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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 03, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    लोगों के लिए मुसीबत बने यमुनापार में बढ़ते मलबा स्पॉट, शाहदरा दक्षिणी जोन के उपायुक्त अंशुल सिरोही से सवाल-जवाब

    Updated: Fri, 03 Jan 2025 10:42 PM (IST)

    कड़कड़ी मोड़ हसनपुर डिपो के नजदीक वाली जगह एनएच-नौ की सर्विस रोड अजीत नगर मोड़ जैसे इलाके तो मलबा स्पॉट ही बन चुके हैं। महीने में 20 से अधिक दिन यहां ...और पढ़ें

    लोगों के लिए मुसीबत बने यमुनापार में बढ़ते मलबा स्पॉट।
    लोगों के लिए मुसीबत बने यमुनापार में बढ़ते मलबा स्पॉट।

    HighLights

    1. कड़कड़ी मोड और हसनपुर डिपो के पास नहीं बदलते हैं हालात
    2. मलबे के ढेर की वजह से पैदल चलने वाले और वाहन चालकों को बड़ी परेशानी

    जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। यमुनापार में दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे मलबा स्पॉट लोगों के लिए मुसीबत बनने लगे हैं। मलबे के ढेर की वजह से पैदल चलने वाले और वाहन चालकों को बड़ी परेशानी होती है। आवागमन में रुकावट पैदा होती है और इससे उड़ने वाली धूल से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

    बता दें कि कड़कड़ी मोड़, हसनपुर डिपो के नजदीक वाली जगह, एनएच-नौ की सर्विस रोड, अजीत नगर मोड़ जैसे इलाके तो मलबा स्पॉट ही बन चुके हैं। महीने में 20 से अधिक दिन यहां मलबे के ढेर ही नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि यदि निगम सख्ती से काम करे तो समस्या ही न हो। इससे हमलोगों की जिंदगी दूभर हो गई है।

    वाहन चालकों के फिसलकर चोटिल होने का खतरा

    कड़कड़ी मोड़ पर ही कूड़ा व मलबा के काफी दूर तक ढेर होने से दुर्गंध आती है और धूल उड़ती है। वहीं हसनपुर डिपो के नजदीक मलबा पड़ा होने से वाहन चालकों को उसपर फिसलकर चोटिल होने का खतरा रहता है। आइपी एक्सटेंशन निवासी अमोल कामत ने बताया कि मलबे के ढेर आधी सड़क तक फैल जाते हैं। इनसे यातायात प्रभावित होता है और हादसों की आशंका बढ़ जाती है। अधिकारियों से शिकायत करते हैं तो वे केवल टाल-मटोली करते हैं।

    नगर निगम शाहदरा दक्षिणी जोन के उपायुक्त अंशुल सिरोही से सवाल-जवाब

    प्र. कड़कड़ी मोड़ और हसनपुर डिपो के पास महीने के अधिकतर दिन मलबा ही नजर आता है। इसके निस्तारण के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं?

    उ. निगम का पूरा प्रयास रहता है कि किसी भी इलाके में मलबे के ढेर न लगे। समय-समय पर मलबा उठाकर शास्त्री पार्क स्थित सी एंड डी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में डाला जाता है और वहां उसका निस्तारण किया जाता है। इस वर्ष हमने लगभग दो लाख टन रिकार्ड मलबा उठाया है।

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    प्र. निगम जब मलबा उठाता है तो स्थिति में बदलाव क्यों नहीं नजर आता है। इसके पीछे क्या कारण है?

    उ. निगम के पास मलबे वाली जगहों पर तैनात करने के लिए कोई सुरक्षागार्ड हैं नहीं। हम दिनभर मलबा उठवाते हैं लेकिन रात के अंधेरे में लोग मलबा फेंक जाते हैं। इसके लिए क्षेत्रवासियों को भी निगम का सहयोग करना होगा ताकि कहीं भी मलबा इकट्ठा न हो सके।

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