जेलों में बदलेगी अंग्रेजों के जमाने की मुलाकाती व्यवस्था, एक साथ 100 कैदी कर सकेंगे इंटरनेट से अपनों से बात
दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैदियों व परिजनों की मुलाकात की अंग्रेजों के जमाने की व्यवस्था अब इंटरनेट आधारित प्रणाली ...और पढ़ें

मुलाकाती जंगले में लगी तार वाली दूरभाष व्यवस्था को बदलकर इंटरनेट आधारित व्यवस्था स्थापित की जाएगी। एआई इमेज
HighLights
तिहाड़ जेल में कैदियों की मुलाकात की पुरानी व्यवस्था आधुनिक होगी।
नई इंटरनेट आधारित प्रणाली से 100 कैदी एक साथ बात कर सकेंगे।
भविष्य में कैदी और परिजन वीडियो कॉल पर एक-दूसरे को देख पाएंगे।
वीके शुक्ला, नई दिल्ली। जेलों में कैदियों और उनके परिजनों के बीच होने वाली मुलाकात की अंग्रेजों के जमाने की व्यवस्था अब बदलने की तैयारी है। आजादी से पहले चली आ रही मुलाकात जंगले की पारंपरिक व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी शुरुआत दिल्ली की सबसे बड़ी केंद्रीय जेल तिहाड़ से होगी। यहां मुलाकाती जंगले में लगी तार वाली दूरभाष व्यवस्था को बदलकर इंटरनेट आधारित व्यवस्था स्थापित की जाएगी।
एक बार में करीब 100 कैदी कर सकेंगे बात
नई व्यवस्था में बातचीत का समय पहले से निर्धारित किया जा सकेगा। तय समय पूरा होते ही दूरभाष अपने आप बंद हो जाएगा। इससे बातचीत की अवधि नियंत्रित करने के साथ ही जेल प्रशासन के लिए निगरानी रखना भी आसान होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में एक बार में करीब 100 कैदी अपने परिजनों से बातचीत कर सकेंगे।
आगे चलकर एक-दूसरे को देख भी सकेंगे
नई व्यवस्था को भविष्य में दृश्य बातचीत की सुविधा से जोड़ने की भी योजना है। इसके तहत कैदी और उनके परिजन बातचीत के दौरान एक-दूसरे का चेहरा स्क्रीन पर देख सकेंगे। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के तहत दोनों के बीच शीशे की दीवार और जाली बनी रहेगी। इस सुविधा को लागू करने से पहले तकनीकी विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों से राय ली जा रही है। सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद ही इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
हर दिन 2500 कैदी करते हैं मुलाकात
दिल्ली में तिहाड़, रोहिणी और मंडोली तीन जेल परिसर हैं। इनमें 16 केंद्रीय जेल हैं। तिहाड़ जेल परिसर में नौ, रोहिणी में एक और मंडोली जेल परिसर में छह केंद्रीय जेल हैं। इन जेलों में कुल 19,996 कैदी बंद हैं। सभी जेलों को मिलाकर प्रतिदिन औसतन 2,000 से 2,500 कैदियों की मुलाकात उनके परिजनों या वकीलों से कराई जाती है।
अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही व्यवस्था
अकेले तिहाड़ जेल परिसर में रोजाना लगभग 1,200 से 1,500 कैदियों के परिजन /वकील मुलाकात के लिए पहुंचते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार, एक कैदी को प्रति सप्ताह अधिकतम दो मुलाकातें की अनुमति है। तिहाड़ जेल की स्थापना 1957 में की गई थी, मगर देश के जेलों में टेलीफोन वाली मुलाकाती जंगले वाली व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है।
