीली टी-शर्ट) व कृष्णा।
HighLights
सत्य निकेतन हादसे में दो होनहार दोस्तों की जान गई।
आईएएस बनने का सपना देखने वाले अर्पित जाज की मौत।
अक्षत यादव भी इस दुखद दुर्घटना का शिकार हुए।
शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। छह दोस्त...किसी का सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर नाम रोशन करना था, कोई आईपीएस बनकर देश सेवा करना चाहता था, तो कोई जज बनकर अलग पहचान बनाना चाहता था। सपने अलग, मंजिलें भी अलग, लेकिन ठाना था कि दोस्ती हमेशा कायम रखेंगे। साथ पढ़ते, साथ हंसते और भविष्य के सुनहरे ख्वाब बुनते इन दोस्तों ने शायद कभी सोचा भी नहीं था कि जिंदगी यूं बदल जाएगी।
पढ़ाई, करियर और बेहतर जिंदगी के सपनों के बीच छुट्टियों में सभी जब घर लौटे, तब नहीं जानते थे कि यह पल लौटकर नहीं आएंगे। सत्य निकेतन में सिर्फ एक इमारत नहीं, कई युवाओं के सपने और वर्षों की दोस्ती भी ढह गई है।
छह दोस्तों के ग्रुप में पांच इसी पीजी में रहते थे
हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित जाज आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज के छात्र थे। उनके साथ रह रहे नवनीत गोदारा मोतीलाल नेहरू कॉलेज में हैं। बताते हैं कि हम छह दोस्तों का ग्रुप था, जिनमें से पांच इसी पीजी में रहते थे और एक दोस्त पिछले महीने ही शिफ्ट हुआ था। छुट्टियों में सभी घर गए थे। मैं अर्पित को मेट्रो स्टेशन छोड़कर आया था।
क्या पता था कि यह हमारी आखिरी मुलाकात होगी। पांच सितंबर को अर्पित से फोन पर आखिरी बार बात हुई थी और उसने बताया था कि छह सितंबर की सुबह दिल्ली पहुंच जाएगा। उसी दिन हादसा हो गया। नवनीत रुआंसे होकर बताते हैं कि अर्पित बहुत होनहार था और वह आईएएस बनना चाहता था।
जन्मदिन मनाने का सपना रह गया अधूरा
हादसे में पीजीडीएवी कॉलेज के छात्र अक्षत यादव भी नहीं रहे। उनके रूममेट श्रेष्ठ चौहान बताते हैं कि सात सितंबर को साथ रहने वाले दोस्त सार्थक सिंधू का जन्मदिन था। सभी ने तय किया था कि छुट्टियों से वापस आने के बाद मिलकर पार्टी करेंगे।
किसी ने नहीं सोचा था कि वह मुलाकात कभी हो ही नहीं पाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले महीने ही दोस्त कृष्णा दूसरे फ्लैट में शिफ्ट हुए थे। उन्होंने ही हादसे की जानकारी फोन पर दी। अभी तक हम लोग दिल्ली लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
