43 साल पुरानी वो Cult Film जिसे देख फूट-फूटकर रोए थे लोग, बच्चों को प्रॉपर्टी देने से डरने लगे थे मां-बाप
43 साल पहले एक ऐसी फिल्म आई जिसने न केवल दर्शकों को भावुक कर दिया, बल्कि फिल्म देखने के बाद मां-बाप अपने बच्चों को प्रॉपर्टी देने से कतराने लगे थे। ...और पढ़ें

फिल्म देखकर सिसक-सिसक कर रोए थे लोग। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सिनेमा समाज का आईना होता है। कुछ फिल्में महज एंटरटेनर तक ही सीमित रहती हैं, लेकिन कुछ ऑडियंस के दिलों में घर कर जाती हैं। 43 साल पहले एक ऐसी ही फिल्म आई थी जिसने मां-बाप को इस कदर सहमा दिया था कि वे अपने बच्चों को घर का मालिकाना हक देने से कतराने लगे थे।
यह फिल्म जब बनी तो किसी को नहीं पता था कि इसे देखने के बाद ऑडियंस सिसक-सिसककर रोने लगेगी। आज भी अगर टीवी पर यह फिल्म आ जाए तो देखने वाले अपने आंसू नहीं रोक पाते हैं। 43 साल पहले जब यह फिल्म आई तो सिनेमाघरों से निकलने वाले हर शख्स की आंखें नम थी। इस फिल्म ने ऑडियंस पर गहरा प्रभाव छोड़ा था।
पारिवारिक फिल्म ने कर दिया था भावुक
यह फिल्म राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) की थी। हैंडसम हंक राजेश खन्ना सिनेमा के पहले सुपरस्टार रहे। मगर जब उनका करियर खतरे में पड़ा, तब यही फिल्म उनके डूबते नाव का सहारा बनी। जिस फिल्म की हम बात कर रहे हैं, वो है अवतार (Avtaar)।
अमन, अमृत अनजाना और आप आए बहार आए जैसी फिल्में बना चुके मोहन कुमार ने ही अवतार का निर्देशन और निर्माण किया था। फिल्म में राजेश खन्ना ने एक बूढ़े पिता का किरदार निभाया था। उनके साथ लीड रोल में शबाना आजमी थीं। इसके अलावा फिल्म में ए.के. हंगल, सचिन पिलगांवकर, रंजन ग्रेवाल, प्रीति सप्रू, सुजीत कुमार, गुलशन ग्रोवर समेत कलाकार अहम भूमिकाओं में थे।
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फिल्म की कहानी ने ऑडियंस को कर दिया था भावुक
फिल्म की कहानी अवतार किशन (राजेश खन्ना) और उसकी पत्नी राधा (शबाना आजमी) की है जिसके बच्चे उन्हें उनके ही घर से बेदखल कर देते हैं और उन्हें उनके हाल पर छोड़ देते हैं। बुढ़ापे में दर-दर भटकने के बाद दिन-रात एक करके अवतार फिर से सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है।
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फिल्म देखकर डर गए थे लोग
जब यह फिल्म रिलीज हुई तो राजेश खन्ना और उसकी पत्नी का हाल देखकर लोग इतना डर गए कि वे अपने बच्चों के नाम प्रॉपर्टी देने से झिझकने लगे। IMDb के मुताबिक, इस फिल्म को देखने के बाद भारत में कई बुज़ुर्ग कपल जिन्होंने अपने घरों का मालिकाना हक अपने बच्चों को दे दिया था, उन्होंने घर के कागजात (टाइटल डीड्स) वापस अपने नाम करवा लिए। उन्हें डर था कि कहीं उनके बच्चे भी उनके साथ वैसा ही न करें, जैसा इस फिल्म में बच्चों ने अपने माता-पिता के साथ किया था।
यह फिल्म न केवल क्रिटिक्स और दर्शकों की तरफ से सराही गई, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही। जिस फिल्म को करने में राजेश खन्ना झिझक रहे थे, उसने वापस उनके करियर के ट्रैक पर ला दिया था।
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