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3 दिन तक सड़ती रही लाश... छोटी बहन से पति का था अफेयर; दर्दनाक है 700 फिल्मों वाली पहली हीरोइन की कहानी

Published: Wed, 14 Jan 2026 07:17 PM (IST)

हिंदी सिनेमा में ऐसे कई कलाकार रहे हैं, जिनके जीवन में परेशानियों के पत्थर ऐसे पड़े कि उन्हें दिन-रात मुश्किलों ...और पढ़ें

एक हादसे ने बदल दी एक्ट्रेस की जिंदगी

एक हादसे ने बदल दी एक्ट्रेस की जिंदगी

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। किस्मत अच्छी हो क्या कुछ नहीं हो सकता और किस्मत के सितारे अगर बुलंद ना हो तो कहीं भी कभी भी धोखा मिल सकता है। हिंदी सिनेमा में ऐसे कई कलाकार रहे हैं, जिनके जीवन में परेशानियों के पत्थर ऐसे पड़े कि उन्हें दिन-रात मुश्किलों का ही सामना करना पड़ा। आज हम आपको एक ऐसी ही एक्ट्रेस की कहानी सुनाएंगे, जिसकी किस्मत बड़ी बदनसीब रही। नाम और शौहरत तो मिली लेकिन अपने ही रिश्ते उन पर भारी पड़ गए।

साइलेंट फिल्मों से करियर की शुरूआत

वो साल 1916 का था जब महाराष्ट्र के नासिक में ललिता पवार का जन्म हुआ। ललिता का पहले नाम अंबिका था। जब ललिता का जन्म हुआ तब उनकी मां मंदिर गईं थीं और उसी दौरान को प्रसव पीड़ा हुई और मंदिर के बाहर ही ललिता का जन्म हुआ। अब क्योंकि वो अंबे मां के मंदिर के बाहर जन्मीं थीं तो उनका नाम अंबिका रख दिया गया।

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इसी बीच एक बार वो भाई के जब पुणे में फिल्म की शूटिंग देखने गईं तो यहीं पर डायरेक्टर नाना साहेब ने उन्हें अपनी फिल्मों में चाइल्ड एक्टर का ऑफर दे दिया और फिर 9 साल की उम्र में ही ललिता ने काम करना शुरू कर दिया। आखिरकार साल 1928 में राजा हरिशचंद्र नाम की फिल्म से करियर की शुरूआत की। इसके बाद हिम्मत-ए-मर्दां' (1935) जैसी फिल्मों में दिखीं। 40 के दशक में वो कई साइलेंट फिल्मों में नजर आईं। कभी एक्शन फिल्मों में काम किया तो कभी वो मायथोलॉजिकल फिल्मों में भी दिखीं।

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एक हादसे ने बदली ललिता की जिंदगी

हिंदी फिल्मों में आने के बाद ललिता ने पहले तो कई साइलेंट फिल्मों में काम किया। इसके बाद वो धीरे-धीरे और फिल्मों में दिखने लगीं। इसी बीच एक हादसे ने सबकुछ बदलकर रख दिया। दरअसल साल 1942 में चंद्र राव की फिल्म 'जंग-ए-आजादी' में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ललिता के को-स्टार भगवान दादा को उन्हें एक थप्पड़ मारना था।

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सारी तैयारी के बाद जैसे ही एक्शन बोला गया तो भगवान दादा ने ललिता को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि ललिता मौके पर ही बेहोश हो गईं। पहले तो लोगों को लगा की ललिता बेहोशी का नाटक कर रही हैं, क्योंकि सीन में हैं लेकिन बाद में जब वो नहीं उठीं तो देखा कि उनके कान से खून आने लगा। इसके तुरंत बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान डॉक्टर्स की गलती के चलते ललिता के दाहिने शरीर में लकवा मार गया। इसके बाद उनकी आंख खराब हो गई। इसके बाद उनके हाथ से कई फिल्में चली गईं।

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सिनेमा की विलेन बनी ललिता

इस हादसे ने सबकुछ बदल दिया। लेकिन ललिता ने हार नहीं मानी और कुछ सालों के बाद वो वापस से कमबैक करने आईं और 1948 में एक बंद आंख के साथ उन्होंने फिल्म गृहस्थी से कमबैक किया। वो हीरोइन के रोल से हटकर अब विलेन के रोल करने लगीं। कठोर सास बनतीं तो कभी धांसू विलेन बनकर पर्दे पर आतीं।

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उनका ये अंदाज भी दर्शकों को भा गया और उन्हें कई फिल्में मिलने लगीं। उनके नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज है। उनके नाम 'सबसे लंबे समय तक काम करने वाली अभिनेत्री' का रिकॉर्ड है। उन्होंने 7 दशक तक काम किया और 700 फिल्मों में भी काम किया। श्री 420', 'अनाड़ी', 'प्रोफेसर', 'दो रास्ते', और 'आनंद' समेत कई हिट फिल्मों में वो नजर आईं।

रामायण की मंथरा बन जीता दर्शकों का दिल

रामानंद सागर की रामायण में कई किरदार नजर आए और उन किरदारों ने दर्शकों के दिलों पर राज किया और इन्हीं में से एक किरदार था मंथरा का। इस किरदार को किसी और ने नहीं बल्कि ललिता पवार ने ही निभाया था।

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जब उन्हें ये किरदार मिला तो वो इससे पहेल ही करीब 60 साल से ज्यादा तक सिनेमा में काम कर चुकी थीं। उम्र के इस पड़ाव पर भी ललिता का ये किरदार भी अमर हो गया। हर तरफ उन्हें मंथरा के नाम से जाना जाने लगा।

बहन ही बन बैठी ललिता की सौतन

प्रोफेशनल करियर में ललिता ने जितने उतार-चढ़ाव देखे, तो वहीं निजी जिंदगी में भी ललिता का जीवन मुश्किलों भरा रहा। ललिता ने प्रोड्यूसर गणपतराव पवार से शादी की थी। हालांकि इस शादी में मुश्किल तब आई जब ललिता को पता चला कि उनके पति का अफेयर उनकी ही छोटी बहन से चल रहा था।

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ललिता इससे बुरी तरह से टूट गईं और फिर उन्होंने गणपतराव को छोड़कर फिल्म प्रोडयूसर राजप्रकाश गुप्ता से शादी कर ली और इनसे उन्हें एक बेटा भी हुआ।

घर में सड़ती रही थी लाश

ललिता पवार की दूसरी शादी के बाद उन्हें एक बेटा हुआ और फिर धीरे-धीरे ललिता की जिंदगी चार दीवारी में कैद होने लगी। ललिता पुणे के अपने बंगले आरोही में अंतिम सांस लेकर चली गईं। 1998 में ललिता का इसी बंगले में निधन हो गया। जिस वक्त ललिता का निधन हुआ, उस वक्त उनके पास कोई मौजूद नहीं था।

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उनके पति अस्पताल में भर्ती थे और बेटा मुंबई में अपने परिवार के साथ था। ललिता के निधन के बाद तीन दिन तक उनकी लाश घर में सड़ती रही और इसका पता तब चला जब उनके बेटे ने फोन किया। बाद में पुलिस ने आकर घर का दरवाजा तोड़ा और देखा कि ललिता का शव वहां पड़ा हुआ है।

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गाना गाने की शौकीन थीं, कई फिल्मों में एक्शन भी किया। 700 से ज्यादा फिल्मों में काम करके मशहूर हुईं और कई खिताब अपने नाम किया। ललिता पवार (Lalita Pawar) की जिंदगी बेहद चर्चित रही और अंत में हिंदी सिनेमा को कई यादें देकर वो चली गईं।

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