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दिल्ली के तरुण हत्याकांड में आरोपी की उम्र पर नया मोड़, आधार कार्ड में डेट ऑफ बर्थ का बड़ा अंतर

Published: Sun, 06 Sep 2026 12:53 PM (IST)

तरुण हत्याकांड में मुख्य आरोपी की उम्र तय करने को लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में सुनवाई हुई। इस दौरान एसडीएम ...और पढ़ें

दिल्ली तरुण हत्याकांड। जागरण

दिल्ली तरुण हत्याकांड। जागरण

HighLights

  1. तरुण हत्याकांड के आरोपी की उम्र निर्धारण पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में सुनवाई।

  2. एसडीएम कार्यालय से पेश आधार कार्ड में जन्मतिथि का बड़ा अंतर सामने आया।

  3. अभियोजन पक्ष ने आरोपी का 2012 का वीडियो भी प्रस्तुत किया।

मुकेश ठाकुर, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली में उत्तम नगर के हस्तसाल में होली की रात हुए तरुण हत्याकांड में मुख्य आरोपी के बालिग या नाबालिग होने को लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) में शनिवार को सुनवाई हुई।

वहीं, सुनवाई के दौरान मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब एसडीएम कार्यालय की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में वही आधार कार्ड मिला, जिसे पिछली सुनवाई में आरोपी के माता-पिता ने फर्जी बताते हुए पहचानने से इनकार कर दिया था। यह आधार कार्ड आरोपी के माता-पिता ने ही एसडीएम कार्यालय में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया के दौरान जमा कराया था।

आधार कार्ड को लेकर अंतर सामने आया

बताया गया कि सुनवाई के दौरान एसडीएम द्वारका के प्रतिनिधि के तौर पर तहसीलदार बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने आरोपी के माता-पिता की ओर से एसडीएम कार्यालय में जमा कराए गए दस्तावेज बोर्ड के सामने पेश किए। दस्तावेजों की जांच के दौरान आधार कार्ड को लेकर महत्वपूर्ण अंतर सामने आया।

पिछली सुनवाई में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता सुमित चौहान ने स्कूल रिकार्ड में मौजूद आधार कार्ड की प्रति बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की थी। इसमें आरोपी का जन्म वर्ष 2007 दर्ज था।

उम्र का सवाल अहम

वहीं, शनिवार को एसडीएम कार्यालय की ओर से प्रस्तुत उसी आधार कार्ड की प्रति में जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2011 दर्ज मिली। दोनों प्रतियों में आधार नंबर, घर का पता और तस्वीर समान पाई गई है। जन्मतिथि में इस अंतर के कारण अब आधार कार्ड की वास्तविकता और आरोपी की सही उम्र का सवाल अहम हो गया है।

पिछली सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने जब माता-पिता के सामने यही आधार कार्ड रखा था, तो उन्होंने उसमें लगी तस्वीर को अपने बेटे की तस्वीर मानने से भी इनकार कर दिया था।

उन्होंने बोर्ड के समक्ष कहा था कि आधार कार्ड फर्जी है और इसमें लगी तस्वीर उनके बेटे की नहीं है। इसी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वर्ष 2012 का करीब 14 वर्ष पुराना वीडियो भी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया था।

नाचता हुआ दिखाई दिया

वीडियो में आरोपी एक शादी समारोह में नाचता हुआ दिखाई दे रहा है। अभियोजन पक्ष ने इस वीडियो को आरोपी की उम्र से जुड़े साक्ष्य के तौर पर पेश किया था। वीडियो को लेकर भी आरोपी के माता-पिता से विस्तृत जिरह की गई थी।

सुनवाई के दौरान तहसीलदार ने बोर्ड को बताया कि क्षेत्र के पुनर्गठन के बाद संबंधित इलाका अब राजौरी गार्डन एसडीएम के क्षेत्राधिकार में आ गया है। इसके कारण पुराने दस्तावेज अलग-अलग कार्यालयों में चले गए हैं। इन्हें एकत्र कर व्यवस्थित किया जा रहा है। दस्तावेज जुटने के बाद ही दोनों आधार कार्ड की सत्यता और उनमें दर्ज विवरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत दोनों आधार कार्ड, उनमें दर्ज जन्मतिथि, स्कूल रिकार्ड और वर्ष 2012 के वीडियो समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की वास्तविक उम्र का निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद ही तय होगा कि आरोपी के मामले की सुनवाई किशोर न्याय कानून के तहत जारी रहेगी या उसके साथ बालिग के तौर पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

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