विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

एक करोड़ छात्रों को मुफ्त कोचिंग का तोहफा, प्रतियोगी विद्यार्थियों ने उठाए कोचिंग और पीजी के महंगे खर्च पर सवाल

Updated: Mon, 17 Aug 2026 05:35 AM (IST)

प्रधानमंत्री मोदी की 1 करोड़ छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा का छात्रों ने स्वागत किया है। हालांकि, छात्रों ने कोचिंग फीस और पीजी किराए पर नियंत्रण के लिए ठोस तंत्र की मांग की है।

प्रधानमंत्री मोदी की 1 करोड़ छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा का छात्रों ने स्वागत किया है।

प्रधानमंत्री मोदी की 1 करोड़ छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा का छात्रों ने स्वागत किया है।

शशि ठाकुर, नई दिल्ली। यूपीएससी समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देशभर से छात्र दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर पहुंचते हैं। उनके बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह में लालकिला की प्राचीर से एक करोड़ प्रतियोगी छात्रों के लिए निश्शुल्क ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा ने नई उम्मीद पैदा की है, लेकिन कोचिंग व पीजी के मकड़जाल पर लगाम लगाने के लिए ठोस तंत्र और क्रियांवयन की उनकी मांग यथावत है।

रविवार को ओल्ड राजेंद्र नगर के मुख्य मार्ग व गलियों में छात्रों ने बातचीत में कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना से उन गरीब और मध्यम वर्ग के प्रतियोगी विद्यार्थियों को लाभ होगा, जो आर्थिक मजबूरियों के चलते चाहकर तैयारी नहीं कर पाते हैं या आर्थिक दिक्कतों के चलते बीच में ही बाहर हो जाते हैं।

ऐसे मेधावी छात्रों को निश्शुल्क ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से उनके गांवों और छोटे शहरों में रहते हुए समान अवसर मिल सकेगा। लेकिन, सवाल मनमाना कोचिंग फीस वसूलने वाले नामी संस्थानों और पीजी के किराये का है, जिसपर प्रभावी अंकुश का सवाल अभी भी बना हुआ है।

ओल्ड राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर में तैयारी कर रहे छात्रों के मुताबिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर हर वर्ष लगभग तीन से पांच लाख रुपये से अधिक का खर्च हैं। जिसमें पीजी, फ्लैट, खाना, किताबें और टेस्ट सीरीज के साथ कोचिंग की फीस है, जो उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालता है। हाल के वर्षों में कोचिंग सेंटरों में हुए हादसों व प्रतियोगी परीक्षा के छात्रों के साथ दुर्घटनाओं ने भी उनकी चिंता बढ़ाई है।

नाम न छापने की शर्त पर छात्रों ने कहा कि ऐसे में कोचिंग संस्थाओं के शुल्क तथा एजुकेशन हब में पीजी, हास्टल व फ्लैट किरायों को लेकर नियामक बने। इसी तरह, सुविधाओं, व्यवस्थाओं और गुणवत्ता का मापदंड भी जरूरी है, जिसके लिए ठोस कानूनी उपाय करने होंगे।

ऑनलाइन कक्षाओं में भी शंकाओं का हो समाधान

यूपीएससी प्रतियोगी छात्र विवेक और रजत शर्मा के अनुसार, आनलाइन कक्षाएं शुरू कर देना पूर्ण समाधान नहीं है। लंबे समय तक मोबाइल या लैपटाप पर पढ़ाई करने से आंखों और कानों पर भी बुरा असर पड़ता है। साथ ही उससे वह प्रतिस्पर्धी माहौल नहीं मिल पाता जो क्लास या लाइब्रेरी में अन्य विद्यार्थियों के साथ बैठकर पढ़ने से बनता है।

इसी तरह ऑनलाइन कक्षा में शिक्षक से आमने -सामने संवाद और तत्काल शंका का समाधान भी मुश्किल होता है। ऐसे में छात्रों ने निश्शुल्क ऑनलाइन कोचिंग के लिए कक्षाओं की निश्चित समय- सारणी, बेहतर इंटरनेट, अनुभवी शिक्षकों और नियमित निगरानी की व्यवस्था व पढ़ाई गुणवत्ता के लिए विशेषज्ञों की कमेटी का सुझाव दिया।