CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका को क्यों भेजा गया तिहाड़ जेल? दिल्ली पुलिस ने बताई वजह
एसआईआर के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

मंगलवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचे सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वीडियो ग्रैब (एएनआई)
HighLights
CJP नेता सौरव दास, आशुतोष रांका जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार।
पिछली जमानत शर्तों का उल्लंघन करने पर तिहाड़ जेल भेजा गया।
अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर जमानत, शांति बनाए रखने की शर्त।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एसआईआर के विरोध में विपक्षी दलों व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर सहित नई दिल्ली जिले में सुरक्षा के बेहद कड़े बंदोबस्त किए हैं।
सख्त नाकेबंदी के बावजूद मंगलवार सुबह सीजेपी के सह संयोजक सौरव दास, आशुतोष रांका व अजिंक्य शिंदे के प्रतिबंधित क्षेत्र जंतर-मंतर पर घुसने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने तीनों के खिलाफ बीएनएस की कई धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।
तिहाड़ जेल भेज दिया
तीनों को बुधवार सुबह 10:30 बजे संसद मार्ग स्थित एसीएम कोर्ट के समक्ष पेश किया गया, जहां पर पिछली जमानत की शर्त का उल्लंघन करने पर कोर्ट ने सौरव व आशुतोष को पांच दिनों के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
कानून के प्रविधान में बेल बांड की शर्त का उल्लंघन करने पर अदालत द्वारा जेल की सजा सुनाने पर इसमें तुरंत राहत के लिए किसी भी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती है। आरोपियों को सजा काटनी ही पड़ती है।
बांड भरवाकर जमानत पर छोड़ा
उधर, अजिंक्य शिंदे पर पहली बार मुकदमा दर्ज होने व गिरफ्तार किए जाने पर कोर्ट ने उसे पांच हजार के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार बनाए रखने का बांड भरवाकर जमानत पर छोड़ दिया गया।
नारेबाजी करते ही हिरासत में लिया
पुलिस के अनुसार, तीनों के साथ संगठन के 11 सदस्य भी जंतर-मंतर पर घुस आए थे, पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में लिया था। मंगलवार सुबह सीजेपी के ये तीन नेता समेत 11 अन्य सदस्य भी लोहे के गेट पर चढ़कर जंतर-मंतर पर आ गए थे, जिन्हें पुलिस ने नारेबाजी करते ही हिरासत में ले लिया था।
बताया गया कि हिरासत में लिए गए सभी 14 लोगों को यहां से 40 किलोमीटर दूर जाफरपुर कलां थाने में रखा गया। वहां से बुधवार तड़के तीन बजे 11 समर्थकों को तो छोड़ दिया गया लेकिन सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ, संसद मार्ग थाने में बीएनएस की आठ धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था।
सीजेपी के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई
डीसीपी सचिन शर्मा का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को रोकने और बिना इजाजत घुसने के लिए सीजेपी के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की गई। सभी 14 सदस्य एक प्राइवेट जगह से होते हुए जंतर-मंतर पहंचे, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह के तौर पर मान्यता नहीं दी गई है।
बताया कि वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तब प्रदर्शनकारियों ने उन्हें सरकारी ड्यूटी करने से रोका। जन-शांति भंग करने और कानून तोड़ने की बार-बार की गई कोशिशों को देखते हुए, आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को कानून के संबंधित एहतियाती प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया।
वहीं, सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को ऐसी ही गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने की उनकी कोशिशों पर भी ध्यान दिया गया।
इस मामले पर विचार करने के बाद कोर्ट ने कलंदरा की जानकारी और कानून के बार-बार उल्लंघन को देखते हुए गंभीर आशंका के आधार पर कि सौरव व आशुतोष को जेल भेज दिया। कोर्ट ने माना कि ज़मानत पर रिहा होने पर वे फिर से कानून तोड़ेंगे।
इन धाराओं में दर्ज किया गया केस
सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, सरकारी आदेश का उल्लंघन, प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने, मारपीट, आपराधिक साजिश रचने, सरकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट व शांति भंग करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इन सभी धाराओं में अधिकतम पांच साल तक सजा का प्रविधान है।
