मौत से पहले 388 करोड़ की ब्लॉकबस्टर फिल्म देकर गया 80's का सुपरस्टार, कभी एक्टिंग छोड़ साफ की टॉयलेट
80 के दशक के सुपरस्टार्स की लिस्ट में एक्टर विनोद खन्ना उन स्टार्स की फेहरिस्त में रहे, जिन्होंने अपने दम ...और पढ़ें

मौत से पहले हिट फिल्म देकर गया 70 के दशक का सुपरस्टार

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 80 के दशक में यूं तो कई स्टार थे, लेकिन एक सुपरस्टार ऐसा था, जिसके लुक्स और स्टारडम से बड़े-बड़े लोग भी चौंक उठे थे। इस स्टार ने अपने बलबूते पर वो किया, जिसे सिनेमा में शायद कोई आम स्टार तो नहीं ही करता। इस एक्टर ने एक वक्त एक्टिंग का करियर भी छोड़ दिया था और फिर संन्यास लेकर सबकुछ त्याग दिया, लेकिन फिर कमबैक किया और फिर से फिल्मों में सफल पारी खेली।
कौन था वो हीरो?
दरअसल जिस एक्टर की हम बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना (Vinod Khanna) हैं। विनोद खन्ना ने अपने करियर में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। कुर्बानी से लेकर द बर्निंग ट्रेन और चांदनी जैसी हिट फिल्में देने वाले विनोद खन्ना को बॉलीवुड के सबसे दमदार और हैंडसम एक्टर के रूप में जाना जाता था।
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वह इकलौते ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने सुपरस्टारडम के मामले में अमिताभ बच्चन को कड़ी टक्कर दी थी। 1968 में विनोद खन्ना ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। उनकी पहली फिल्म पहली फिल्म मन का मीत थी, जो साल 1968 में आई। हालांकि यह फिल्म फ्लॉप रही थी। हालांकि फिर 70 के दशक में कई हिट फिल्मों में उन्होंने काम किया।
मौत से पहले ब्लॉकबस्टर मूवी में किया था काम
विनोद खन्ना का निधन साल 2017 में 27 अप्रैल को हुआ था। हालांकि जब उन्होंने अलविदा कहा, उससे दो साल पहले ही उनकी एक फिल्म आई थी और इस फिल्म का नाम था दिलवाले। जी हां, शाह रुख, काजोल और वरुण धवन, कृति सेनन की फिल्म में विनोद खन्ना नजर आए थे।
फिल्म में उन्होंने रणधीर बख्शी का किरदार निभाया था। फिल्म में उन्होंने शाह रुख के पिता का रोल किया था। इस रोल के लिए उन्हें तारीफें भी मिलीं। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 388 करोड़ का कारोबार किया था।
ओशो के लिए छोड़ा था करियर
दरअसल विनोद खन्ना जब अपने करियर में पीक पर थे, तभी उन्होंने संन्यास ले लिया था। साल 1977 में अचानक से उन्होंने एक दिन ये फैसला किया कि वो सिनेमा छोड़ रहे हैं। इससे हर कोई चौंक गया, क्योंकि बीच में ही उनकी फिल्में रुक गईं। हालांकि उन्होंने कहा कि वो वापस आकर सभी फिल्मों की शूटिंग करेंगे।
इसके बाद उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग पूरी की और फिर वह साल 1981 में अमेरिका के के ओरेगन में ओशो के आश्रम रजनीशपुरम में जाकर रहने लगे। यहां जाकर उन्होंने सबकुछ त्याग दिया। वह संन्यासी की वेशभूषा में रहने लगे। बर्तन धोते, खाना बनाते, माली बनकर गार्डन में काम करते, यहां तक कि वो टॉयलेट भी साफ करते थे।
वह आश्रम में करीब 5 सालों तक रहे और फिर उन्होंने साल 1987 में फिल्म इंसाफ कमबैक किया। इसे बाद वो दयावान, क्षत्रिय समेत कई फिल्मों में दिखे। हालांकि अब उनका स्टारडम ढल सा गया था, वो साइड हीरो और सेकेंड लीड में दिखने लगे।
हालांकि इस बीच उनकी फिल्म चांदनी खूब हिट रही। अपनी जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्होंने दबंग और दबंग 2 जैसी शानदार फिल्में दीं तो वहीं दिलवाले में भी वह दिखे।
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