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    ममता-स्टालिन की हार विपक्षी गठबंधन के लिए बड़ा झटका, भाजपा विरोधी गठबंधन के लिए आगे की राह हुई चुनौतीपूर्ण

    Updated: Tue, 05 May 2026 07:24 AM (IST)

    बंगाल और तमिलनाडु, दोनों राज्यों को गंवाने के बाद विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा और मजबूत भाजपा के खिलाफ मिलकर खड़ा होना पड़ेगा। ...और पढ़ें

    ममता-स्टालिन की हार विपक्षी गठबंधन के लिए बड़ा झटका (फोटो- जागरण)

    ममता-स्टालिन की हार विपक्षी गठबंधन के लिए बड़ा झटका (फोटो- जागरण)

    HighLights

    1. भाजपा विरोधी गठबंधन के लिए आगे की राह हुई और भी चुनौतीपूर्ण 

    2. आने वाले चुनावों में जीत की लय बनाए रखने के लिए जोर लगाएगी भाजपा

    पीटीआई, नई दिल्ली। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और एमके स्टालिन के द्रमुक की अपने-अपने गढ़ बंगाल और तमिलनाडु में हार से विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए को बड़ा झटका लगा है।

    आईएनडीआईए की एकजुटता की परीक्षा होगी

    इनकी हार से आईएनडीआईए की एकजुटता की परीक्षा होगी, क्योंकि भाजपा उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी अपनी जीत की लय बरकरार रखने के लिए पूरा जोर लगाएगी। इन चुनाव परिणामों का राष्ट्रीय राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा।

    कुछ ही दिन पहले आईएनडीआईए की सदस्य आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्य भाजपा में शामिल हो गए थे। अब ममता बनर्जी और स्टालिन की हार ने भाजपा विरोधी गठबंधन के लिए आगे की राह को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

    भाजपा के खिलाफ मिलकर खड़ा होना पड़ेगा

    बंगाल और तमिलनाडु, दोनों राज्यों को गंवाने के बाद विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा और मजबूत भाजपा के खिलाफ मिलकर खड़ा होना पड़ेगा।

    विपक्षी नेताओं का मानना है कि उन्हें अपनी रणनीति पर फिर से काम करना होगा और भाजपा के खिलाफ लड़ाई में एकजुट रहना होगा। इन चुनावी झटकों ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने की विपक्षी रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध इस आधार पर किया था कि यह 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को आगे बढ़ाने का प्रयास था।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं से कही ये बात

    कांग्रेस, द्रमुक और सपा ने भी इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया था, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं से इन पार्टियों को सबक सिखाने की अपील की थी।

    सोमवार को आए इन नतीजों का असर 2027 के चुनावों पर भी पड़ने की संभावना है, जब उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड जैसे अहम राज्यों में मतदान होंगे।

    आईएनडीआईए का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस गठबंधन की प्रासंगिकता बनाए रखना और ऐसे मुद्दे तलाशना होगी, जो सभी क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर ला सके।

    विपक्षी गठबंधन का कोई भविष्य नहीं है- पीएम

    दूसरी तरफ, असम, बंगाल और पुडुचेरी में मिली जीत से उत्साहित भाजपा ने कहा कि चुनाव नतीजों ने आईएनडीआईए के भीतर की ''गहरी दरारों'' को उजागर कर दिया है। विपक्षी गठबंधन का कोई भविष्य नहीं है। राहुल गांधी गठबंधन को प्रभावी ढंग से आगे ले जाने में नाकाम रहे हैं और मतगणना के दिन एक बार फिर नदारद हैं।

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