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    वो कल्ट गाना जिसे सुन भड़के थे पंचम दा, Asha Bhosle की आवाज ने दिलाया नेशनल अवॉर्ड; दिलचस्प है कालजयी गीत की कहानी

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 08:21 PM (GMT+05:30)

    क्या आपने कभी सुना है कि किसी गाने को उसके संगीतकार ने सिर्फ इसलिए 'कचरा' कह दिया था क्योंकि उसे वो सामान की लिस्ट लग रही थी? Asha Bhosle और RD Burman ...और पढ़ें

    गाने को 'सामान' बताकर पंचम ने किया था रिजेक्ट

    गाने को 'सामान' बताकर पंचम ने किया था रिजेक्ट

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सिनेमा में सुरों की महफिलें सजाकर 'सुरों की रानी' अब चली गई हैं। उनका जाना किसी आम के जाने जैसा नहीं है। उनके जाने से संगीत की एक दीवार मानो ढह सी गई है। आशा भोसले... एक ऐसी आवाज जिनकी सुरों में शरारत थी, तो गहराई भी थी, तो कभी वक्त को थाम लेने वाला वो जादू था, जो शायद किसी और के पास पास नहीं था।

    उनकी आवाज हमेशा ताजगी का एहसास कराकर गई। ये आशा भोसले ही थीं जो साधारण से शब्दों में भी जान फूंक दिया करती थीं और एक ऐसा ही किस्सा जुड़ा है उनका और पंचम दा का, जब उन्होंने एक 'सामान की लिस्ट' वाले शब्दों पर गाना बना दिया और यकीन मानिए उन साधारण शब्दों को आशा ने अपने सुरों में ऐसा पिरोया कि उस गीत को नेशनल अवॉर्ड तक मिल गया। आइए जानते हैं पंचम दा के गुस्से और आशा के सुरों से सजे उसी गीत की कहानी...

    जब गुस्से से तमतमाए 'पंचम दा'

    ये किस्सा है साल 1987 में आई फिल्म 'इजाजत' (Ijaazat) का। इस फिल्म का गाना 'मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है' (Mera Kuch Saaman) संगीत की दुनिया का वो अजूबा है, जो कभी पैदा ही नहीं होता अगर आरडी बर्मन यानि पंचम दा इस पर नाराजगी ना दिखाते और फिर आशा भोसले इस गाने को अपने अंदाज में ना गातीं। इस गाने के बनने के पीछे की कहानी किसी ड्रामे से कम नहीं है।

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    दरअसल फिल्म आर. डी. बर्मन यानि पंचम दा ने ही तैयार किया था। फिल्म का संगीत जब पंचम दा बना रहे थे तो गुलजार (Gulzaar) साहब ने ही गानों को लिखा। अब क्योंकि फिल्म को डायरेक्ट भी गुलजार ने किया और स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स भी उन्होंने ही लिखे थे, तो गाने को लिखने के बाद जब वह इसे लेकर पंचम दा के पास गए तो पंचम दा उन पर भड़क उठे। पंचम दा (RD Burman) गाने के लिरिक्स पढ़कर ही झल्ला उठे।

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    गुलजार पर गुस्सा और आशा की सूझबूझ से बना गाना

    पंचम दा ने तमतमाते हुए कहा कि, अरे ये क्या समाना की लिस्ट उठा लाए हो... यह कैसा गाना है गुलजार। पंचम दा को लगा कि ये कोई गाना नहीं बल्कि किसी की 'सामान की लिस्ट' या अखबार की कोई खबर है। गाने के लिरिक्स पढ़कर वो चिढ़ गए और उन्होंने तमतमाते हुए गुलजार से कहा कि, 'अगर कल तुम किसी अखबार की हेडलाइन ले आओगे और कहोगे कि इसे ट्यून कर दो। यह गाना नहीं है, ऐसा लग रहा है कि यह लगेज की लिस्ट है।'

    जब पंचम दा और गुलजार के बीच गाने को लेकर बहस चल रही थी, तब आशा भोंसले वहीं मौजूद थीं। उन्होंने उस कागज को उठाया, गुनगुनाया और पंचम दा से कहा कि वो इसे एक बार कोशिश तो करें। आशा जी ने इस गाने को एक 'बातचीत' के लहजे में गाने का सुझाव दिया।

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    गाना हुआ हिट फिर मिला नेशनल अवॉर्ड

    आशा भोसले (Asha Bhosle) की बात मानकर पंचम दा ने इस गाने को हरी झंडी दे दी और जब गाना आशा ताई ने गाया तो वाकई में लगा ही नहीं कि यह गाना इन लिरिक्स के साथ बना है।

    गाना इसके बाद रिकॉर्ड हुआ और फिर ये गाना रिलीज किया गया। आशा भोसले ने इसे इतनी शिद्दत और ठहराव के साथ गाया कि इस 'नॉन-रिदमिक' गाने के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला। आशा ताई ही नहीं बल्कि गाना लिखने वाले गुलजार साहब को भी इसके लिए नेशनल अवॉर्ड मिला।

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    दिलचस्प है गाने का मतलब

    इस गाने में नसीरुद्दीन शाह और अनुराधा पटेल नजर आए थे। गाने का अर्थ भी बेहद दिलचस्प है। दरअसल इस गाने में प्रेमिका अपने प्रेमी से प्रेम संबंध करने के बाद की कहानी बयां कर रही है।

    प्रेमिका कह रही है कि, उसका कुछ सामान अब भी उसके प्रेमी के पास पड़ा हुआ है जो अब उनके किसी काम का नहीं है, तो उसे वापस भेज दो। उस सामान में सावन , पतझड़, बारिश, चांदनी रातों में सिमटी वो सारी यादें हैं, जो वापस प्रेमिका के पास भेज दी जाएं।

    एक सौ सोलह चांद की रातें, एक तुम्हारे कंधे का तिल...गाने में आई ये लाइन महज एक लाइन नहीं बल्कि गुलजार साहब का एक मास्टरस्ट्रोक था।

    दरअसल कतरा-कतरा के नाम पर संगीत कला केंद्र के लिए पंचम दा की एक एंथोलॉजी बनी थी, जिसमें पंचम दा के करीब 116 धुनों को गुलजार साहब ने गाने लिखे थे। ये एक राइटर का कमाल ही था कि उन्होंने कैसे पंचम दा के करियर और अपने करियर को मिलाकर एक गाना लिख दिया।

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    आपको बता दें कि, ये गाना आज भी कल्ट क्लासिक है। आशा ताई का गुनगुनाना, पंचम दा का तमतमाना और गुलजार साहब का लिखना... एक गाने को अमर कर गया। यही था वो जादू जो साल 1987 में आई इस फिल्म में हमें नजर आया, जिसमें रेखा (Rekha), नसीरुद्दीन शाह और अनुराधा पटेल समेत कई स्टार्स दिखे और फिल्म खूब चर्चा में रही।

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    पंचम दा (Puncham Da Songs) और आशा ताई (Asha Bhosle Songs) ने साथ में कई गाने बनाए और ये उन्हीं में से बना एक आइकोनिक गाना है, जिसे आज भी हम और आप गुनगुना रहे हैं।

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