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    83 साल पहले आया Asha Bhosle का फर्स्ट सॉन्ग, पेड़ के नीचे की थी रिकॉर्डिंग; ट्रेन और कौए बन गए थे 'विलेन'!

    Updated: Tue, 26 May 2026 02:11 PM (IST)

    आशा भोसले ने 10 साल की उम्र में पेड़ के नीचे, आती-जाती ट्रेनों के बीच अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। आखिर कैसे हुई थी ये रिकॉर्डिंग? ...और पढ़ें

    आशा भोसले ने 10 साल की उम्र में गाया था पहला गाना

    आशा भोसले ने 10 साल की उम्र में गाया था पहला गाना

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दिग्गज गायिका आशा भोसले ने भारतीय सिनेमा में सैकड़ों गानों को अपनी आवाज से तराशा है। आज भी उनके कई गीत यादगार और कल्ट हैं। लेकिन करियर की शुरुआत में और छोटी सी उम्र में आशा भोसले ने अपना पहला गाना पेड़ के नीचे खड़ी होकर रिकॉर्ड किया था।

    पेड़ के नीचे किया था गाना रिकॉर्ड

    शोहरत, अवॉर्ड्स और सदाबहार गानों से दशकों पहले, एक 10 साल की आशा भोसले (Asha BhosleP) अपना पहला गाना रिकॉर्ड कर रही थीं। साल था 1943, और गाना था मराठी फिल्म 'माझा बाला' के लिए 'चला चला नव बाला' (Chala Chala Navbala)। यह कोई भव्य स्टूडियो सेटअप या बहुत ही साफ-सुथरा माहौल नहीं था। यह बिल्कुल कच्चा, अनिश्चित और बेहद मानवीय था। ठीक उस छोटी-सी लड़की की तरह, जो उस दुनिया में कदम रख रही थी।

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    सालों बाद जब उन्होंने उस पल को याद किया, तो उन्हें ठीक-ठीक याद था कि वह अनुभव कितना जबरदस्त था। आशा ताई ने बताया था, 'जब मैंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया, तब मैं 10 साल की थी। मुझे यह गाना माइक के सामने खड़े होकर गाना था, और उस समय मैं कांप रही थी, क्योंकि तब मुझे कुछ भी नहीं पता था। मेरे पिताजी ने अपने गाने रिकॉर्ड किए थे। फिर जब मैंने पहला गाना गाया, तो मुझे लगा कि मैं गा सकती हूं। दीदी ही नहीं, मैं भी गा सकती हूं'।

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    सुबह 4 बजे रिकॉर्ड किया था गाना

    आशा ताई ने आगे बताया था, 'अंधेरी में, मोहन स्टूडियो के अंदर, सेट उतने खाली नहीं होते थे और मुंबई में हर जगह शूटिंग चल रही होती थी। रिकॉर्डिंग का इंतजाम कुछ इस तरह था कि मैं खुले में खड़ी होती थी, और एक पेड़ से माइक लटका होता था। स्टूडियो के अंदर ऑर्केस्ट्रा और संगीतकार अपना साज-ओ-सामान जमाए बैठे होते थे। हमने सुबह 4 बजे तक गाना रिकॉर्ड किया'।

    ट्रेन और कौए की आवाज के बीच कैसे की रिकॉर्डिंग

    सिंगर ने बताया, 'उन रिकॉर्डिंग्स में नेचर की भी एक भूमिका लगती थी। कौए आते थे, कांव-कांव करते थे और रिकॉर्डिंग में रुकावट आ जाती थी। उसके तुरंत बाद, गाड़ियाँ चलने लगती थीं और उससे सेशन में बाधा पड़ती थी। ट्रेन भी चलने लगती थी… जब ट्रेन गुजरती थी, तो हम रुक जाते थे और फिर से पूरी रिकॉर्डिंग प्रक्रिया शुरू करते थे।

    अलग-अलग स्टाइल में गाती थीं आशा

    आशा भोसले की आवाज ने आगे चलकर कई मिजाजों और पीढ़ियों को परिभाषित किया। चाहे वह ‘पिया तू अब तो आजा’ का चंचल आकर्षण हो, ‘जाइये आप कहां जाएंगे’ का शांत रोमांस हो, ‘रंगीला रे’ की जवानी वाली ऊर्जा हो, या ‘शरारा शरारा’ का आधुनिक अंदाज हो, आशा भोसले ने खुद को एक ही तरह की आवाज तक सीमित रखने से साफ इनकार कर दिया।

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    आज भले ही वे हमारे साथ ना हो लेकिन उनकी आवाज में गाए गए गीत हमेशा फैंस के दिलों में यादगार बने रहेंगे।

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