Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    65 साल से प्रेमिका को 'बुरी नजर' से बचा रहा Mohammad Rafi का ये सुपरहिट गाना, आज भी बना हुआ है कल्ट सॉन्ग

    Updated: Wed, 20 May 2026 07:14 PM (IST)

    मोहम्मद रफी ने फिल्म 'ससुराल' में एक गाना गाया है जिसे आज भी लोग दुआ के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। प्रेमी इसे अपनी प्रेमिका की तारीफ करने के लिए इस्तेम ...और पढ़ें

    फिल्म ससुराल का एक सीन (फोटो- यूट्यूब)

    फिल्म ससुराल का एक सीन (फोटो- यूट्यूब)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। रफी साहब (Mohammad Rafi) अपनी दिलकश और मखमली आवाज के लिए काफी पॉपुलर हैं। सिंगर ने अपने पूरे फिल्मी करियर में जितने भी गाने गाए सब एक से बढ़कर एक हिट रहे। ऐसा ही एक गाना आज हम आपके लिए लेकर आए हैं।

    आज की कहानी का तार किसी रिकॉर्डिंग स्टूडियो नहीं बल्कि एक विदेशी सरजमीं से जुड़ा है। उन दिनों शंकर-जयकिशन (Shankar Jaikishan) मीडिल ईस्ट के किसी देश में छुट्टियां बिता रहे थे। एक शाम दोनों खाना खा रहे थे। तभी उनके पास एक बुजुर्ग महिला आई और आकर बैठ गई।

    यह भी पढ़ें- Rafi की जिद, संगीतकार ने किया था रिजेक्ट; 56 साल पुराना गाना हुआ ऐसा हिट तोड़े बॉक्स ऑफिस पर सभी रिकॉर्ड

    जयकिशन के दिमाग में अटक गया शब्द

    जाते-जाते उसने जयकिशन से एक शब्द कहा 'चश्मे बद्दूर' । यह सुनकर जय किशन हैरान रह गए। उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार ये शब्द सुना था। वो सोचने लगे कि आखिर इसका क्या अर्थ है? क्या ये कोई दुआ है? ये उनके दिमाग में एक धुन की तरह अटक गया।

    Rafi (8)

    जब वो मुंबई आए तो सीधे हसरत जयपुरी से मिलने पहुंचे। तब हसरत जयपुरी ने उन्हें बताया कि इसका मतलब होता है कि खुदा आपको बुरी नजर से बचाए। वहीं जयकिशन की आंखे चमक गईं और उन्होंने सोचा कि इस शब्द को हम किसी गाने में जरूर लेंगे।

    खबरें और भी

    लोगों ने दुआ के तौर पर किया इस्तेमाल

    फिर 1961 में आई फिल्म ससुराल (Sasural Movie) और हसरत जयपुरी ने वो खूबसूरत गाना लिख दिया 'तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नजर न लगे, चश्मे बद्दूर' (Teri Pyaari Pyaari Surat) जब रफी साहब ने ये गाना गाया तो एक दुआ बन गया। इस गाने में चश्मे बद्दूर को बहुत ही सलीके से इस्तेमाल किया गया है। ये बजते ही कानों में रस सा घुल जाता है।

    Rafi (9)

    जब रफी साहब स्टेज पर इस गाने को गाते थे तो अलग ही जादू होता था। भीड़ पागलों की तरह झूमने लगती थी उन्हें लगता था कि रफी साहब उनके लिए दुआ गा रहे हैं। 1962 में उन्हें इसके लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।

    यह भी पढ़ें- 58 साल पहले आया Mohammad Rafi का वो जादुई गाना, सुनते ही रो बैठेगा दिल