छोटे बजट की फिल्मों की सफलता पर अन्नू कपूर का बड़ा बयान, बोले-'हर हाल में दमदार कंटेंट देना जरूरी'
उत्तर दा पुत्तर से दोबारा स्क्रीन पर छाने के लिए तैयार अन्नू कपूर ने हाल ही में छोटे फिल्ममेकर्स को किस चीज पर ज्यादा वर्क करना चाहिए, इसे लेकर सलाह द ...और पढ़ें

अन्नू कपूर का ने कम बजट की फिल्मों पर दिया बयान/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दीपेश पांडेय, मुबई। कोरोना काल के बाद से ही सिनेमा जगत में यह चर्चा का विषय रहा है कि आखिरकार सिनेमाघरों में किस तरह की फिल्में चलेंगी। एक वर्ग यह भी दावा करता है कि अब सिनेमाघरों में सिर्फ बड़े सितारों या बड़े बजट वाली भव्य विजुअल फिल्में ही चलेंगी।
हिंदी सिनेमा में बीते चार दशकों से भी ज्यादा समय से सक्रिय अभिनेता अन्नू कपूर का मानना है कि इस दौर में छोटे बजट वाले फिल्म निर्माताओं के लिए बेहतर कंटेंट और परफॉमेंस ही सहारा है।
छोटे फिल्मकारों के लिए अच्छा कंटेंट देना जरूरी
अन्नू 24 मार्च को प्रदर्शित हो रही फिल्म उत्तर दा पुत्तर में नजर आएंगे। उनका कहना है, "बड़े स्टार्स की फिल्में अपनी जगह हैं। जब एक छोटे बजट वाली फिल्म, छोटे कलाकारों के साथ आती है तो उसमें अपने सारे अस्त्र-शस्त्र, कंटेंट, विषय वस्तु, सारी चीजों में दम होना चाहिए। गोलियत और डेविड की कहानी सभी ने सुनी होगी कि किस तरह भीमकाय गोलियत को डेविड जैसे छोटे बच्चे ने अपनी बहादुरी और चतुराई से मात दी थी।
इसी तरह जो भी फिल्मकार छोटे बजट की फिल्में बना रहे हैं और उन्हें सिनेमाघरों में प्रदर्शित करना चाहते हैं, उन्हें हर हाल में बेहतरीन कंटेंट, कहानी और परफॉमेंस देना ही पड़ेगा। उसी के मोह में बंधकर जनता उनकी फिल्म देखने सिनेमाघरों में आएगी।"

'मेरे अंदर कोई अंधविश्वास नहीं है'
उत्तर दा पुत्तर में अन्नू अभिनीत पात्र भौतिक विज्ञान का प्रोफेसर होने के साथ वास्तु शास्त्र और ज्योतिष पर बहुत भरोसा करता है। इन चीजों में अपनी व्यक्तिगत रुचि पर अन्नू कहते हैं, "जो लोग अंधविश्वास से जुड़े होते हैं, वो उसको मान चुके होते हैं। आगे वो उसके बारे में जानने की इच्छा नहीं रखते हैं। अब बात करता हूं अन्नू कपूर यानी अपनी। मैं हमेशा से एक छात्र रहा हूं, सीखना और पढ़ना तो हमेशा मेरे काम का हिस्सा रहा है।"
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मैंने अपनी जवानी में थोड़ा हस्त रेखा शास्त्र, थोड़ा ज्योतिष शास्त्र, थोड़ा अंकशास्त्र जैसी चीजों के बारे में अध्ययन किया है। कुछ दिनों तक साधना भी किया है। उसके बाद मेरे दिमाग में इन चीजों को लेकर अलग-अलग विचार आएं। अध्ययन करने के बाद मुझे अहसास हुआ कि इनको मानने से ज्यादा मेरे लिए इनके बारे में जानना महत्वपूर्ण है। मेरे अंदर कोई अंधविश्वास नहीं है। रामचरित मानस में एक चौपाई है कि होइहि सोइ जो राम रचि राखा। मतलब विधि में जो लिखा है, वो होकर रहेगा। मैं इसी सोच में विश्वास करता हूं।"