41 की उम्र में मौत, जिंदगी के सफर को सुहाना बनाने वाली बनाई धुन; लता-रफी के चहेते संगीतकार ने दिए कल्ट गीत
हिंदी सिनेमा में एक संगीतकार जोड़ी ऐसी आई, जिसने 50 और 60 के दशक में हिट गानों की झड़ी लगा दी, लेकिन ये जोड़ी जल्द ही टूट भी गई।

वो संगीतकार जोड़ी जिसने दिए कई हिट गाने (फोटो- X)
HighLights
वो संगीतकार जोड़ी जो बिखर गई
सिनेमा को दिए कई यादगार गीत
राज कपूर की फिल्म से मिला था ब्रेक
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा महान संगीतकारों की फेहरिस्त में कुछ नाम आज भी ऐसे हैं, जिनका संगीत हमेशा अमर रहेगा। इसी में से एक नाम है 60 और 70 के दशक की उस महान संगीतकार जोड़ी का, जिन्होंने महज कुछ सालों में कई हिट गाने दिए, लेकिन ये जोड़ी टूट गई और सिनेमा के संगीत का एक सितारा हमेशा के लिए चला गया। आज कहानी उन्हीं की...
कौन थे वो संगीतकार?
दरअसल आज जिस संगीतकार जोड़ी का जिक्र हम कर रहे हैं उस जोड़ी का नाम है शंकर-जयकिशन। इस जोड़ी में से आज बात जयकिशन की, जिनका पूरा नाम जयकिशन दयाभाई पांचाल था। 4 नवंबर 1929 को जन्मे जयकिशन का जन्म गुजरात के छोटे से गांव में हुआ था। बचपन से उन्हें हारमोनियम बजाने का शौक था।
शुरूआत में उन्होंने संगीत की शिक्षा ली और फिर वो करियर के लिए मुंबई आ गए। मुंबई आने के बाद उन्होंने एक फैक्ट्री में काम किया। इसी बीच मुंबई में पृथ्वी स्टूडियोज में काम करने वाले शंकर सिंह रघुवंशी की मुलाकात एक गुजराती निर्देशक चंद्रवदन भट्ट के दफ्तर के बाहर जयकिशन से हुई।

शंकर उस दौरान पृथ्वीराज (Prithviraj Kapoor) के यहां तबला बजाते थे। बस यहीं से शंकर-जयकिशन (Shankar Jaikishan) की बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा। शंकर ने जयकिशन को पृथ्वी थिएटर में काम का प्रस्ताव दिया और पृथ्वीराज कपूर ने उन्हें अपने पास रख भी लिया और फिर सिनेमा को मिल गई एक शानदार संगीतकार जोड़ी।
शंकर-जयकिशन की हिट जोड़ी
पृथ्वीराज स्टूडियोज में काम करते हुए शंकर-जयकिशन ने साथ में धुनें बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद राज कपूर (Raj Kapoor) की निर्देशन वाली पहली फिल्म में उन्होंने संगीत देने का मौका मिला। साल 1948 में आई फिल्म आग से ब्रेक मिला। इस फिल्म का संगीत संगीतकार राम गांगुली संभाल रहे थे।
रामकुमार गांगुली के असिस्टेंट बनकर शंकर-जयकिशन को फिल्म में काम करने का मौका मिला, लेकिन राम गांगुली के कुछ मतभेद हो गए और फिर जिम्मेदारी शंकर-जयकिशन पर आई। इसके बाद उन्होंने फिल्म का गाना बरसात तैयार किया। इस फिल्म के बाद तो शंकर-जयकिशन के लिए इंड्स्ट्री के दरवाजे खुल गए।

बाद में राज कपूर ने अपनी फिल्म बरसात के लिए शंकर-जयकिशन को चुना। साल 1949 से 1960 तक में शंकर-जयकिशन की जोड़ी इंड्स्ट्री में उभरकर सामने आई।
इस संगीतकार जोड़ी ने इस दौरान 'अनाड़ी', 'श्री 420', 'हलाकु', 'काली घटा', 'बरसात', 'बेगुनाह', 'उजाला', 'आह', 'दाग', 'पूनम', 'पतिता', 'नगीना', 'कन्हैया', 'औरत', 'चोरी चोरी', 'लव मैरिज', 'बादशाह', 'नया घर', 'शिकस्त', 'बूट पॉलिश', 'आवारा', 'कठपुतली', 'न्यू दिल्ली', 'बसंत बहार', 'मयूरपंख', 'मैं नशे में हूं', 'यहूदी', 'पर्वत', 'शरारत', 'छोटी बहन', 'सीमा', 'बादल' समेत कई हिट फिल्मों में अपने संगीत से जान फूंक दी। इन क्लासिक फिल्मों के गाने हिट रहे। राज कपूर, दिलीप कुमार, देव आनंद और नूतन समेत कई दिग्गज सितारे इन फिल्मों में दिखे।

हिट गानों का तोहफा दे गई जोड़ी
इस जोड़ी की सबसे खास बात यह थी कि जयकिशन बैकग्राउंड स्कोर, रोमांटिक गानों और कैची गानों की धुन बनाने में माहिर थे। दोनों के बीच एक बड़ा अलग तरह का एग्रीमेंट था कि वो कभी यह खुलासा नहीं करेंगे कि कौन सा गाना किसने कंपोज किया है।
'आवारा हूं', 'प्यार हुआ इकरार हुआ', 'किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार', 'अजीब दास्तां है ये', 'ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर', 'चाहे कोई मुझे जंगली कहे', 'ऐ भाई जरा देख के चलो' और ना जाने ऐसे कितने नगमे जो इस जोड़ी ने सिनेमा को दिए। नौशाद, रोशन, एस. डी. बर्मन, ओ. पी. नैय्यर, सी. रामचंद्र, सलिल चौधरी और मदन मोहन जैसे दिग्गजों के कड़े मुकाबले के बावजूद भी शंकर-जयकिशन की जोड़ी टॉप पर रही।

उनकी कोर टीम में गीतकार शैलेंद्र और हसरत जयपुरी के अलावा सिंगर मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi), आशा भोसले (Asha Bhosle) और लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) शामिल थे। इसके साथ ही पृथ्वीराज कपूर और राज कपूर की आर.के. फिल्म्स के शंकर-जयकिशन इन हाउस संगीतकार रहे। आर.के. फिल्म्स की फिल्मों में इनका ही संगीत होता था।
41 की उम्र में जयकिशन का निधन
अपने गीतों से पहचान बनाने वाले और सिनेमा को ऐतिहासिक गाने वाली ये जोड़ी एक दम से टूट गई। दरअसल साल शराब के सेवन से हुई लिवर सिरोसिस बीमारी के कारण 12 सितंबर 1971 को जयकिशन का निधन हो गया। उनके निधन के बाद भी शंकर एकदम से टूट गए।

जयकिशन के जाने के बाद शंकर ने उन अधूरे गानों को पूरा किया जो रह गए थे। इसके बाद शंकर अकेले काम करते रहे, लेकिन उन्होंने अपने जोड़ीदार जयकिशन का नाम अपने नाम के साथ जोड़े रखा। वह हमेशा ही शंकर-जयकिशन के नाम का ही इस्तेमाल करते थे। ये शंकर-जयकिशन की जोड़ी ही थी जिसने भारतीय सिनेमा में ऑर्केस्ट्रा संगीत को एक नई ऊंचाई और खास पहचान दिलाई।
आज सालों बाद भी शंकर-जयकिशन (Shankar Jaikishan Songs) की जोड़ी का संगीत लोगों के मन में है। आज भी इनका संगीत लोग सुन रहे हैं और इनके बनाए गानों के द्वारा इन्हें याद करते हैं।
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