Mahatma Gandhi ने पूरी जिंदगी में देखी थी सिर्फ एक बॉलीवुड फिल्म, 600 दिन थिएटर में चली; Kajol से है कनेक्शन
600 दिन थिएटर में चलने वाली ये एकमात्र फिल्म थी जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने थिएटर में जाकर देखा था।

इकलौती फिल्म जिसे महात्मा गांधी ने देखा था
HighLights
इकलौती फिल्म जिसे महात्मा गांधी ने देखा था
88 हफ्तों तक थिएटर में चली थी ये फिल्म
83 साल पहले हुई थी रिलीज
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में कई फिल्में ऐसी बनी हैं जिन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है लेकिन बॉलीवुड की एक ऐसी फिल्म है जिसके नाम एक बड़ा अचीवमेंट है। दरअसल ये इकलौती फिल्म है जिसे राष्ट्रपति महात्मा गांधी ने देखा था।
600 दिनों तक थिएटर में चली थी फिल्म
कहा जाता है कि गांधी जी सिनेमा के बड़े फैन नहीं थे लेकिन ये फिल्म उन्होंने थिएटर में जाकर देखी थी। यह एक माइथोलॉजिकल फिल्म थी जो 600 दिनों से ज्यादा थिएटर में चली थी और उस साल की सबसे सफल फिल्मों में शामिल हुई थी।
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा था फिल्म की नाम
यह फ़िल्म इसलिए भी अहम हो गई क्योंकि इसका टाइटल, एक ऐसा शब्द जिसका इस्तेमाल महात्मा गांधी अक्सर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण शासन को बताने के लिए करते थे। साथ ही, यह इकलौती ऐसी फिल्म थी जिसे उन्होंने देखा था, जबकि वे फ़िल्मों के माध्यम को ज्यादा महत्व नहीं देते थे। यह पहली भारतीय फिल्म थी जिसका प्रीमियर अमेरिका में हुआ था।
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इस फिल्म का नाम था राम राज्य (Ram Rajya), जो 1943 में रिलीज हुई थी और इसे विजय भट्ट ने डायरेक्ट किया था और प्रेम अदिब (Prem Adib) और शोभना समर्थ ने फिल्म में लीड रोल निभाया था। प्रेम अदिब ने राम और शोभना ने माता सीता का किरदार प्ले किया था। ये 1943 की हाइएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म थी।
राम राज्य, वाल्मिकी रामायण पर आधारित थी और उन शुरुआती फिल्मों में से थी जो इस विषय पर बनाई गई थी और सफल भी रही थी। फिल्म का रनिंग टाइम 132 मिनट था
काजोल से क्या है कनेक्शन?
दरअसल फिल्म में सीता का किरदार निभाने वाली शोभना समर्थ काजोल (Kajol) की नानी थीं।
डायरेक्टर की हुई थी गांधी जी से मुलाकात
विजय भट्ट की गांधीजी से पहली मुलाकात 1930 के दशक के आखिर में वलसाड की यात्रा के दौरान अपने दोस्तों के साथ हुई थी। जब गांधीजी को पता चला कि वे फिल्म निर्माता हैं, तो उन्होंने पूछा, 'आप नरसी मेहता पर फिल्म क्यों नहीं बनाते?' नरसी मेहता गुजरात के एक संत-कवि थे।

उनका भजन 'वैष्णव जन तो तेने रे कहिए जे...' गांधीजी का पसंदीदा था। तब विजय भट्ट ने तुरंत स्क्रिप्ट पर काम शुरू कर दिया और 1940 में 'नरसी मेहता' फिल्म रिलीज की। फिल्म को बहुत पसंद किया गया और इसने पूरे भारत में सिल्वर जुबली मनाई।
भट्ट को इस बात का अफसोस था कि वे इसे गांधीजी को नहीं दिखा पाए। इसके बाद 1943 में 'राम राज्य' वह फिल्म थी जिसे महात्मा गांधी को दिखाया गया।
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प्रेम अदिब ने 9 बार निभाया राम का किरदार
'राम राज्य' फिल्म में भगवान राम का किरदार निभाने वाले प्रेम नारायण अदीब उस दौर में पौराणिक फिल्मों के मुख्य अभिनेता बन गए। यहां तक की लोग उन्हें भगवान के रूप में पूजने भी लगे थे और इसके बाद उन्होंने करीब 9 बार पर्दे पर राम का किरदार निभाया।

