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80 साल पहले बनाई कल्ट फिल्म, धर्मेंद्र-राजेश खन्ना को बनाया स्टार; 20 साल छोटी हीरोइन से था डायरेक्टर का अफेयर

Published: Mon, 06 Jul 2026 04:06 PM (IST)

हिंदी सिनेमा को कई महान फिल्में देने वाले एक डायरेक्टर ने अपनी पहली फिल्म से कांस फिल्म फेस्टिवल में इतिहास रचा था। इनकी कहानी बड़ी ही दिलचस्प है..

पहली ही फिल्म से इतिहास रचने वाले डायरेक्टर की कहानी

पहली ही फिल्म से इतिहास रचने वाले डायरेक्टर की कहानी

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में मशहूर और दिग्गज अभिनेता देव आनंद के नाम को हर कोई जानता है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि देव आनंद को असली स्टार बनाने में उनके भाई का ही हाथ था। ये वही फिल्ममेकर हैं, जिनकी फिल्म ने पहली बार कान्स फिल्म फेस्टिवल में जाकर इतिहास रचा।

बड़ी बात यह है कि उस रिकॉर्ड को आजतक कोई नहीं तोड़ पाया। ये वही फिल्ममेकर हैं जिन्होंने हीर रांझा से लेकर ना जाने कितनी यादगार फिल्में बनाईं, आज कहानी उन्हीं की...

कौन थे चेतन आनंद?

चेतन आनंद के बारे में भले ही लोग ज्यादा जिक्र ना करते हों, लेकिन यह बात सच है कि, चेतन आनंद ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं। असल में चेतन आनंद (Chetan anand) सुपरस्टार देव आनंद (Dev Anand) के बड़े भाई थे। 3 जनवरी 1915 को लाहौर में (कुछ लोगों के मुताबिक पंजाब में) जन्मे चेतन आनंद का जन्म पिशोरी लाल आनंद के घर में हुआ था।

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पढ़ाई में वह बचपन से ही होशियार थे। पढ़ाई के दौरान ही इनकी दिलचस्पी हिंदी सिनेमा की ओर जागने लगी। आखिरकार उन्होंने 1940 में एक फिल्म पर काम करना शुरू किया। बाद में इस फिल्म ने इतिहास रचा और यह फिल्म नीचा नागर।

पहली ही फिल्म ने रचा इतिहास

चेतन आनंद ने जब फिल्मी दुनिया में कदम रखा तो उन्होंने एक्टिंग भी की, लेकिन बाद एक्टिंग में नहीं बनी। उन्हें लगा कि फिल्मों की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं, तो क्यों ना इन स्क्रिप्ट्स को बेचकर पैसा कमाया जाए। इसी जद्दोजहद के बीच उन्हें फिल्म नीचा नागर (Neecha Nagar) बनाने का मौका मिला। ख्वाजा अहमद अब्बास द्वारा लिखी गई इस फिल्म की कहानी काफी अलग थी। ये वो दौर था जब सिनेमा में साइलेंट फिल्मों का दौर खत्म हुआ था और बोलती हुई फिल्में बनने लगी थीं।

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नए-नए प्रोजेक्ट्स पर फिल्में बन रही थी। आखिरकार उन्होंने नीचा नागर बनाई और डायरेक्ट की। इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टिवल में जाकर बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड Palme D'OR मिला, जिसे पहले ग्रैंड पिक्स के नाम से जाना जाता था। यह फिल्म इतिहास रच गई।

बड़ी बात यह है कि नीचा नागर आजतक की इकलौती ऐसी भारतीय फिल्म है, जिसे ये सम्मान मिला हुआ है और ये रिकॉर्ड आजतक कोई नहीं तोड़ पाया। इस फिल्म के बाद चेतन आनंद सुपरहिट डायरेक्टर की लिस्ट में आ गए।

सिनेमा को दी यादगार फिल्में

इस फिल्म के बाद उन्होंने भाई चेतन आनंद के साथ मिलकर एक प्रोडक्शन हाउस खोला। इस प्रोड्क्शन हाउस में उन्होंने अफसर फिल्म बनाई, जो इसकी पहली फिल्म थी। इस फिल्म के हीरो देव आनंद ही थे और यह फिल्म हिट रही और देव आनंद का करियर भी चल पड़ा।

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इसके बाद उन्होंने आंधियां, टैक्सी ड्राइवर समेत दूसरी फिल्में भी बनाईं। इसके बाद साल 1964 में एक फिल्म चेतन आनंद ने बनाई और फिल्म का नाम था हकीकत। भारत-चीन युद्ध पर बनी इस फिल्म को डायरेक्ट और प्रोड्यूस चेतन आनंद ने ही किया। फिल्म में धर्मेंद्र समेत कई स्टार्स थे।

ये वॉर ड्रामा देशभक्ति फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसके बाद उन्होंने आखिरी खत फिल्म बनाई, जो कि राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) की डेब्यू फिल्म थी। आखिरकार साल 1970 में उन्होंने एक और मास्टरपीस हिंदी सिनेमा को दिया।

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हीर-रांझा जैसी यादगार फिल्म बनाई

साल 1970 में चेतन आनंद ने एक नया प्रयोग किया और यकीन मानिए, ये प्रयोद सफर रहा। दरअसल साल 1970 में उन्होंने फिल्म हीर-रांझा (Heer Ranjha Movie) बनाई। यह पूरी फिल्म पद्य यानि कविता के अंदाज में लिखी गई। फिल्म के सारे डायलॉग्स एक लय में कविता भरे अंदाज में थे। फिल्म में उन्होंने राज कुमार (Raj Kumar) को लीड रोल में लिया और उनके अपोजिट नजर आईं प्रिया राजवंश।

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हिंदी सिनेमा को यहीं से एक नई हीरोइन भी मिली। इस फिल्म से चेतन आनंद और प्रिया के रिश्ते की भी शुरूआत हुई। इसके बाद चेतन आनंद अपनी हर फिल्म में प्रिया आनंद को ही लेते थे। इस फिल्म के बाद उन्होंने हंसते जख्म (1973) और कुदरत (1981) जैसी शानदार थ्रिलर फिल्में भी बनाईं।

प्रिया राजवंश के साथ रहा खास रिश्ता

असल में कहा जाता है कि प्रिया (Priya Rajvansh) और चेतन आनंद का रिश्ता हकीकत फिल्म के दौरान ही शुरू हो गया था। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों एक दूसरे को चाहने लगे थे। दोनों की उम्र में करीब 20 साल का फासला था, लेकिन प्यार के लिए ये फासला कुछ मायने नहीं रखता था।

चेतन आनंद के साथ कई फिल्में करने के बाद प्रिया ने अपना करियर छोड़ दिया और वह चेतन के साथ ही रहने लगीं। चेतन आनंद पहले से ही शादीशुदा थे, लेकिन पत्नी के साथ उनके रिश्ते थोड़े ठीक नहीं थे। इसलिए वह भी प्रिया को अपने पास रखने लगे। प्रिया और चेतन सालों तक एक साथ रहे।

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साल 1997 में चेतन आनंद का निधन हो गया और निधन के बाद वो लगभग सारी संपत्ति पत्नी उमा और बच्चों के बजाय प्रिया राजवंश के नाम कर गए। दोनों करीब 20 साल तक साथ रहे। इसके बाद संपत्ति को लेकर काफी झगड़ा भी हुआ और फिर चेतन आनंद की मौत के तीन साल बाद संदिग्ध हालत में प्रिया की भी मौत हो गई।

27 मार्च 2000 को प्रिया राजवंश का शव उनके जुहू स्थित बंगले से बरामद हुआ। इस कत्ल का आरोप चेतन के दोनों बेटों और नौकर पर भी लगा। हालांकि बाद में सबको बरी कर दिया गया।

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