'क्रिएटिव लोगों के पास पावर...'AR Rehman ने बॉलीवुड में काम न मिलने के लिए किसे ठहराया जिम्मेदार?
ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने खुलासा किया है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बदलते सत्ता समीकरणों ने उनके काम को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। ...और पढ़ें

ए आर रहमान को नहीं मिल रहा काम (फोटो-इंस्टाग्राम)
HighLights
ए आर रहमान ने गाए हैं कई आईकॉनिक गाने
सिंगर ने खुद को बताया आउटसाइडर
इस डायरेक्टर के कहने पर सीखी हिंदी
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। ऑस्कर विनर कंपोजर एआर रहमान ने सालों से भारतीय सिनेमा को कई यादगार गाने दिए हैं और यह सिलसिला अभी भी जारी है। हालांकि, बीबीसी एशियन नेटवर्क के साथ हाल ही में हुई बातचीत में रहमान ने खुलासा किया कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पॉवर डायनेमिक्स में आए बदलाव ने उनके काम पर बहुत बुरा असर डाला है।
सत्ता में आया बहुत बदलाव
रहमान ने हिंदी सिनेमा के साथ अपने संबंधों में आए बदलावों पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने कभी भी प्रोजेक्ट्स के पीछे भागने की कोशिश नहीं की और उनका मानना है कि ईमानदारी से काम मिलना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि शायद पिछले आठ सालों में सत्ता में काफी बदलाव आया है और अब सत्ता उन लोगों के हाथ में है जो क्रिएटिव नहीं हैं। यह सांप्रदायिक मुद्दा भी हो सकता है... लेकिन यह सीधे तौर पर मेरे सामने नहीं है। यह मुझे कानाफूसी के तौर पर सुनने को मिला।
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रहमान ने खुद को बताया आउटसाइडर
रहमान ने बताया कि सुभाष घई की ताल से पहले तक एक तमिल म्यूजिक कंपोजर होने के नाते उन्हें बॉलीवुड में आउटसाइडर जैसा लगता है। उन्होने कहा, रोजा, दिल से और बॉम्बे तक मुझे ऐसा ही लगा लेकिन ताल आते-आते ये घरेलू बन गया। अभी भी कई इंडियन लोगों को ऐसा लगता है कि ये उनके खून में है क्योंकि इसमें थोड़ा पंजाबी, थोड़ा हिंदू और थोड़ा माउंटेन म्यूजिक है। ए आर रहमान ने कहा कि सुभाष घई ने मुझे हिंदी सीखने के लिए कहा। इसके बाद मैंने उर्दू सीखी। इसके बाद उन्होंने अरेबिक सीखी और फिर पंजाबी क्योंकि वो सुखविंदर सिंह से इंफ्लुएंस थे।