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    Mohammad Rafi का सबसे 'अभागा' गाना! रिलीज के लिए करना पड़ा 9 साल का इंतजार, आज भी सुनकर आ जाते हैं आंसू

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 06:14 PM (IST)

    मोहम्मद रफी और मदन मोहन के एक गाने को तीन फिल्मों से रिजेक्ट होने के बाद नौ साल का इंतजार करना पड़ा। आज भी श्रोताओं को भावुक कर देता है। ...और पढ़ें

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। मोहम्मद रफी (Mohammad Rafi) की मखमली आवाज में वो जादू था जिसने शायद ही किसी के दिल में अपनी जगह बनाई। उन्होंने कई सारे गानों के लिए मदन मोहन के साथ काम किया और कई क्लासिक गीत बनकर तैयार हुए। लेकिन इस महान जोड़ी ने सालों पहले एक ऐसा गीत बनाया था जिसे एक दो बार नहीं बल्कि 3 बार फाइनल से रिजेक्ट किया गया।

    कौन सी तीन फिल्मों से हुआ रिजेक्ट?

    आज की कहानी सिर्फ एक गाने की नहीं बल्कि उस गीत की है जिसे रिलीज होने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। ये गाना पहली बार 1964 में फिल्म 'हकीकत' में रिजेक्ट हुआ था। इसके बाद साल आया 1966 चेतन आनंद अपनी नई फिल्म 'आखिरी खत' ला रहे थे, मदन मोहन उस दौरान देश से बाहर थे इसलिए गाना अपने आप रिजेक्ट हो गया क्योंकि फिल्म को जल्द से जल्द पूरा करना था।

    Naveen (2)

    रिलीज के लिए करना पड़ा 9 साल इंतजार

    फिर आया साल 1970, फिल्म बन रही थी 'हीर रांझा' (Heer Ranjha) लेकिन ये गाना उस फिल्म में भी इस्तेमाल नहीं हो पाया क्योंकि वो वेस्टर्न थीम वाला गाना था और मूवी का प्लॉट ठेठ दिहाती था। इस वजह से वो गाना लगभग 9 साल तक यूं ही किताबों के पन्नों में लिखा पड़ा रहा। लेकिन जैसे हर नायाब हीरा एक न एक दिन अपनी जगह ढूंढ ही लेता है वैसा ही कुछ इस गाने के साथ हुआ। साल 1973 में आई फिल्म 'हंसते जख्म'। उसमें इस गाने का इस्तेमाल किया गया।

    Naveen (3)

    मदन मोहन के संगीत का चला जादू

    इस फिल्म का ऑलटाइम रोमांटिक गाना 'तुम जो मिल गए हो तो ये लगता है' जब सिनेमाघरों में बजा तो लोग भावुक होकर अपने आंसू पोछने लगे। इस गाने को नवीन निश्छल पर फिल्माया गया और रफी साहब ने इसे अपने अंदाज में ऐसे पिरोया कि जैसे मानों ये गाना सीधा रूह में उतरता हो।

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    इस तरह एक गाना जिसे बार-बार नकारा गया उसने ये साबित कर दिया कि रफी साहब की आवाज और मदन मोहन का संगीत किसी दौर या वक्त का मोहताज नहीं है। आज भी जब सफर के दौरान या फिर बारिश के मौसम में इस गाने को सुना जाए तो लगता है रफी साहब सीधे आपके दिल से बात कर रहे हैं।

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