'बड़े फिल्ममेकर डरा-धमकाकर...' बिग बजट फिल्मों की मोनोपॉली पर भड़के Manoj Bajpayee, 'गवर्नर' को मिले थे कम शो!
Manoj Bajpayee ने हाल ही में छोटे बजट की फिल्मों को सीमित स्क्रीन मिलने और बड़े बजट की फिल्मों के एकाधिकार पर सवाल उठाया है।
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मनोज बाजपेयी ने बड़ी फिल्मों के एकाधिकार पर उठाया सवाल
HighLights
मनोज बाजपेयी ने बड़ी फिल्मों के एकाधिकार पर उठाया सवाल
कम शो के साथ रिलीज हुई थी गवर्नर
एक हफ्ते में ही थिएटर से उतरी गवर्नर!
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में गवर्नर फिल्म में नजर आने वाले मनोज बाजपेयी ने भारत में सभी तरह की और सभी बजट वाली फिल्मों के लिए 'समान अवसर' (level playing field) की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि बड़े बजट वाली फिल्मों के दबदबे और एकाधिकार की वजह से छोटी और स्वतंत्र फिल्मों के लिए देश भर में स्क्रीन मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है।
सिनेमा एग्जिबिशन में सरकारी दखल पर मनोज बाजपेयी
हाल ही में एक बातचीत में, फिल्ममेकर रीमा कागती ने कहा कि छोटी फिल्मों को दर्शकों से सिर्फ 'सपोर्ट' नहीं, बल्कि 'संरक्षण' (patronage) की जरूरत है। जब हमने यही बात मनोज के सामने रखी, तो अनुभवी एक्टर ने कहा, 'छोटी फिल्मों के मामले में, संरक्षण की शुरुआत एग्जिबिशन से होती है। जिस दिन सरकार ऐसी पॉलिसी बनाएगी कि हर फिल्म को दिखाने का पर्याप्त मौका मिले, तब उन्हें एक निष्पक्ष मंच या बराबरी का मौका मिलेगा। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक यह मुश्किल है'। ये बातचीत HT से की गई।
मनोज कहते हैं कि वह रीमा की इस बात से सहमत हैं कि भारत में इंडिपेंडेंट सिनेमा को संरक्षण की जरूरत है, लेकिन वह चाहते हैं कि यह संरक्षण प्रशासन की ओर से मिले और यह इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा हो, न कि पैसे से। उन्होंने कहा, 'हमें सरकारी संरक्षण मिलना चाहिए, पैसे के रूप में नहीं, बल्कि इस भरोसे के रूप में कि आपकी फिल्म दिखाई जाएगी और सबको बराबरी का मौका मिलेगा'।
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महाराष्ट्र सरकार ने मराठी सिनेमा के लिए उठाया ये कदम
एक्टर महाराष्ट्र राज्य का उदाहरण देते हैं, जो यह पक्का करता है कि मराठी फिल्मों को पूरे राज्य में पर्याप्त स्क्रीन मिलें, यहां तक कि मुंबई जैसे कल्चरल मेलजोल वाले इलाके में भी, जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का गढ़ भी है। उन्होंने कहा, ' मराठी सिनेमा को सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि महाराष्ट्र सरकार ने यह पहल की ताकि मराठी फिल्मों को बराबर मौका मिले। वो मिनिमम स्क्रीन की गारंटी पूरे भारत में मिले हमको भी'।
डरा-धमकाकर लेते हैं ज्यादा स्क्रीन्स
भारत में फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन और एग्जिबिशन नेटवर्क पर स्टूडियो और स्टार्स की मोनोपॉली को लेकर काफी बहस हुई है। मनोज भी इस बात से सहमत हैं, 'हर एक बड़े बजट की फिल्म जो है वो डिस्ट्रीब्यूटर्स को और एग्जिबिटर्स को डरा-धमकाकर सबसे ज्यादा शो ले लेते हैं। उसमें एक लेवल प्लेइंग फील्ड जरूरी है'।
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मनोज बाजपेयी की फ़िल्म 'गवर्नर' के बारे में
मनोज की हालिया फिल्म 'गवर्नर' (Governor) कम बजट वाली एक इंडिपेंडेंट फिल्म है, जिसे पिछले हफ्ते भारत में सीमित स्तर पर रिलीज किया गया था। चिन्मय डी. मंडलेकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मनोज बाजपेयी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर एस. वेंकिटरमनन की भूमिका निभाई है। यह फल्म 1990 के आर्थिक संकट से भारत को बचाने में वेंकिटरमनन की भूमिका को दिखाती है। हालांकि गवर्नर 12 जून को रिलीज हुई और एक हफ्ते के अंदर ही ज्यादातर सिनेमाघरों से उतर चुकी है।
