Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कड़ाके की ठंड से भी कम न हुई किताबों की दीवानगी, विश्व पुस्तक मेले में उमड़े युवाओं को भाया 'सेना का कोना'

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 09:48 PM (IST)

    कड़ाके की ठंड के बावजूद विश्व पुस्तक मेले का पहला दिन दिल्ली-एनसीआर के पुस्तक प्रेमियों से गुलजार रहा। भारत मंडपम में प्रवेश के लिए लंबी कतारें देखी ग ...और पढ़ें

    नई दिल्ली भारत मंडपम में शुरु हुए विश्व पुस्तक मेले के थीम पवेलियन में रखे गए टैंक का अवलोकन करते व साथ में फोटो खिंचवाते बच्चें। ध्रुव कुमार

    नई दिल्ली भारत मंडपम में शुरु हुए विश्व पुस्तक मेले के थीम पवेलियन में रखे गए टैंक का अवलोकन करते व साथ में फोटो खिंचवाते बच्चें। ध्रुव कुमार

    HighLights

    1. कड़ाके की ठंड के बावजूद विश्व पुस्तक मेले में भारी भीड़ उमड़ी।

    2. सैन्य इतिहास पवेलियन में अर्जुन टैंक, तेजस मॉडल आकर्षण का केंद्र।

    3. लेखिका वंदना यादव की पुस्तक 'सैनिक पत्नियों की कथा और व्यथा' लांच।

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। शनिवार को इस सीजन की सबसे ठंडी सुबह रही, दिन में भी कड़ाके की ठंड महसूस हुई। इसके बावजूद विश्व पुस्तक मेले के पहले ही दिन दिल्ली समेत एनसीआर वासियों का पुस्तक प्रेम ठंड पर भारी पड़ गया। आलम यह रहा कि भारत मंडपम में प्रवेश के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी गईं तो अंदर भी कमोबेश हर हाल में खासी रौनक देखने को मिली।

    सैन्यकर्मियों के साथ ले रहे सेल्फी

    पुस्तक मेले का थीम पवेलियन भी राष्ट्रभक्ति के रंग में डूबा रहा है। 'भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं विवेक' थीम पर आधारित प्रदर्शनी में भारतीय सेना के गौरवशाली अतीत और आधुनिक शक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। प्रदर्शनी में जहां एक ओर प्राचीन भारतीय युद्धकला की झलकियां हैं।

    वहीं, दूसरी ओर 'आत्मनिर्भर भारत' की पहचान बन चुके अर्जुन टैंक, लड़ाकू विमान तेजस और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, कारगिल युद्ध और भारतीय सेना की जीत के लगे माॅडल युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। युवा इन माॅडलों और वहां खड़े सैन्यकर्मियों के साथ भी खूब सेल्फी ले रहे हैं।

    बौद्धिक विवेक को साझा करने का सशक्त माध्यम

    थीम पवेलियन में 1947 से लेकर 1971 तक के युद्धों के नायक और परमवीर चक्र विजेताओं की वीरगाथाएं भी प्रदर्शित की गई हैं। कैप्टन विक्रम बत्रा, राइफलमैन संजय कुमार और लेफ्टिनेंट योगेंद्र सिंह जैसे जांबाजों के चित्रों और उनके अदम्य साहस के वृत्तांत को पढ़कर दर्शक भावुक और गौरवान्वित नजर आए। इसके साथ ही वर्ष 1923 में के. तेजेंद्र द्वारा निर्मित वंदे मातरम के ऐतिहासिक चित्र ने भी लोगों का ध्यान खींचा। यह प्रदर्शनी भारतीय सेना के त्याग और बौद्धिक विवेक को साझा करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।

    खबरें और भी

    pustak-mela1

    नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में शुरू हुए विश्व पुस्तक मेले में पुस्तकों का अवलोकन करते लोग। ध्रुव कुमार

    100 से अधिक थीम की है तैयारी

    थीम पवेलियन 1,000 वर्ग मीटर में फैला एक 360-डिग्री इमर्सिव एक्सपीरियंस प्रस्तुत करता है, जिसमें 500 से अधिक पुस्तकें, सुसज्जित प्रदर्शनियाँ, वृत्तचित्र और इंस्टालेशन शामिल हैं। इनमें 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि तथा बडगांव1947 से लेकर आपरेशन सिंदूर तक प्रमुख सैन्य अभियानों पर सत्र शामिल हैं। यहां 100 से अधिक थीम-आधारित कार्यक्रमों भी होने हैं।

    'सैनिक पत्नियों की कथा और व्यथा' का विमोचन

    हाल संख्या दो के लेखक मंच पर लेखिका वंदना यादव की प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'सैनिक पत्नियों की कथा और व्यथा' का लोकार्पण हुआ। इस मौके पर प्रभात प्रकाशन के निदेशक पवन अग्रवाल ने कहा कि 'यह पुस्तक सैनिक पत्नियों के जीवन की सच्ची कहानियों को उजागर करती है, जो हर भारतीय को गर्व से भर देगी।'

    वहीं, लेखिका ने कहा, 'सैनिक अमीर तबके से नहीं आते। उनके पास बिजनेस घराने या बेहिसाब रुपया नहीं होता। सैनिक बनना मिडिल क्लास का फैसला है, जहां देशभक्ति सर्वोपरि होता है। यह किताब सैनिक परिवारों की त्यागमयी जिंदगी को नई रोशनी देगी।'

    यह भी पढ़ें- विश्व पुस्तक मेला 2026 का शानदार आगाज, धर्मेंद्र प्रधान ने किया उद्घाटन; 20 लाख से अधिक पाठक करेंगे भागीदारी