एक्ट्रेस से प्रोड्यूसर बनीं Meera Chopra ने बनाई बिना डायलॉग वाली मूवी, बोलीं- 'पैसा बोलता है'
प्रियंका चोपड़ा की कजिन और हिंदी-साउथ सिनेमा की मशहूर अदाकारा मीरा चोपड़ा (Meera Chopra) अब अपने पति से बिजनेस के गुण सीख रही हैं। उन्होंने गांधी टॉक् ...और पढ़ें

मीरा चोपड़ा ने प्रोड्यूसर बनने के सफर पर की बात। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दीपेश पांडेय, मुंबई। ‘सेक्शन 375’ और ‘सफेद’ फिल्मों की अभिनेत्री मीरा चोपड़ा अब तमिल साइलेंट फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ (Gandhi Talks) से फिल्म निर्माण में भी कदम रख चुकी हैं। सिनेमाघरों में यह फिल्म तमिल के साथ ही हिंदी, तेलुगु, मलयालम और मराठी में भी प्रदर्शित होगी। कुछ वेब सीरीज भी प्रोड्यूस कर रही मीरा से उनकी इस नई पारी, पेशेवर सफर और योजनाओं पर खास बातचीत हुई।
प्रोडक्शन में उतरने का विचार कब आया?
यह मेरा सोचा-समझा निर्णय है। पिछले दो-तीन साल से इस पर काम चल रहा था। प्रोडक्शन के करियर में ज्यादा दिनों तक बने रहने की संभावनाएं होती हैं। मुझे कहानियां सुनने, उनकी कास्टिंग और प्रोडक्शन से जुड़े बाकी काम करने में मजा आता है। कागज पर लिखी कहानी को स्क्रीन पर लाने तक का सफर काफी दिलचस्प होता है। मैं बहुत खुश हूं कि मेरा नया साल एक नए तरीके से शुरू हुआ है।
आपके पति (रक्षित केजरीवाल) व्यवसायी हैं, उनसे किस तरह की मदद मिलती है?
मैं यह प्रोडक्शन हाउस उनके बिना शुरू ही नहीं कर पाती, क्योंकि बिजनेस में उनका दिमाग बहुत तेज है। मेरे लिए प्रोडक्शन हाउस शुरू करके बिजनेस और आंकड़े सीखना आसान नहीं था। जब कोई शो या फिल्म बनती है तो बहुत बड़े-बड़े आंकड़े होते हैं। मेरे पति ने मुझे न सिर्फ प्रोत्साहित किया, बल्कि अब मैं उनसे बिजनेस की बारीकियां भी सीख रही हूं।
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पहली फिल्म ही बिना किसी डायलॉग के बनाना जोखिम नहीं लगा?
आज के दौर में एक संवादविहीन फिल्म बनाना बहुत साहसिक निर्णय है। इस फिल्म में पहले के सिनेमा जैसा ही बहुत अच्छा स्क्रीनप्ले, ठहराव, खूबसूरती, अच्छा संगीत और परफार्मेंस है। हम पहले भी कहते आए हैं कि कला की कोई भाषा नहीं होती है। इसमें भी कोई डायलॉग नहीं है। हालांकि, इसमें एआर रहमान (AR Rahman) का संगीत है और पांच गाने हैं।
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फिल्म का नाम तो महात्मा गांधी से जुड़ा है, लेकिन यह कहना क्या चाहती है?
‘गांधी टॉक्स’ फिल्म का वास्तविक मतलब आज के दौर के गांधी जी से है, जो बोलते हैं और वो है पैसा। फिल्म का सही मतलब है कि पैसा बोलता है। क्या हर समस्या पैसे से सुलझ सकती है। क्या पैसे से हर चीज खरीदी जा सकती है। लोग अक्सर पैसे कमाने के लिए अपनी व्यक्तिगत खुशियों का त्याग करते हैं। सभी भौतिक खुशियों और सुख के पीछे भाग रहे हैं, फिल्म में इन्हीं विषयों को अलग नजरिए से दिखाया गया है।