58 साल पहले Lata Mangeshkar के गाने ने बचाई थी कई आशिकों की जान, 'संजीवनी' बना था वो कालजयी गीत
क्या कोई गाना किसी की जान बचा सकता है? 1968 में एक ऐसी ही फिल्म आई जिसने ना जाने कितने ...और पढ़ें

लोगों के लिए 'वरदान' साबित हुआ वो गाना

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में लता मंगेशकर वो सिंगर रही हैं, जिन्होंने कई यादगार गाने गाए हैं। लता दीदी के सुरों के तोहफे अनमोल हैं। कभी उनके गानों में हंसी-ठिठोली दिखी, तो कभी उन्होंने अपने गानों से प्रेम का असली मतलब सिखाया तो कभी उनके गाने जीवन का सबक बनकर गए। आज हम आपको लता दीदी के उस गाने की कहानी बताएंगे जिसने ना जाने कितने लोगों की जान बचाई।
1968 में आया था वो गाना
लता मंगेशकर के गानों को सुनने के बाद लोगों को ऐसा भी सुकून मिला है कि कईयों ने अपनी जिंदगी को खत्म होने से बचाया। दरअसल 1968 में एक फिल्म आई थी।
फिल्म का नाम था 'सरस्वतीचंद्र' (Sarswatichandra)। इस फिल्म में एक ऐसा गाना था, जिसने कई लोगों की जान बचाई। इस गाने नाम था "छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए, यह मुनासिब नहीं आदमी के लिए..." (Chhod De Saari Duniya Kisi Ke Liye)।
इस गाने को लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने आवाज दी थी। गाने का संगीत तैयार किया आनंदजी-कल्याणजी ने और इस गाने के लिरिक्स लिखे थे इंदिवर ने। इस गाने को फिल्म के लीड स्टार्स नूतन (Nutan) और मनीष पर फिल्माया गया था। अब सवाल ये है कि आखिर इस गाने ने कैसे दिलटूटे आशिकों की जान बचाई।
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दिलटूटे आशिकों के लिए 'वरदान' बना गाना
दरअसल फिल्म के इस गाने को जिस तरह से लिखा गया वो वाकई में कमाल था। गाने के बोल इंदिवर ने लिखे थे और गाने के ये बोल तो कमाल थे ही लेकिन ऊपर से लता जी की आवाज ने इन्हें और खास बना दिया। गाने के शब्दों में एक बहुत बड़ा जीवन दर्शन छिपा था कि किसी एक इंसान के पीछे अपनी कीमती जिंदगी खत्म करना सही नहीं है।

कहा जाता है कि, फिल्म की रिलीज के बाद लता मंगेशकर और संगीतकार जोड़ी को ढेरों खत मिले। उनमें लोगों ने कबूल किया कि वे नाकाम मोहब्बत में अपनी जान देने जा रहे थे, लेकिन जब रेडियो पर यह गाना बजा और उन्होंने इन पंक्तियों को सुना, तो उनका इरादा बदल गया।
लता दीदी की आवाज में था जादू
कहा जाता है कि ये गाना आया तो कई मनोचिकित्सकों ने इसे थैरेपी भी माना और कहा कि ये गाना वाकई में लोगों को सुकून पहुंचाकर गया। इसके साथ ही जो लोग डिप्रेशन का शिकार थे, कहीं ना कहीं उन्हें भी उससे बाहर निकलने में इस गाने ने मदद की।
माना ये भी गया कि लता दीदी की (Lata Mangeshkar Songs) आवाज में एक ऐसी हीलिंग पावर थी कि लोग खुद ब खुद शांत हो गए। आज भी सालों बाद ये गाना लोग खूब सुनते हैं और लोगों की माने तो मन को शांत करने में ये गाना वाकई में मदद करता है।
