50 के दशक का वो रोमांटिक हीरो, डायरेक्टर संग भाग गई थी पत्नी; पाई-पाई को मोहताज हो गया था सुपरस्टार
50 के दशक के अभिनेता ने बतौर चाइल्ड एक्टर करियर शुरू कर बुलंदियां छुईं, लेकिन पत्नी की बेवफाई और आर्थिक ...और पढ़ें

50 के दशक के रोमांटिक हीरो की दर्दभरी कहानी/ फोटो- Imdb

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में एक ऐसा सितारा आया था, जिसे आज इंडियन फिल्म इंडस्ट्री पूरी तरह से भूल चुकी है। बतौर चाइल्ड अपना करियर शुरू करने वाले जिस अभिनेता की कहानी हम आपको बता रहे हैं, उनका करियर 40 के दशक के अंत और 50 में बुलंदियों पर था।
उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी और सुरैया से लेकर मुमताज, वैजयंती माला सहित अपने समय की कई दिग्गज अभिनेत्रियों संग रोमांटिक फिल्मों में काम किया। हालांकि, एक बेवफाई ने उन्हें अंदर से इस कदर झकझोर दिया कि महज 49 साल की कम उम्र में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। कौन थे वह सुपरस्टार जो अपने आखिरी समय में हुए पाई-पाई के मोहताज, पढ़ें उनकी दर्द भरी कहानी।
1930 में बतौर चाइल्ड करियर की शुरुआत की
जिस सुपरस्टार का जिक्र हम अपने इस लेख में कर रहे हैं, वह 50 के दशक के मशहूर सितारे सुरेश हैं, जिनका असली नाम नाजिम अहमद था। उनका जन्म पंजाब गुरुदासपुर 1928 में हुआ था। सुरेश ने भले ही बॉलीवुड में बतौर चाइल्ड एक्टर काम किया था, लेकिन उनकी पहली फिल्म 'गोपाल कृष्णा' नहीं थी, बल्कि उन्हें जिस फिल्म में पहली बार क्रेडिट मिला, वह 'ठोकर' थी, जो ए आर कारदार की फिल्म थी, इसके बाद वह 'दीवाली' में नजर आए थे।
सुरेश ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट बॉम्बे टॉकीज की चार फिल्में की, जिसमें बंधन, अनजान, नया संसार और बसंत शामिल हैं। बसंत में उन्होंने मुमताज शांति के भाई का किरदार अदा किया था।

इस फिल्म से बने थे लीड एक्टर
फिल्म हिस्टोरियन शिशिर कृष्ण शर्मा ने अपने यूट्यूब चैनल में बताया कि सुरेश पहली बार साल 1946 में रिलीज हुई फिल्म 'सोना चांदी' में हीरो बने थे। इसके बाद उन्होंने रंग महल, जिसमें उनके अपोजिट सुरैया नजर आईं, लेकिन ये दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई। इसके बाद उन्होंने 1949 में 'दुलारी' में लीड एक्टर के रूप में काम किया, जिसका निर्देशन ए आर कारदार ने किया, जिसमें उनके अपोजिट गीता बाली थीं। ये फिल्म सुपरहिट हुई।
इसके बाद उन्होंने दास्तान, जादू, दीवाना और यास्मिन में काम किया, जो हिट रहीं, लेकिन 1950 में वह सब छोड़कर पाकिस्तान चले गए और वहां उन्होंने दो किनारे और ईद की। हालांकि, वहां पर उनका मन नहीं लगा और वह भारत लौट आए। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में मधुबाला, सुरैया, नलिनी जयवंत, पद्मिनी जैसी कई ए लिस्टर एक्ट्रेसेस के साथ काम किया।

किशोर कुमार भी की फिल्म
साल 1957 में सुरेश ने किशोर कुमार के साथ फिल्म 'कैप्टन किशोर' में काम किया। हालांकि, 60 के दशक में उनका करियर ढलने लगा और उन्होंने सपोर्टिंग और कैरेक्टर रोल भी लेने शुरू कर दिए। सुरेश ने आप की परछाइयां, मजबूर, ये रात फिर न आएगी, रेशम की डोरी, सेवक, अदालत जैसी कई फिल्मों में सपोर्टिंग रोल निभाए।
हालांकि, इसके बाद उन्होंने प्रोड्यूसर बनने की सोची और फिल्म 'गंगा और सूरज' बनाई, जिसमें शशि कपूर, रीना रॉय और अनवर हुसैन जैसे सितारों ने काम किया। फिल्म का काफी हिस्सा शूट होने के बाद एक्टर अनवर हुसैन बीमार पड़ गए। जिसकी वजह से फिल्म रुक गई और बाद में कादर खान को लेना पड़ा। उन्होंने जितना भी अपने फिल्मी करियर से कमाया, अभिनेता ने पूरी कमाई फिल्म में लगा दी और बाद में वह पाई-पाई के मोहताज हो गए।
पत्नी से मिली थी बेवफाई
'गंगा और सूरज' के अधूरे रहने की वजह ने न सिर्फ उन्हें तोड़ा, बल्कि पत्नी की बेवफाई भी अभिनेता बर्दाश्त नहीं कर सके। एक्ट्रेस शम्मी ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में यह खुलासा किया था कि उनके पति सुल्तान अहमद का अफेयर अभिनेता सुरेश की पत्नी के साथ चल रहा था। दरअसल, 'गंगा और सूरज' सुल्तान अहमद ही डायरेक्ट करने वाले थे, इस सिलसिले में उनका सुरेश से मिलना जुलना लगा रहता था, वह अभिनेता के घर अक्सर आया जाया करते थे।

ऐसे में सुरेश की पत्नी की सुल्तान अहमद से नजदीकियां बढ़ीं और वह अपने पति का घर छोड़ सुल्तान अहमद के घर रहने के लिए आईं। सुरेश अहमद जो अपनी फिल्म 'गंगा और सूरज' के अधूरा रहने से परेशान थे, वह पत्नी की बेवफाई से इतना टूट गए कि अपने आप को संभाल नहीं सके और 14 जुलाई 1979 में महज 49 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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