91 साल पहले बना था बॉलीवुड का पहला आइटम सॉन्ग, फिल्मों में कैसे हुई इस ट्रेंड की शुरुआत?
क्या आप जानते हैं बॉलीवुड में आइटम सॉन्ग्स की शुरुआत कब हुई और आखिर कब इन गानों को Item कहा जाने लगा? ...और पढ़ें

बॉलीवुड कब शुरू हुआ आइटम सॉन्ग्स का ट्रेंड?
HighLights
बॉलीवुड कब शुरू हुआ आइटम सॉन्ग्स का ट्रेंड?
किसने दिया था फिल्म में पहला सोलो परफॉर्मेंस?
'आइटम सॉन्ग' टर्म किस गाने से हुआ शुरू?
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'मुन्नी बदनाम', 'शीला की जवानी', 'चिकनी चमेली' से लेकर 'आज की रात' और 'ऊं अंटवा' तक, इन सब गानों को आपने जरूर सुना होगा और पार्टी में इन पर थिरके भी होंगे। ये आइटम सॉन्ग्स पार्टी से लेकर किसी सेलिब्रेशन या शादी में जरूर सुनाई देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इन सोलो परफॉर्मेंस या आइटम सॉन्ग्स की बॉलीवुड में कब शुरुआत हुई थी?
किसी भी फिल्म के बीच में या आखिर में बजने वाले इन गानों का कभी-कभी फिल्म की कहानी से कोई मतलब नहीं होता और कभी-कभी होता भी है। लेकिन जो भी हो कई बार ये गाने फिल्मों के लिए जरूरी और उसके लिए एक हाइलाईट बन जाते हैं। आइए जानते हैं आखिर इन Item Songs की शुरुआत किस फिल्म से हुई? ये टर्म आइटम सॉन्ग्स कहां से आया और किस गाने से इस शब्द का इस्तेमाल होने लगा?
बॉलीवुड की पहली सोलो परफॉर्मेंस
1930 के दशक में अजूरी (एना मैरी गेजेलर) नाम की डांसर को हिंदी सिनेमा में स्टैंडअलोन डांस नंबर (फिल्म की कहानी से अलग सोलो डांस परफॉर्मेंस) की शुरुआत करने वाली माना जाता है। अन्ना मैरी गेजेलर, जिन्हें अजूरी या मैडम अजूरी के नाम से जाना जाता है ने कई भारतीय, पाकिस्तानी और बंगाली फिल्मों में काम किया और उन्हें भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहली आइटम डांसर माना जाता है।
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हालांकि ज्यादा पुरानी फिल्मोग्राफी होने की वजह से उनके डांस सॉन्ग्स का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है लेकिन इतना जरूर है कि उस वक्त वे फिल्मों में अपनी सोलो परफॉर्मेंस देती थीं।
कुकू मोरे और हेलेन ने बढ़ाया दायरा
1940 और 1950 के दशक में कुकू मोरे (Cockoo Moray) बॉलीवुड की पहली बड़ी कैबरे/वैम्प डांसर बनीं। उन्हें हिंदी सिनेमा में डांस नंबर कल्चर की शुरुआत करने वाली कलाकार माना जाता है। 1940 और 1950 के दशक में उनके जबरदस्त डांस मूव्स और लचीलेपन की वजह से उन्हें 'रबर गर्ल' कहा जाता था और वे अपनी परफॉर्मेंस के लिए मोटी फीस लेती थीं। वे कैबरे डांसर हेलेन की मेंटर भी थीं और उन्होंने हेलेन के लिए बॉलीवुड का रास्ता बनाने में मदद की थी।
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कुकू मोरे के पॉपुलर सॉन्ग्स में पतली कमर है (बरसात फिल्म 1949) और हम तुम्हारे हैं जरा (चलती का नाम गाड़ी फिल्म, 1958 थे)
हेलेन ने बनाया ट्रेंड
1958 में हेलेन (Helen) का गाना 'मेरा नाम चिन चिन चू' (हावड़ा ब्रिज) भारत में कैबरे डांस गानों के लिए एक मिसाल बन गया। इसके बाद हेलेन ने 'पिया तू अब तो आजा' (1971) और 'महबूबा महबूबा' (1975) जैसे मशहूर गानों के साथ दशकों तक राज किया।
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कब बना 'आइटम नंबर' शब्द?
हालांकि कई दशकों से फिल्मों में कहानी से अलग डांस वाले गाने मौजूद थे, लेकिन मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री ने 1990 के दशक के आखिर तक 'आइटम नंबर' या 'आइटम गर्ल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया था। पहला ऑफिशियल 'आइटम नंबर' फिल्म 'शूल' (1999) में शिल्पा शेट्टी का गाना 'मैं आई हूं यूपी-बिहार लूटने' बना। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पहला गाना था जब किसी गाने को साफ तौर पर 'आइटम नंबर' कहा गया।
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इन एक्ट्रेसेस ने बनाया बेंचमार्क
इसके बाद से फिल्मों में अलग से डांस नंबर्स का आना जैसे ट्रेंड बन गया। माधुरी दीक्षित का 'एक दो तीन' (1988), बाद में 'छैया छैया' (1998) में मलाइका अरोड़ा की परफॉर्मेंस ने खास तौर पर गेस्ट अपीयरेंस के लिए एक नया बेंचमार्क सेट किया।
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इसके बाद तो बॉलीवुड में आइटम सॉन्ग्स की लाइन लग गई। टॉप की एक्ट्रेसेस ने आइटम सॉन्ग्स को सिर्फ साइड-गिग नहीं, बल्कि अपने करियर के एक बड़े अचीवमेंट के तौर पर अपनाया। कैटरीना कैफ के गाने 'शीला की जवानी' (2010) और 'चिकनी चमेली' (2012) के साथ-साथ करीना कपूर का गाना 'फेविकोल से' (2012) जैसे गानों ने पॉप-कल्चर में जबरदस्त धूम मचाई और चार्ट में टॉप पर जगह बनाई।
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'आइटम' शब्द आया कहां से?
यह शब्द आखिर कहां से आया? इसका जवाब है- मुंबई फिल्म इंडस्ट्री की बोलचाल की भाषा से। दरअसल 'आइटम' शब्द का इस्तेमाल किसी आकर्षक व्यक्ति या फिल्म के किसी खास हिस्से (हाइलाइट रील) के लिए किया जाता था। जब प्रोड्यूसर्स को यह समझ आया कि 4 मिनट का कोई आकर्षक गाना अकेले ही पूरी फिल्म की मार्केटिंग कर सकता है, तो 'आइटम नंबर' शब्द चलन में आ गया।
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अब तो आइटम नंबर या आइटम सॉन्ग ज्यादातर फिल्मों में एक जरूरी हिस्सा बन गया है और ना सिर्फ कोई प्रोफेशनल डांसर बल्कि लीड एक्ट्रेसेस भी अब इन्हें करने से हिचकती नहीं हैं। क्योंकि इससे फिल्म को भी फायदा पहुंचता है और एक्ट्रेसेस को भी लाइमलाइट और पॉपुलैरिटी मिलती है।