सत्य निकेतन की इमारत में नहीं थे बीम-पिलर, 40 साल पुराने ढांचे पर बढ़ा दी गईं तीन मंजिलें
सत्य निकेतन में बिना बीम-पिलर वाली इमारत ढहने के बाद, एमसीडी ने बगल की दो इमारतों को भी ध्वस्त करने ...और पढ़ें

सत्य निकेतन मार्केट में गिरी इमारत के साथ वाले मकान झुकने के बाद लगाए गए आयरन जैक। जागरण
HighLights
सत्य निकेतन में बिना बीम-पिलर की इमारत ढही।
एमसीडी ने बगल की दो इमारतों को नोटिस दिया।
पुरानी इमारतों में सुरक्षा मानकों की कमी चिंताजनक।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। लगभग 40 वर्ष पहले इमारत की दो मंजिल ही बनी थी। बाद में इसके ऊपर और तीन मंजिल बढ़ा दिए गए। पुरानी स्ट्रक्चर के साथ ही नए में बीम व पिलर नहीं था। पुरानी इमारत के बेसमेंट में मरम्मत कार्य चल रहा था।
इस दौरान अचानक पूरी इमारत भरभराकर नीचे आ गई और देखते ही देखते वहां एक बड़ा मलबे का ढेर बन गया। बीम व पिलर का इस्तेमाल होने की स्थिति में मलबा टंग जाता। ज्यादा लोगों के पास बचने के चांस होते। बगल वाली दो इमारतें भी पांच मंजिल है, उसमें भी पिलर का इस्तेमाल नहीं हुआ है।
आयरन जैक से इन्हें सहारा दिया गया है। एमसीडी ने सोमवार को इन पर ध्वस्तीकरण नोटिस चस्पा की। हादसे के फौरन बाद ही दोनों को खाली करा लिया गया था। तीन दिन में मालिकों को स्वयं ही मकान तोड़ना होगा। इसके बाद एमसीडी कार्रवाई करेगी और ध्वस्तीकरण पर होने वाला सारा खर्च संबंधित मकान मालिकों से वसूलेगी।
बाद में जोड़े गए अतिरिक्त फ्लोर
स्थानीय निवासियों के मुताबिक ढही इमारत सत्य निकेतन के एक पुराने इलाके का हिस्सा थी, जहां इमारतें दशकों पहले बनी थीं और बाद में उनमें अतिरिक्त फ्लोर जोड़े गए थे। इसमें कोई पिलर नहीं था। सत्य निकेतन इलाके में अधिकांश मकान तीन-चार दशक पुराने हैं और उनमें में पिलर नहीं हैं।
स्लैब वाले मजबूत छत तो हैं, पर दीवारों कमजोर हैं। कहीं छज्जे निकाल दिए गए हैं तो कहीं सटकर बने मकानों की साझा दीवार हैं। मकानों को बाहर से तो रंग-रोगन कर चमका दिया गया है, पर अंदर सीलन और छतों-दीवारों से उखड़ते सीमेंट कभी भी बड़ा खतरा बन सकते हैं।
