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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 12, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    सिनेमा की पहली आवाज बनी थीं Zubeida, पर्दा, परंपरा और पाबंदियों की बेड़ियों को तोड़ने वाली नायिका की कहानी

    Updated: Thu, 12 Jun 2025 10:57 AM (IST)

    Zubeida Begum हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का वो हस्ती रहीं जिनके नाम एक विशेष उपलब्धि दर्ज हुई थी। 1931 में आई भारतीय सिनेमा की पहली टॉकी फिल्म आलम आरा (Ala ...और पढ़ें

    अभिनेत्री जुबैदा बेगम की कहानी (फोटो क्रेडिट- जागरण)
    अभिनेत्री जुबैदा बेगम की कहानी (फोटो क्रेडिट- जागरण)

    HighLights

    1. कौन थीं एक्ट्रेस जुबैदा बेगम
    2. पहली टॉकी फिल्म की लीड एक्ट्रेस
    3. इन मूवीज के लिए फेमस थीं जुबैदा

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 1931 में फिल्म आलम-आरा (Alam Aara) को रिलीज किया जाता है और इसके साथ ही भारतीय सिनेमा बोलना शुरू कर देता है। क्योंकि ये मूवी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की पहली टॉकी फिल्म थी, क्योंकि इससे पहले पर्दे पर मूक मूवीज का चलन था। निर्देशक अर्देशिर ईरानी ने बोलती फिल्मों का नया दौर शुरू किया और आलम आरा की नायिका के तौर पर जुबैदा बेगम (Zubeida Begum) सिनेमा की पहली आवाज बनीं। 

    जुबैदा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का वो नाम रहीं, जिन्होंने रूढ़िवादी समाज की सीमाओं को पार किया था और एक्ट्रेस के तौर पर लोगों की सोचकर को बदलकर रख दिया। आज के इस लेख में जुबैदा बेगम के बारे में और भी गहराई से जाना जाएगा। 

    कौन थीं जुबैदा बेगम?

    1911 में ब्रिटिश इंडिया के अधीन सूरत के नवाब सिधि मोहम्मद युकुत खान तृतीय और बेगम फातम बेगम के घर एक बेटी का जन्म होता है, जिसका नाम जुबैदा बेगम रखा जाता है। चूंकि वह राजखराने की रानी थीं तो उनके परिवार में पर्दा, परंपरा और पाबंदियों की बेड़ियां भी थीं। लेकिन जुबैदा ने हिंदी सिनेमा की एक्ट्रेस बनकर इनको तोड़ दिया और समाज में महिलाओं के प्रति नजरिए को बदलकर रख दिया। 

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    फोटो क्रेडिट- फेसबुक

    एक मुस्लिम महिला होने के नाते उन्होंने उस दौर में अदाकारी के क्षेत्र का चुनाव किया, जब महिलाओं को प्रतिभा के हर मंच से कोसों दूर रखा जाता था। लेकिन जुबैदा ने इस चलन की दीवार को तोड़ते हुए, समाज में औरतों के लिए विशेष अवसर के दरवाजे खोले।

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    फोटो क्रेडिट- फेसबुक

    1924 में आई गुल ए बकवली मूक मूवी से बतौर एक्ट्रेस उन्होंने अपने करियर का आगाज किया, हालांकि इससे पहले 12 साल उम्र में वह कोहिनूर नाम की फिल्म में भी नजर आईं। इस तरह से उन्होंने समय-समय पर फिल्में करके अपनी पहचान बनाई। लेकिन पहली बोलती फिल्म आलम-आरा का हिस्सा बनकर उन्होंने अपना नाम हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा दिया। 

    आलम-आरा से बदल गया सिनेमा

    पहली टॉकी मूवी के तौर पर आलम-आरा को जाना जाता है। इतना ही जुबैदा बेगम पहली बोलती फिल्म की हीरोइन बनीं, जिनकी आवाज को सिनेमा के बाहर भी लोगों ने सुना और महसूस किया। उनकी आवाज की गूंज सिनेमा जगत में कुछ इस कदर गूंजी कि आज करीब 94 सालों बाद भी हम उनका जिक्र कर रहे हैं। मालूम हो कि 14 मार्च 1931 में आलम आरा को मुंबई के मैजेस्टिक सिनेमा में प्रदर्शित किया गया था।

    इसके अलावा गौर किया जाए जुबैदा की पॉपुलर मूवीज की तरफ तो उनके नाम इस प्रकार हैं-

    • मनोरमा 

    • सति सरदरबा

    • राम सरोवर

    • काला चोर

    • देवदासी

    • इंद्रजाल

    • लैला मजनू

    • मीरा बाई

    • देवदास

    शादी के लिए बदल दिया था धर्म

    जुबैदा बेगम हमेशा क्रांतिवादी किस्म की महिला रहीं, उन्होंने सिनेमा जगत में मूवीज का चुनाव भी अपनी शर्तों पर किया था। सिर्फ इतना ही नहीं जब बात निजी जीवन की आई तो उन्होंने जमाने में एक नई मिसाल कायम की और धर्म बदलकर हैदराबाद के महाराज नरसिंगिर धनराजगीर ज्ञान बहादुर से शादी रचाई। साल 1987 में जुबैदा ने 77 साल की उम्र में मुंबई के धनराज पैलेस में आखिरी सांस ली और अपने पीछे सिनेमा की एक बड़ी विरासत छोड़ गईं। 

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