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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 05, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    AI से मतदाताओं को प्रभावित करने की आशंका, अमेरिका समेत इन देशों में हो चुका दुरुपयोग, जानिए कैसे बन सकता खतरा

    Updated: Fri, 05 Apr 2024 02:19 PM (GMT+05:30)

    Lok Sabha Election 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का गलत इस्तेमाल हो सकता है। निर्वाचन आयोग को आशंका है कि मतदाताओं को प्रभाव ...और पढ़ें

    Lok Sabha Chunav 2024: एआई से मतदाताओं को प्रभावित करने वालों पर पुलिस की नजर। (प्रतीकात्मक फोटो)
    Lok Sabha Chunav 2024: एआई से मतदाताओं को प्रभावित करने वालों पर पुलिस की नजर। (प्रतीकात्मक फोटो)

    राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। चुनावी मौसम में राजनीतिक दलों की ओर से मतदाताओं को लुभाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जनित डीपफेक वीडियो और वॉयस क्लोनिंग के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन (आईएफएसओ) को 24 घंटे सतर्क रहने का निर्देश दिया है।

    इंटरनेट पर निगरानी की बड़ी जिम्मेदारी

    साइबर अपराधों पर राज्यों के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट आईएफएसओ को नोडल एजेंसी बनाया था। ऐसे में इस चुनाव में इन पर इंटरनेट मीडिया पर नजर रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि एआई जनित गलत सूचना का प्रसार चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थानों में जनता के विश्वास को कम करता है।

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    राजनीतिक पार्टियों को इस तरह का हथकंडा अपनाने से बचना चाहिए। साइबर विशेषज्ञ का कहना है कि सरकार को एआई तकनीक के मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष दिशा-निर्देश विकसित करने के लिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, तकनीकी कंपनियों और नागरिक समाज संगठनों सहित हितधारकों के साथ जुड़ना चाहिए।

    जानकारी मिलते ही हटाई जाएगी आपत्तिजनक सामग्री

    केंद्र ने आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री को हटाने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आइ4सी) को नोडल एजेंसी बनाया है। जैसे ही किसी राज्य की पुलिस दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन सामग्री के बारे में आइ4सी को सूचित करेगी, वे सामग्री को हटाने के लिए इंटरनेट मीडिया कंपनियों से संपर्क करेंगे।

    खबरें और भी

    • इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन को 24 घंटे सतर्क रहने का निर्देश, इंटरनेट मीडिया से होने वाले खतरों को रोकेंगे
    • निर्वाचन आयोग को आशंका- मतदाताओं को प्रभावित करने में डीपफेक वीडियो व वायस क्लोनिंग का हो सकता है उपयोग

    सिंथेटिक वीडियो-ऑडियो की पहचान करना बड़ी चुनौती

    राज्यों की पुलिस समेत सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसी सामग्री का पता लगाकर हटाने के लिए इंटरनेट मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर काम करना होगा। एआई-जनित सामग्री या सिंथेटिक वीडियो, आडियो की तुरंत पहचान करना बड़ी चुनौती है। कई देशों की भारतीय चुनावों में रुचि रहती है, जो माहौल बिगाड़ सकते हैं।

    इन देशों में हो चुका दुरुपयोग

    • जनवरी 2024 में अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के न्यू हैम्पशायर प्राइमरी में राष्ट्रपति जो बाइडन की आवाज की नकल करने वाले एक रोबोकाल ने मतदाताओं को चुनाव में भाग न लेने की सलाह दी थी l
    • फरवरी 2023 में नाइजीरिया में चुनाव के दौरान मतपत्रों में हेरफेर करने की योजना के साथ एक फर्जी ऑडियो क्लिप बनाई गई थी। इसके जरिये राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को फंसाया गया था l
    • बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनाव से पहले इंटरनेट मीडिया पर विपक्षी राजनेताओं रुमिन फरहाना और निपुण राय का स्विमिंग पूल में आपत्तिजनक डीपफेक वीडियो सामने आया था।

    एआई जनित सामग्री का पता लगाना मुश्किल

    साइबर अपराध इकाई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीपफेक वीडियो और वायस क्लोनिंग का पता लगाने के लिए कोई तकनीक नहीं है। जब तक इस पर ध्यान जाता है, तब तक नुकसान हो चुका होता है, क्योंकि यह इंटरनेट मीडिया पर फैल जाता है। कई देशों में चुनावों के दौरान डीपफेक वीडियो और वायस क्लोनिंग का दुरुपयोग देखा गया है।

    50 से अधिक कर्मचारियों की टीम बनाई गई

    दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ में डीपफेक वीडियो व वायस क्लोनिंग पर नजर रखने के लिए 50 से अधिक तकनीक रूप से दक्ष कर्मियों की टीम बनाई गई है, जो 24 घंटे इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर नजर रख रहे हैं। विगत विस चुनाव के दौरान भाजपा सांसद मनोज तिवारी की वायस क्लोनिंग से दुष्प्रचार करने की कोशिश की गई थी।

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