सैंडपेपर से किया जुगाड़, चलती ट्रेन पर तिकड़म लगाकर बना था Rajesh Khanna का 52 साल पुराना गाना
राजेश खन्ना ने वैसे तो कई रोमांटिक गाने दिए हैं, लेकिन 52 साल पहले उनका एक ऐसा ्आइकॉनिक गाना आया था, जो सफर में कपल्स का आज भी फेवरेट है। ...और पढ़ें

राजेश खन्ना का रोमांटिक गाना 52 साल बाद हुआ अमर/ फोटो- Instagram
HighLights
52 साल बाद भी कल्ट क्लासिक बन चुका है राजेश खन्ना का ये गाना
म्यूजिशियन की हड़ताल के बीच जुगाड़ से तैयार की गई थी धुन
किशोर कुमार की आवाज में कपल्स का फेवरेट है सॉन्ग
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। कुछ गाने ऐसे होते हैं, जो सीधे दिल के तारों को छू लेते हैं। खासकर जब बात बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना और सुरों के बेताज बादशाह किशोर कुमार की जुगलबंदी की हो, तो फिर क्या ही कहना। 'मेरे सपनों की रानी' से लेकर 'ये शाम मस्तानी' तक, दोनों की जोड़ी ने अपने दौर में ऐसे कई कालजयी गाने दिए, जिन्हें आज भी लोग गुनगुनाते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से 52 साल पहले आया राजेश खन्ना का एक ऐसा भी सुपरहिट गाना था, जिसकी धुन तैयार करने के लिए संगीतकार आर.डी. बर्मन को भारी 'जुगाड़' करना पड़ा था? जिस वक्त यह गाना चलती मालगाड़ी पर शूट हो रहा था, ठीक उसी दौरान म्यूजिशियंस ने हड़ताल कर दी थी।
बिना किसी पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट के सिर्फ सैंडपेपर की मदद से तैयार हुआ यह गाना 52 साल बाद आज भी एक 'कल्ट क्लासिक' माना जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का दिलचस्प किस्सा।
चलती मालगाड़ी पर शूट हुआ था यह आइकॉनिक गाना
हम जिस सदाबहार रोमांटिक ट्रैक की बात कर रहे हैं, वह साल 1974 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म 'अजनबी' का गाना 'हम दोनों दो प्रेमी दुनिया छोड़ चले' है। इस फिल्म में राजेश खन्ना के अपोजिट 70 के दशक की मशहूर अदाकारा जीनत अमान नजर आई थीं। चलती मालगाड़ी की छत पर फिल्माया गया यह गाना रिलीज होते ही बहुत बड़ा चार्टबस्टर साबित हुआ था।

इस आइकॉनिक गाने को किशोर कुमार और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने आवाज दी थी, जबकि इसका संगीत आर.डी. बर्मन ने कंपोज किया था। आज 52 साल बीत जाने के बाद भी सफर के दौरान ट्रक ड्राइवरों से लेकर प्रेमी जोड़ों तक की प्लेलिस्ट में यह गाना ऑल-टाइम फेवरेट बना हुआ है।
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सैंडपेपर से ऐसे तैयार की गई थी गाने की धुन
'हम दोनों दो प्रेमी' को बनाने का सफर पंचम दा के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। एक तरफ जहां चलती मालगाड़ी पर गाने की शूटिंग करना मेकर्स के लिए अपने आप में एक बड़ा चैलेंज था, वहीं दूसरी तरफ शूटिंग के दौरान म्यूजिशियंस ने नए कॉन्ट्रैक्ट, वेतन बढ़ोतरी और काम की बेहतर शर्तों को लेकर हड़ताल का ऐलान कर दिया। ऐसे में बिना किसी ऑर्केस्ट्रा या बैकग्राउंड म्यूजिशियन के गाना रिकॉर्ड करना पंचम दा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया।
चूंकि गाना मालगाड़ी पर फिल्माया जा रहा था, इसलिए पंचम दा को उसमें ट्रेन की छुक-छुक वाली नेचुरल लय चाहिए थी। इसके लिए उन्होंने दो सैंडपेपर के टुकड़ों को आपस में रगड़ना शुरू किया। उससे निकलने वाली आवाज से ट्रेन की रफ्तार जैसी रिदम तैयार हो गई। इसके अलावा, उन्होंने मुंह से निकाली आवाजों और तालियों के ताल-मेल से गाने का पूरा बैकग्राउंड ट्रैक तैयार कर लिया। आर.डी. बर्मन की इसी सोच ने इस गाने को हिंदी सिनेमा का सबसे अनोखा और यादगार सॉन्ग बना दिया।