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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राजेश खन्ना समेत इन 5 सुपरस्टार्स का जलवा सियासत में रहा फीका, फ़िल्मों में लौटे

By Manoj VashisthEdited By:
Published: Sun, 19 Nov 2017 11:42 AM (IST)Updated: Sat, 29 Dec 2018 07:50 AM (IST)

सिल्वर स्क्रीन पर भ्रष्ट राजनीति से लड़ने वाला नायक रियल लाइफ़ की पॉलिटिक्स में नहीं टिक पाता। इस रिपोर्ट में ऐसे ही 5 महानायक...

राजेश खन्ना समेत इन 5 सुपरस्टार्स का जलवा सियासत में रहा फीका, फ़िल्मों में लौटे
राजेश खन्ना समेत इन 5 सुपरस्टार्स का जलवा सियासत में रहा फीका, फ़िल्मों में लौटे

मुंबई। सिनेमा और सियासत का ये रिश्ता पर्दे पर तो अक्सर दिखायी देता है, मगर असल ज़िंदगी में सबको कामयाबी नहीं मिलती। सिल्वर स्क्रीन पर भ्रष्ट राजनीति से लड़ने वाला नायक रियल लाइफ़ की पॉलिटिक्स में नहीं टिक पाता। इस रिपोर्ट में ऐसे ही 5 महानायक, जो सिनेमा से सियासत की तरफ़ गये, मगर ज़्यादा देर तक टिक ना सके। 

राजेश खन्ना

राजेश खन्ना जैसा स्टारडम हिंदी सिनेमा के किसी सुपरस्टार ने नहीं देखा और भविष्य में इसकी संभावना भी कम है। मगर, राजनीति के मंच पर राजेश खन्ना फ्लॉप एक्टर साबित हुए। कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर राजेश खन्ना 1992 से 1996 कर नई दिल्ली के सांसद रहे, मगर सियासत की पारी लंबी नहीं चली।

अमिताभ बच्चन

हिंदी सिनेमा के पर्दे पर नायक के नए तेवर पेश करने वाले अमिताभ बच्चन ने सियासत में क़िस्मत आज़मायी और इलाहाबाद से रिकॉर्ड मतों से लोकसभा चुनाव जीता भी, मगर तीन साल बाद ही अमिताभ बच्चन को अहसास हो गया कि राजनीति के वो कभी सुपरस्टार नहीं बन सकते। बच्चन ने इस्तीफ़ा देकर सियासत छोड़ दी।

धर्मेंद्र

धर्मेंद्र का फ़िल्मी सफ़र जितना शानदार रहा, उनका पॉलिटिकल करियर उतना ही आलोचनाओं का शिकार बना। धर्मेंद्र ने 2004 में बीकानेर से भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता, मगर संसद में ग़ैरहाज़िरी के लिए उन्हें क्रिटिसाइज़ किया जाता रहा। धर्मेंद्र ने इसके बाद राजनीति छोड़ दी।

गोविंदा

गोविंदा ने हिंदी सिनेमा में अपनी कॉमिक टाइमिंग से फ़ैंस का ख़ूब मनोरंजन किया है, मगर जब इस स्टारडम को राजनीति में करियर बनाने के लिए इस्तेमाल किया तो ट्रैजडी हो गयी। 2004 में गोविंदा ने कांग्रेस के टिकट पर मुंबई की विरार कांस्टिचुएंसी से लोकसभा चुनाव लड़ा, जीते भी, मगर उनका कार्यकाल काफ़ी विवादों भरा रहा। 2008 में गोविंदा ने अपने पॉलिटिकल करियर के क्लाइमेक्स का एलान कर दिया।

संजय दत्त

संजय दत्त के पिता सुनीत दत्त कामयाब राजनेता थे। उनकी बहन प्रिया दत्त भी राजनीति में सक्सेसफुल रही हैं। मगर, संजय पॉलिटिक्स में फ्लॉप रहे। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के टिकट पर नामांकन करवाया मगर अदालत ने उनके कंविक्शन को सस्पेंड करने के इंकार कर दिया, जिसके चलते चुनाव नहीं लड़ सके। उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया, मगर 2010 में संजय ने पद और पार्टी छोड़ दी।

राहुल रॉय ने ज्वाइन की बीजेपी

अब नब्बे के दशक में पर्दे पर 'आशिक़ी' करके छा जाने वाले एक्टर राहुल रॉय सियासत से इश्क़ करने चले हैं। नवंबर में राहुल ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। राहुल का फ़िल्मी करियर बहुत शानदार नहीं रहा है। 'आशिक़ी', 'फिर तेरी कहानी याद आयी' के अलावा कुछेक को छोड़कर उनके करियर में एक भी फ़िल्म ऐसी नहीं है, जिसे याद रखा जाए। बहरहाल, राहुल की सियासी पारी कितनी लंबी चलेगी ये कहना तो फ़िलहाल मुश्किल है, मगर बॉलीवुड में ऐसे लोग कम ही हैं, जिन्होंने एक्टिंग का स्टारडम सियासत में भी देखा हो।

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