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सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार चेताया, फिर भी उड़ती रही नियमों की धज्जियां; सत्य निकेतन हादसे से उठे कई सवाल

Published: Mon, 07 Sep 2026 01:35 PM (IST)

दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के बाद अवैध निर्माण पर ...और पढ़ें

दिल्ली सत्य निकेतन हादसा। जागरण

दिल्ली सत्य निकेतन हादसा। जागरण

HighLights

  1. सत्य निकेतन में इमारत ढहने से सात लोगों की मौत हुई।

  2. अदालतों की चेतावनियों के बावजूद अवैध निर्माण जारी रहा।

  3. एमसीडी और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठे।

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली में सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली में अवैध और अनधिकृत निर्माण की निगरानी पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस दिल्ली में अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए अदालतें वर्षों से सख्त निर्देश देती रही हैं, वहां ऐसे निर्माण कैसे लगातार खड़े होते और बढ़ते रहे, यह बड़ा सवाल है।

हादसे के बाद एमसीडी ने चार मंजिल से अधिक के अवैध निर्माण को तत्काल सील करने के निर्देश दिए हैं।

2006 से निगरानी तंत्र, फिर भी समस्या बरकरार

दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2006 में अदालत की निगरानी समिति बनाई गई थी। इसके बाद कई आदेशों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर निर्देश दिए गए।

वर्ष 2017 में निगरानी समिति की शक्तियां बहाल करने और विशेष कार्यबल गठित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। इसके बावजूद दिल्ली में अवैध निर्माण की समस्या बनी रही।

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2001 में ही अदालत ने बताया था खतरे का कारण

सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2001 के आदेश का हवाला देते हुए 2020 के फैसले में दर्ज किया था कि दिल्ली में अनधिकृत निर्माण बढ़ना गंभीर और खतरनाक प्रवृत्ति है।

अदालत ने कहा था कि नियमों का पालन नहीं करने वालों में कानून का भय नहीं रह गया है और इसका प्रमुख कारण कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना है। दो दशक बाद भी यह टिप्पणी प्रासंगिक नजर आती है।

2018 में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

24 मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली अनधिकृत अतिक्रमण और अवैध निर्माण से प्रभावित हो रही है। अदालत ने यह भी कहा था कि कई नागरिक एजेंसियां अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रही हैं।

अदालत ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया था।

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2020 में फिर स्पष्ट किया

14 अगस्त 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अनधिकृत निर्माण से जुड़े पुराने आदेशों और कार्रवाई की व्यवस्था की समीक्षा की। अदालत के समक्ष सीलिंग और अन्य वैधानिक कार्रवाई का मुद्दा भी आया। साफ था कि अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई का तंत्र मौजूद है, लेकिन चुनौती उसके प्रभावी क्रियान्वयन की है।

मई 2026 में हाई कोर्ट ने एमसीडी इंजीनियरों पर उठाए सवाल

सत्य निकेतन हादसे से कुछ महीने पहले 23 मई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने जोन 'ओ' में अनधिकृत निर्माण पर बेहद गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने तस्वीरों को देखकर कहा था कि एमसीडी के इंजीनियरों की निगरानी में ही ताजा अनधिकृत निर्माण किया जा रहा था।

अदालत ने संबंधित कार्यकारी अभियंताओं के नाम रिपोर्ट में रखने और उन्हें अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। साथ ही एमसीडी और डीडीए से पूछा था कि आगे का अनधिकृत निर्माण कैसे रोका जाएगा और पहले से हुए निर्माण को कैसे हटाया जाएगा।

अगस्त 2026 में भी अदालत का हस्तक्षेप

11 अगस्त 2026 के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में भी अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण को लेकर स्थिति पर चिंता सामने आई। अदालत ने एमसीडी को आगे अनधिकृत निर्माण रोकने और संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि स्वीकृत भवन योजना के बिना निर्माण न हो।

अब सवाल अदालत के आदेश से कार्रवाई तक कितना फासला

सत्य निकेतन हादसे के बाद पुलिस कार्रवाई और मजिस्ट्रेट जांच के साथ एमसीडी ने भी अवैध इमारतों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या हर हादसे के बाद सीलिंग और जांच शुरू करना ही पर्याप्त है। जब सुप्रीम कोर्ट वर्षों पहले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कह चुका है और दिल्ली हाई कोर्ट हाल तक एमसीडी इंजीनियरों की निगरानी में अनधिकृत निर्माण होने पर सवाल उठा रहा है, तो फिर निर्माण शुरू होने के समय ही उसे रोकने का तंत्र प्रभावी क्यों नहीं हो पाया सत्य निकेतन हादसा इसी जवाबदेही की अगली परीक्षा है।

अवैध निर्माण पर अदालतों की फटकार

  • 31 जुलाई 2001 : सुप्रीम कोर्ट
  • दिल्ली में अनधिकृत निर्माण को गंभीर और खतरनाक प्रवृत्ति बताया। अदालत ने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वालों में कानून का भय कम होने का प्रमुख कारण कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना है।
  • 2006 : सुप्रीम कोर्ट की निगरानी दिल्ली में अवैध निर्माण और अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई की निगरानी के लिए व्यवस्था मजबूत हुई। सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई पर जोर दिया गया।
  • 24 मई 2018 : सुप्रीम कोर्ट
  • दिल्ली में अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर चिंता जताते हुए कहा कि कई नागरिक एजेंसियां अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर रही हैं। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
  • 14 अगस्त 2020 : सुप्रीम कोर्ट
  • अनधिकृत निर्माण के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जरूरत दोहराई। सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए संबंधित नगर निकायों की शक्तियों को स्पष्ट किया।
  • 23 अक्टूबर 2024 : दिल्ली की जिला अदालत संपत्ति का निरीक्षण कर अनधिकृत निर्माण मिलने पर मालिक या कब्जाधारक को कारण बताओ नोटिस देने और निर्माण जारी रहने पर पुलिस की मदद से उसे रुकवाने के निर्देश दिए।
  • अगस्त 2025 : दिल्ली हाई कोर्ट
  • अनधिकृत निर्माण हटाने के लिए एमसीडी को पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन का मामला अदालत के सामने आया। इससे आदेशों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर सवाल उठा।
  • 23 मई 2026 : दिल्ली हाई
  • कोर्ट जोन 'ओ' में ताजा अनधिकृत निर्माण पर गंभीर टिप्पणी। अदालत ने तस्वीरों के आधार पर कहा कि एमसीडी के इंजीनियरों की निगरानी में ही अनधिकृत निर्माण हो रहा था। संबंधित कार्यकारी अभियंताओं के नाम रिपोर्ट में शामिल करने के निर्देश दिए।
  • 11 मार्च 2026 : दिल्ली हाई कोर्ट
  • अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण को सार्वजनिक आवागमन में बाधा डालने वाला मानते हुए संबंधित एजेंसियों के समन्वय से कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।
  • 11 अगस्त 2026 : दिल्ली हाई कोर्ट
  • अनधिकृत निर्माण रोकने की जिम्मेदारी एमसीडी पर डालते हुए निर्देश दिया कि स्वीकृत भवन योजना के बिना आगे निर्माण नहीं होना चाहिए।
  • 6 सितंबर 2026 : सत्य निकेतन हादसा पांच मंजिला इमारत ढहने से छह लोगों की मौत और कई लोग घायल। हादसे के बाद फिर सामने आया सवाल जब अदालतें वर्षों से चेताती रहीं तो अवैध निर्माण समय रहते क्यों नहीं रोका गया।