Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कागज की गुड़िया से ग्लोबल आइकन बनने तक, क्या आप जानते हैं बार्बी डॉल के सफर की दिलचस्प कहानी

    Updated: Tue, 10 Feb 2026 01:12 PM (IST)

    बार्बी डॉल को 1959 में रूथ हैंडलर ने अपनी बेटी से प्रेरित होकर लॉन्च किया था। यह सिर्फ एक खिलौना नहीं बल्कि प्रेरणा और आधुनिक तकनीक का संगम है। जर्मन ...और पढ़ें

    कैसे बनी थी दुनिया की सबसे पहली बार्बी डॉल? (Picture Courtesy: Instagram)

    कैसे बनी थी दुनिया की सबसे पहली बार्बी डॉल? (Picture Courtesy: Instagram)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दुनियाभर की करोड़ों लड़कियों के बचपन का हिस्सा रही बार्बी डॉल महज एक खिलौना नहीं, बल्कि प्रेरणा और आधुनिक तकनीक का एक अनोखा संगम है। लेकिन क्या आप जानते हैं बार्बी डॉल को बनाने का आइडिया कहां से आया था? 

    दरअसल, एक मां को अपनी बेटी को कागज की गुड़ियों से खेलता देख बार्बी बनाने का विचार आया था। इसके बाद 13 फरवरी 1959 को ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड होने के बाद से आज तक बार्बी का सफर रोमांचक किस्सों से भरा रहा है। आइए जानें बार्बी डॉल की कहानी। 

    बेटी के खेल से मिली प्रेरणा 

    बार्बी की रचनाकार रूथ हैंडलर थीं, जिन्होंने अपने पति इलियट के साथ मिलकर मैटल कंपनी की शुरुआत की थी। 1956 में जब रूथ अपनी बेटी बारबरा के साथ स्विट्जरलैंड घूम रही थीं, तब उनकी नजर एक जर्मन डॉल बिल्ड लिली पर पड़ी। उस समय की ज्यादातर गुड़ियां बच्चों जैसी दिखती थीं, लेकिन रूथ चाहती थीं कि लड़कियों के पास एक ऐसी डॉल हो जो करियर और फैशन की कल्पना कर सके। उन्होंने बिल्ड लिली से प्रेरणा लेकर बार्बी तैयार की और इसे 9 मार्च 1959 को न्यूयॉर्क के टॉय फेयर में लॉन्च किया। लॉन्च होते ही इसकी 3 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिक गईं।

    Barbie doll (1)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    मिसाइल इंजीनियर ने दी बार्बी को लचक

    बार्बी को अलग-अलग पोज देने के काबिल बनाने के पीछे एक मिसाइल इंजीनियर का दिमाग था। येल यूनिवर्सिटी से पढ़े जैक रायन, जो पहले पेंटागन के लिए मिसाइलें डिजाइन करते थे, उन्होंने अपनी एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बार्बी की बॉडी को फ्लेक्सिबल बनाने में किया। इसी तकनीक की वजह से 11 इंच लंबी यह डॉल अलग-अलग पोजिशन में खड़ी हो सकती थी, जैसे अपने हाथों को कमर पर रखकर खड़े होना

    खबरें और भी

    Barbie doll (4)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    नील आर्मस्ट्रांग से पहले चांद का सपना

    बार्बी ने हमेशा लड़कियों को बड़े सपने देखना सिखाया। नील आर्मस्ट्रांग के चंद्रमा पर कदम रखने से चार साल पहले, यानी 1965 में ही मैटल ने एस्ट्रोनॉट बार्बी लॉन्च कर दी थी। नासा के सहयोग से बनी इस डॉल का मकसद लड़कियों को यह बताना था कि वे अंतरिक्ष यात्री भी बन सकती हैं। बार्बी का यह अंतरिक्ष सफर सिर्फ कल्पना तक सीमित नहीं रहा; साल 2022 में नासा के 'आर्टेमिस-1' मिशन के तहत बार्बी डॉल को असलियत में अंतरिक्ष में भेजा गया।

    Barbie doll (5)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    करोड़ों की कीमत और विवादों का साया

    बार्बी सिर्फ बच्चों का खेल नहीं बल्कि कलेक्टर्स के लिए इंवेस्टमेंट भी है। दुनिया की सबसे महंगी बार्बी की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये थी। ऑस्ट्रेलियाई जूलरी डिजाइनर स्टेफानो केंटुरी की बनाई गई इस डॉल के गले में 1 कैरेट का दुर्लभ गुलाबी हीरा लगा था। इसे एक नीलामी में बेचकर पूरी राशि कैंसर रिसर्च को दान कर दी गई थी।

    Barbie doll (2)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    हालांकि, तकनीक के साथ बार्बी विवादों में भी रही। 2015 में हेलो बार्बी नाम की एक हाई-टेक डॉल लॉन्च हुई, जिसमें वाई-फाई और माइक्रोफोन था। कई एक्सपर्ट्स ने इसे जासूसी का औजार करार दिया, क्योंकि यह बच्चों की बातें रिकॉर्ड कर सर्वर पर भेजती थी, जिससे प्राइवेसी को लेकर सवाल खड़े हो गए थे।