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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 02, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Mizoram Assembly Polls: नई सरकार से क्या चाहते हैं म्यांमार शरणार्थी? मिजोरम में बढ़ते शरणार्थियों ने बढ़ाई चिंता

    By Siddharth ChaurasiyaEdited By: Siddharth Chaurasiya
    Updated: Thu, 02 Nov 2023 01:27 PM (IST)

    पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में 7 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में नई सरकार से म्यांमार के उन शरणार्थियों को काफी उम्मीदें हैं। जो अपना देश छोड़कर ...और पढ़ें

    म्यांमार में 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से शरणार्थी मिजोरम में प्रवेश करते रहे हैं।
    म्यांमार में 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से शरणार्थी मिजोरम में प्रवेश करते रहे हैं।

    पीटीआई, सिहमुई (मिजोरम)। पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में 7 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में नई सरकार से म्यांमार के उन शरणार्थियों को काफी उम्मीदें हैं। जो अपना देश छोड़कर मिजोरम में शरण ले रहे हैं। उन्हें भावी सरकार से दो वक्त का अच्छा भोजन और बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा की उम्मीदें हैं।

    म्यांमार में 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से शरणार्थी मिजोरम में प्रवेश करते रहे हैं। यहां सिहमुई शिविर में रह रहे लोगों को उम्मीद है कि मिजोरम सरकार राशन और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदान करेगी, जैसा कि वह इस साल सितंबर से पहले कर रही थी।

    सिहमुई शिविर में कुल मिलाकर 130 लोग वर्तमान में अस्थायी बांस की दीवारों और दो टिन के छत वाले हॉल में रह रहे हैं। शरणार्थी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए नौकरी की तलाश कर रहे हैं। वे अपने शिविर में बुनियादी चिकित्सा देखभाल और बेहतर सुविधाएं की भी उम्मीद करते हैं।

    माटुपी शहर के रहने वाले कपथांग ने कहा, "नई मिजोरम सरकार से उम्मीद है कि वे हमें राशन और आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराते रहें। सरकार द्वारा आपूर्ति बंद करने के बाद पिछले दो महीनों से राहत शिविर में जीवन मुश्किल हो गया है।"

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    उन्होंने कहा, "राज्य सरकार ने शिविर में रहने वाले लोगों को भोजन, राशन, पानी और अन्य आवश्यक सामान मुहैया कराया, लेकिन सितंबर से ये सब बंद कर दिया गया। हमें नहीं पता क्यों, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि चूंकि राज्य में जातीय हिंसा के बाद मणिपुर से भी शरणार्थी मिजोरम आ गए थे, इसलिए यहां की सरकार पर अत्यधिक बोझ है और उसने मदद के लिए हाथ बढ़ाना बंद कर दिया है। लेकिन कभी-कभी, कुछ गैर सरकारी संगठन हमें राशन भेजते हैं।"

    म्यांमार से आए 31,000 से अधिक लोग मिजोरम में रह रहे हैं, और राज्य सरकार ने उन्हें सभी राहत सामग्री प्रदान की है। ये विदेशी म्यांमार में 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से पड़ोसी देश में आ गए हैं। मिजोरम म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर लंबी छिद्रपूर्ण सीमा साझा करता है।

    राज्य के गृह मंत्री लालचमलियाना ने पहले विधानसभा को सूचित किया था कि सरकार ने म्यांमार के नागरिकों के लिए राहत उपायों के तहत 3.8 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए हैं। इस साल मई में पड़ोसी राज्य मणिपुर में जातीय हिंसा छिड़ने के बाद 12,000 से अधिक कुकी लोगों ने अपना घर-बार छोड़कर इस राज्य में शरण ली और उन्हें मिजोरम सरकार से समर्थन मिल रहा है। उनमें से कुछ बाद में लौट आये।

    54 वर्षीय म्यांमार निवासी पेंगा को उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद नई मिजोरम सरकार उनकी जीवन स्थितियों पर कुछ ध्यान देगी। उन्होंने कहा, "यदि संभव हो तो मैं नई सरकार के सत्ता में आने के बाद पशुधन और सब्जियों की खेती के लिए कुछ जमीन की उम्मीद करता हूं। इससे मेरे परिवार को अपने दम पर गुजारा करने में मदद मिलेगी।"

    बता दें कि 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा के लिए मतदान 7 नवंबर को होगा और वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होगी।