एक तवायफ जिसने कर दिया था अंग्रेजों की नाक में दम, एक गाने के लेती थी 3 हजार, दिलचस्प है Gramophone Girl की कहानी
Gauhar Jaan: गौहर जान का जन्म एंजोलिना योवर्ड के रूप में 1873 में कोलकाता में हुआ, वह एक भारतीय सिंगर और डांसर थीं। 'ग्रामोफोन गर्ल' के नाम से मशहूर, ...और पढ़ें
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भारत की पहली सेलेब्रिटी सिंगर की दिलचस्प कहानी

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारत के ऐतिहासिक कल्चर में कई ऐसे किस्से हैं जो दिलचस्प तो हैं ही साथ ही हमें गर्व भी महसूस कराते हैं। एक ऐसा ही किस्सा है भारत की पहली सेलेब्रिटी सिंगर गौहर जान (Gauhar Jaan) का। एक ऐसी शख्सियत जिन्होंने अपना नाम बदला, तवायफ का पेशा अपनाया, बेहतरीन सिंगर बनीं और दुनियाभर में 'ग्रामोफोन गर्ल' (Gramophone Girl) के नाम से जानी गई।
इन सबके अलावा जिस बात ने गौहर खान को खास बनाया वो था उनकी लग्जरी लाइफ और अंग्रेजों के सामने ना झुकने का एटिट्यूड।
अंग्रेजों की तोड़ी थी अकड़
भारत में अंग्रेजों के शासन के वक्त गौहर जान (Gauhar Jaan) उन शख्सियतों में से थी जो अंग्रेजों के सामने नहीं झूकती थीं। उस वक्त भारत में सोने की कीमत 20 रुपये तोला था तब गौहर जान एक गाने को रिकॉर्ड करने के 3 हजार रुपये लिया करती थी। इतना ही नहीं वह एक लग्जरी लाइफ भी जीती थीं, उनके पास अपनी खुद की बग्गीयां थीं जिनमें बैठकर वे आना-जाना करती थीं। अंग्रेजों ने उन पर अपनी फीस कम करने का दबाव भी बनाया लेकिन गौहर जान उनके सामने नहीं झूकी।
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कैसे बनी 'ग्रामोफोन क्वीन'?
वो सिर्फ महाराजाओं की महफिलों में गाया करती थी, आम जनता के लिए उनका गाना सुनना एक सपने की तरह था। इसीलिए उनकी आवाज को ग्रामोफोन में रिकॉर्ड करने का फैसला किया ताकि आम लोग भी उनकी आवाज सुन सके। इस तरह गौहर जान (Gauhar Jaan) पहली सिंगर बनी जिनकी ग्रामोफोन में आवाज रिकॉर्ड की गई। 1902 में पहली बार गौहर जान की आवाज ग्रामोफोन में रिकॉर्ड की गई।
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गौहर जान ने बदला था अपना धर्म
गौहर जान का जन्म एलीन एंजेलिना येओवर्ड के रूप में 26 जून 1873 को आजमगढ़ में हुआ था। उनके पिता, रॉबर्ट विलियम येओवर्ड, एक ड्राई आइस फैक्टरी में इंजीनियर के रूप में काम करते थे, और उन्होंने 1872 में उनकी मां, एडेलिन विक्टोरिया हेमिंग्स से शादी की। विक्टोरिया खुद, ब्रिटिश सैनिक हार्डी हेमिंग्स और इलाहाबाद में रुक्मिणी नाम की एक स्थानीय हिंदू महिला की बेटी थीं और उनकी एक बहन वेला थी।
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1879 में उनकी शादी खत्म हो गई, जिससे मां और बेटी दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जो 1881 में एक मुस्लिम व्यक्ति, 'खुर्शीद' के साथ बनारस चले गए। बाद में, विक्टोरिया ने इस्लाम धर्म अपना लिया और एंजेलीना का नाम बदलकर 'गौहर जान' और अपना नाम बदलकर 'मलका जान' रख लिया।
समय के साथ, विक्टोरिया (अब 'मलका जान') एक कुशल गायिका, कथक डांसर और बनारस में एक तवायफ बन गईं और बड़ी मलका जान के रूप में अपना नाम बनाया।

600 से ज्यादा गाने किए रिकॉर्ड
अपने अंतिम दिनों में, वह मैसूर के कृष्ण राजा वाडियार चतुर्थ के निमंत्रण पर मैसूर चली गईं, हालांकि 18 महीने के भीतर 17 जनवरी 1930 को मैसूर में उनकी मृत्यु हो गई। अपने करियर में उन्होंने 1902 से 1920 तक 10 से अधिक भाषाओं में 600 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए जिनमें बंगाली, हिंदुस्तानी, गुजराती, तमिल, मराठी, अरबी, फारसी, पश्तो, फ्रेंच और अंग्रेजी शामिल हैं।