रणवीर सिंह की 'जयेशभाई जोरदार' फ्लॉप होने से टूट गई थीं शालिनी पांडे, बोलीं- 'जिंदगी का सबसे बड़ा सबक...'
अभिनेत्री शालिनी पांडे (Shalini Pandey) ने रणवीर सिंह की फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। उन्होंने बताया कि फिल्म की असफलता से वह ...और पढ़ें

रणवीर सिंह की फिल्म फ्लॉप होने से शालिनी को लगा था धक्का। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

समय कम है?
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स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। जयेशभाई जोरदार, महाराज, राहु केतु फिल्में कर चुकीं अभिनेत्री शालिनी पांडे (Shalini Pandey) दक्षिण भारतीय इंडस्ट्री और हिंदी फिल्मों के बीच संतुलन बनाकर चल रही हैं। डिजिटल प्लेटफार्म पर हालिया रिलीज वेब सीरीज बैंडवाले (Bandwaale) में उनके अभिनय की सराहना हुई।
दैनिक जागरण के साथ बातचीत में शालिनी पांडे ने रणवीर सिंह की फ्लॉप फिल्म और अपने करियर के बारे में बात की है।
आपने कहा था कि जो चीज आपके नियंत्रण में नहीं, उसमें आप अपनी ऊर्जा नहीं लगाती हैं?
नहीं, मैं बस अपना काम करती हूं। हर पड़ाव अलग होता है। आप जिंदगी के अलग-अलग पड़ाव पर नए लोगों से मिलते हैं। जितना इंडस्ट्री के बारे में सीखते हैं, उतना ही अपनी पसंद- नापसंद को भी बेहतर समझने लगते हैं। आज कई स्क्रिप्ट्स पढ़कर लगता है कि शायद पांच साल पहले मैं फलां रोल को समझ नहीं पाती।
अब समझ पाती हूं। मैं ऐसे लोगों के साथ काम करना चाहती हूं, जो मुझे उत्साहित करें। मैं सेट पर जाकर खुश रहना चाहती हूं। मेरे नियंत्रण में अपना सर्वश्रेष्ठ देना है। उसके बाद सिर्फ उम्मीद ही कर सकते हैं कि दर्शक आपको स्वीकार करें।
आपने धनुष के साथ इडली कडई फिल्म और रणवीर सिंह के साथ जयेशभाई जोरदार में काम किया है। दोनों से क्या सीखा ?
दोनों बहुत अलग इंसान हैं। धनुष के काम में स्विच ऑन स्विच आफ का तरीका है, वह आसानी से किसी रोल में जाते हैं और निकल आते हैं। वहीं रणवीर सिंह बहुत होमवर्क करते हैं। मैंने उनके साथ ज्यादा समय बिताया है। उनके साथ पहली हिंदी फिल्म की थी, इसलिए वह मेरे लिए बहुत खास रहेंगे।
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जयेशभाई जोरदार अगर सुपरहिट हुई होती तो क्या आज इंडस्ट्री में मौके और बेहतर होते ?
मैं ऐसा सोचने वालों में से नहीं हूं कि काश ऐसा हुआ होता। जयेशभाई जोरदार ने मुझे सबसे बड़ी सीख दी। जब यह नहीं चली, तो मेरा दिल टूट गया था, लेकिन मैंने जिंदगी का सबसे बड़ा सबक भी सीखा कि कुछ भी आपके नियंत्रण में नहीं होता।
आप दक्षिण भारतीय व हिंदी सिनेमा में काम कर रही हैं। फिल्म चयन का आधार क्या है?
मैं इसे क्षेत्रीय या किसी दूसरे नजरिये से नहीं देखती हूं। मैं फिल्म को केवल एक फिल्म की तरह देखती हूं और जिन लोगों के साथ में काम कर रही हूं। कही मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। भाषा मेरे लिए मायने नहीं रखती है। हां, काम करने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है जैसे यहां आडिशन ज्यादा होते हैं।
लेकिन सच कहूं तो मैंने वहां भी ज्यादा ऑडिशन नहीं दिए और यहां (मुंबई) भी नहीं। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे अच्छे लोग मिले। हर किसी का सफर होता है, इसलिए सब इसे अलग तरीके से देखते हैं। मैं दोनों को समान रूप से देखती हूं।
होली पर कोई खास रीति-रिवाज हैं, जिसे करती हैं?
मेरी मां पूजा करती हैं। मैं बस इस बात का ख्याल रखती हूं कि वह दिन परिवारवालों और दोस्तों के साथ बीते। काफी सारा खाना पीना होता है। बेहद निजी तरीके से होली मनाती हूं। इस दिन इंटरनेट मीडिया पर अपनी होली की झलक दिखाने का कोई दबाव नहीं लेती।
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शो में आपके पिता बहूत सख्त हैं। असल जिंदगी में पापा से डांट पड़ी है?
पिता अपने बच्चों को इसलिए डांटते हैं, ताकि वह गलत दिशा न जाएं। मेरे पापा भी उसी नजरिये से सोचते थे और मेरे लिए जो सबसे अच्छा कर सकते थे, वही किया। वे बहुत सख्त पिता रहे हैं और मुझे बहुत सी बातों पर डांट पड़ती थी। सच कहूं तो में शरारती भी थी तब बहुत सी चीजों की अनुमति नहीं होती थी, इसलिए मैं काफी झूठ भी बोलती थी।
होली का त्योहार पास है, इस बार होली मनाने को लेकर क्या योजनाएं हैं?
मैं एक फिल्म की शूटिंग कर रही हूं, तो बहुत बड़ी योजनाएं नहीं है। होली वाले दिन छुट्टी है, तो मैं दो कुत्तों के साथ समय बिताऊंगी। बाकी में बहुत गहरे, केमिकल वाले रंगों और पानी के साथ नहीं खेलती हूं। मुझे लगता है त्योहार के नाम पर पानी की बर्बादी करना बिल्कुल सही नहीं है।