'कामसूत्र' से लेकर 'बैंडिट क्वीन' तक, Satluj से पहले इन फिल्मों को दुनियाभर में मिली तारीफ पर भारत में हुई बैन
दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज (Satluj) ने एक बार फिर इंटरनेशनल लेवल पर सराही जा चुकी फिल्मों के भारत में प्रतिबंध पर एक बहस छेड़ दी है। ...और पढ़ें
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सतलुज से पहले ये फिल्में भी हुईं बैन
HighLights
सतलुज से पहले ये फिल्में भी हुईं बैन
दुनियाभर में इन फिल्मों को मिली तारीफ
कामसूत्र समेत ये कॉन्ट्रोवर्शियल फिल्में शामिल
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दिलजीत दोसांझ स्टारर बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म 'सतलुज' (Satluj) को ओटीटी पर रिलीज किया गया लेकिन दो दिन बाद इसे हटा दिया गया। हालांकि यहां तक पहुंचने के लिए भी फिल्म को 3 साल तक संघर्ष करना पड़ा है। तीन साल पहले फिल्म को सेंसर बोर्ड ने 127 लगाने के लिए कहा था कि जो कि मेकर्स को मंजूर नहीं था। इस वजह से फिल्म थिएटर्स में रिलीज नहीं हो पाई।
थिएटर्स में रिलीज ना होने की वजह से 3 साल बाद इसे ओटीटी पर रिलीज किया गया लेकिन दो दिन बाद ही इसे बिना कोई कारण बताए हटा दिया गया। हालांकि सतलुज पहली ऐसी फिल्म नहीं है जिसके साथ ऐसा हुआ हो इसके पहले कई फिल्मों को लेकर कॉन्ट्रोवर्सी हुई है और उन्हें दुनियाभर में तारीफ मिलने के बावजूद भारत में बैन किया गया है।
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सतलुज (Satluj)
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा पर आधारित इस फिल्म को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण CBFC की ओर से 127 कट लगाने का सुझाव दिया गया था। इसे सिनेमाघरों में रिलीज होने से रोक दिया गया था। पहले इसका नाम पंजाब 95 था बाद में इसे ZEE5 पर 'सतलुज' के नाम से रिलीज किया गया, लेकिन दो दिन बाद ही भारत में इस प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
मेकर्स का कहना था कि सेंसर ने 127 कट्स के बाद भी कई बदलाव करने को कहा था जिनमें खालरा के नाम को बदलने तक को कहा गया था।
बैंडिट क्वीन (Bandit Queen)
फूलन देवी (Phoolan Devi) की जिंदगी पर आधारित फिल्म बैंडिंट क्वीन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। फूलन देवी ने फिल्म की सच्चाई पर सवाल उठाए और अपनी जिंदगी को दिखाए जाने के तरीके पर आपत्ति जताई, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने यह रोक हटा दी, जिससे फिल्म रिलीज हो सकी।
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ब्लैक फ्राइडे (Black Friday)
अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) की फिल्म की रिलीज पर तब रोक लगा दी गई थी जब 1993 के बॉम्बे धमाकों का मुकदमा चल रहा था; अदालतों का मानना था कि फिल्म केस को प्रभावित कर सकती है। आखिरकार, कानूनी रोक हटने के बाद 2007 में यह फिल्म सिनेमाघरों तक पहुंची।
'पांच' (Paanch)
CBFC ने बहुत ज्यादा हिंसा, ड्रग्स के इस्तेमाल और अश्लील भाषा का हवाला देते हुए इसे सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में कुछ कट-छांट के साथ इसे मंजूरी मिल गई, लेकिन यह फिल्म भारत में कभी भी सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो पाई।
आंधी (Aandhi)
गुलजार की इस पॉलिटिकल ड्रामा (Political Drama) फिल्म पर इमरजेंसी के दौरान रोक लगा दी गई थी, क्योंकि माना जाता था कि यह उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलती-जुलती थी। 1977 में जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद यह फिल्म दोबारा सिनेमाघरों में दिखाई गई।
कामसूत्र- एक टेल ऑफ लव (Kamasutra)
मीरा नायर (Mira Nair) की डायरेक्ट की गई इस फिल्म को भारत में बैन कर दिया गया था, क्योंकि CBFC ने इसमें साफ तौर पर दिखाए गए सेक्स और न्यूडिटी (नग्नता) के कारण इसे सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था। हालांकि इसे इंटरनेशनल लेवल पर रिलीज किया गया, लेकिन भारत में इसे कभी भी इसके ओरिजिनल रूप में थिएटर्स में रिलीज नहीं किया गया।