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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    वो नेता जिसे सिक्के से तौलते थे कार्यकर्ता, अटलजी भी उनके घर पर ठहरते; पहली बार खिलाया था कमल

    Updated: Mon, 08 Apr 2024 08:32 PM (IST)

    ठाकुर बलदेव सिंह की गिनती जम्मू-कश्मीर के दिग्गज नेताओं में होती थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इनके घर पर ठहरते थे। बलदेव सिंह जम्मू-कश ...और पढ़ें

    Lok Sabha Election 2024: जम्मू कश्मीर में भाजपा के पहले अध्यक्ष थे बलदेव सिंह। (फाइल फोटो)
    Lok Sabha Election 2024: जम्मू कश्मीर में भाजपा के पहले अध्यक्ष थे बलदेव सिंह। (फाइल फोटो)

    जेएनएन, जागरण। कठुआ जिले के कई नेता ऊधमपुर-कठुआ सीट से ही नहीं, बल्कि जम्मू सीट से भी चुनकर संसद में पहुंच चुके हैं। इनमें एक शख्सियत ठाकुर बलदेव सिंह भी हैं। वर्ष 1977 के चुनाव में वह जनसंघ के सहयोग से निर्दलीय चुने गए थे। वह 1980 और 1987 में हीरानगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पहले विधायक भी चुने गए। जम्मू-कश्मीर में भाजपा के पहला प्रदेश अध्यक्ष बनने का श्रेय भी उन्हीं को है।

    लाहौर से हासिल की कानून की शिक्षा

    कठुआ जिले के हीरानगर तहसील के सनूरा गांव के निवासी बलदेव सिंह का जन्म पुणे में 30 मई 1918 को हुआ था। उनके पिता सेना में अधिकारी थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जम्मू के राजपूत स्कूल में हुई। स्नातक प्रिंस ऑफ वेल्स कॉलेज जम्मू में करने के बाद लाहौर यूनिवर्सिटी में 1942 में कानून की पढ़ाई की।

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    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का किया था स्वागत

    वह वर्ष 1948 से 1952 तक महाराजा हरि सिंह के सलाहकार भी रह चुके थे। उनका निधन 25 अगस्त 2008 को हुआ। अटल के करीबी प्रजा परिषद के साथ जुड़कर तब उन्होंने जम्मू-कश्मीर में एक विधान, एक निशान का नारा बुलंद करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का लखनपुर में स्वागत किया था।

    नौ साल तक रहे प्रदेश अध्यक्ष

    प्रचार में अक्सर उन्हें कार्यकर्ता सिक्कों से तौला करते थे। गुलाम जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों की स्थायी नागरिकता का पहली बार उन्होंने ही संसद में मुद्दा उठाया था। 1980 में भाजपा के गठन पर वह जम्मू-कश्मीर के पहले प्रदेश अध्यक्ष बने और नौ साल तक इस पद पर रहे। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के वह काफी नजदीक थे। कठुआ में बाजपेयी अक्सर उनके घर ठहरा करते थे।

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